भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की सभी धाराएं | BNSS Sections in Hindi


जब किसी व्यक्ति के साथ कोई अपराध होता है, जैसे चोरी, मारपीट या कोई और गंभीर बात, तो सबसे पहले पुलिस में शिकायत यानी FIR दर्ज कराई जाती है। इसके बाद पुलिस जांच करती है, आरोपी को पकड़ती है, फिर अदालत में केस चलता है। अगर आरोपी दोषी पाया जाता है, तो उसे सजा मिलती है। अब तक यह सारी प्रक्रिया पुराने कानून, यानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 के नियमों के हिसाब से चलती थी। लेकिन यह कानून बहुत पुराना था, जिसमें कई नियम बहुत लंबे और कठिन थे। इसी वजह से लोगों को इंसाफ मिलने में बहुत देर होती थी, और जांच भी ठीक से नहीं हो पाती थी। इन्हीं दिक्कतों को सुधारने के लिए सरकार ने पुराने सीआरपीसी को हटाकर एक नया कानून बनाया, जिसका नाम है – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023)।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता क्या है और यह कानून कब लागू हुआ?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में पास किया गया एक नया कानून है। यह कानून पुराने आपराधिक कानून 'दंड प्रक्रिया संहिता' (Criminal Procedure Code – CrPC), 1973 की जगह लाया गया है। CRPC एक ऐसा कानून था जो किसी अपराध की जांच, गिरफ्तारी, केस चलाना और सजा देने की प्रक्रिया को तय करता था। भारतीय संसद ने बीएनएसएस (BNSS) को दिसंबर 2023 में पास किया और इसे 1 जुलाई 2024 से देशभर में लागू कर दिया गया।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) को बनाने का मकसद देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को बेहतर और आम जनता के लिए आसान बनाना है। इस कानून को लागू करने के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है:-

जांच जल्दी पूरी हो अब पुलिस को जल्दी से जल्दी सबूत (Evidence) इकट्ठा करके केस निपटाना होगा व केस को लंबे समय तक खिचने की इजाजत (Permission) नहीं होगी।

सब कुछ साफ-साफ हो पुलिस और अदालत जो भी करेंगी, उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे हर व्यक्ति यह जान सकेगा कि क्या कार्यवाही हो रही है और इससे कोई भी गलत काम नहीं होगा।

तकनीक का सही इस्तेमाल हो अब FIR घर बैठे ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही वीडियो कॉल से भी सुनवाई हो सकती है। अब सबूत की फोटो और वीडियो लेना जरूरी होगा।

सबको आसानी से न्याय मिले चाहे कोई भी हो, अमीर हो या गरीब, पढ़ा-लिखा हो या न हो, हर कोई बिना डर के अपने केस दर्ज करवा सकेगा और जल्दी न्याय पा सकेगा। का कारावास, जुर्माना या दोनों या सामुदायिक सेवा का प्रावधान है।


बीएनएसएस में किए गए प्रमुख बदलाव और विशेषताएं

1. प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की नई सुविधा अब FIR दर्ज कराने के लिए थाने (Police Station) में जाना जरुरी नहीं है। इसका मतलब है कि अब अब आप इस काम को घर बैठे ऑनलाइन भी कर सकते है। मतलब, आप ई-मेल, वीडियो कॉल या मोबाइल ऐप के ज़रिए भी अपनी शिकायत दर्ज (Complaint Register) करवा सकते हैं।
इसके अलावा, ‘ZERO FIR की सुविधा भी दी गई है। इसका मतलब है कि अगर आपके साथ कोई घटना हुई है तो आप किसी भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं, भले ही अपराध कहीं और हुआ हो। इसके बाद में वह मामला सही थाना क्षेत्र को भेज दिया जाएगा।

2. पुलिस जांच में वीडियो और फोटो का इस्तेमाल अब जब भी कोई अपराध होता है, तो पुलिस को उस जगह की वीडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरें लेनी होंगी। इससे यह फायदा होगा कि सबूत सुरक्षित रहेंगे और बाद में कोई उनके साथ छेड़छाड़ (Tempering) नहीं कर सकेगा।

3. अदालत में वीडियो के ज़रिए पेशी अब अदालत (Court) में पेश (Appear) होने के लिए हर बार व्यक्ति को कोर्ट जाने की ज़रूरत नहीं होगी। अगर ज़रूरी हो तो आरोपी, पीड़ित या गवाह को वीडियो कॉल के ज़रिए भी अदालत में पेश किया जा सकता है। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

4. महिलाओं और बच्चों के लिए खास सुरक्षा अब किसी महिला को रात 6 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले गिरफ्तार (Arrest) नहीं किया जा सकता, जब तक मजिस्ट्रेट से अनुमति (Permission) न ली जाए।
बच्चों के मामलों में पुलिस को बहुत समझदारी और नरमी से काम लेना होगा, ताकि बच्चे डरे नहीं और उन्हें इंसाफ मिल सके।

5. पीड़ित को समय-समय पर जानकारी देना अब पुलिस को ज़रूरी होगा कि वह पीड़ित को उसके केस की पूरी जानकारी समय-समय पर देती रहे। जैसे – केस की जांच कहां तक पहुंची, चार्जशीट कब दाखिल हुई, अगली सुनवाई कब है आदि। इससे पीड़ित को यह भरोसा बना रहेगा कि उसका मामला गंभीरता से लिया जा रहा है।

6. समय पर जांच और सुनवाई पूरी करना अब पुलिस और अदालत दोनों को अपने-अपने काम तय समय (Fixed Time) के अंदर ही पूरे करने होंगे। यानी पुलिस को तय समय में जांच (Investigation) पूरी करनी होगी और अदालत को सुनवाई (Hearing) में देरी नहीं करनी होगी। इससे वो मामले जो पहले कई सालों तक चलते थे, अब जल्दी निपट सकेंगे और लोगों को समय पर न्याय मिलेगा।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में जोड़ी गई नई धाराएं

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता , 2023 में कुल 531 धाराएँ हैं। इसमें 39 अध्याय (Chapters) और 2 अनुसूचियाँ (Schedules) भी शामिल हैं। यह कानून भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की जगह लाया गया है, जिसमें पहले जिसमें पहले 37 अध्यायों में 484 धाराएँ थीं। BNSS में 11 नई धाराएँ भी जोड़ी गई हैं और पुराने कानून यानि दंड प्रक्रिया संहिता की 85 मौजूदा धाराओं में संशोधन (Amendment) किया गया है।

बीएनएसएस में जोड़ी गई 11 नई धाराएँ
धारा 105 – तलाशी और जब्ती के दौरान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करना अनिवार्य पुलिस को जब भी तलाशी या जब्ती करनी हो, उसे ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड करना होगा।

धारा 185(2) – मोबाइल फोन से भी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड करने की अनुमति होगी। पुलिस अधिकारी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर तलाशी की रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।

धारा 530 – जांच, पूछताछ और सुनवाई में डिजिटल माध्यम का उपयोग अब वीडियो कॉल या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कोर्ट की सुनवाई और पूछताछ (Inquiry) हो सकती है।

धारा 4 – समुदाय सेवा (Community Service) को सजा के रूप में शामिल करना अपराधियों (Criminals) को जेल भेजने की बजाय समाज सेवा करने का मौका दिया जाएगा।

धारा 61 – फरार अपराधी की अनुपस्थिति में मुकदमा चलाना जो आरोपी फरार हैं, उनके खिलाफ बिना उनकी मौजूदगी के सुनवाई हो सकती है।

धारा 173 –E- FIR यानी ऑनलाइन FIR दर्ज करने का प्रावधान शिकायतकर्ता अब घर बैठे या ऑनलाइन FIR दर्ज करा सकते हैं।

धारा 176 – फॉरेंसिक जांच अनिवार्य सभी गंभीर मामलों में फॉरेंसिक जांच कराना जरूरी होगा।

धारा 43(3) – गिरफ्तारी के दौरान हथकड़ी लगाने की अनुमति पुलिस को सुरक्षा के लिए हथकड़ी लगाने का कानूनी अधिकार मिलेगा।

धारा 185 – बिना वारंट तलाशी की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी तलाशी देते वक्त पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।

धारा 479 – विचाराधीन कैदियों के लिए नियम जिन्हें अभी दोषी नहीं ठहराया गया, उन्हें ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जाएगा।

धारा 258 और 346 – जांच और सुनवाई के लिए समय-सीमा तय करना केस की जांच और सुनवाई को जल्दी खत्म करने के लिए समय तय किया गया है, जैसे 30 से 45 दिन के अंदर फैसला।


भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) और BNSS में क्या मुख्य अंतर है?

1. पुराना व नया कानून CRPC पुराना कानून है जो 1973 में बना था और ब्रिटिश काल के नियमों के अनुसार चलता था, जबकि BNSS नया कानून है जो 2023 में आया है।

2. प्रक्रिया में बदलाव सीआरपीसी में कई पुरानी और लंबी प्रक्रियाएं थीं, लेकिन BNSS में जांच और मुकदमे की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया गया है।

3. तकनीक का इस्तेमाल सीआरपीसी में तकनीक (Technology) का कम इस्तेमाल था, लेकिन BNSS में FIR ऑनलाइन दर्ज करना, वीडियो कॉल से सुनवाई जैसी डिजिटल सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

4. पीड़ितों के अधिकार बीएनएसएस में पीड़ितों (Victims) को केस की हर जानकारी देने और उनकी सुरक्षा का ख्याल रखने के नियम शामिल हैं, जो CRPC में कम थे।

5. महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान BNSS में महिलाओं और बच्चों के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा नियम हैं, जैसे रात के समय महिला की गिरफ्तारी पर रोक।


बीएनएसएस का पुलिस और अदालत पर असर

बीएनएसएस कानून से पुलिस और कोर्ट का काम करने का तरीका बहुत बेहतर हुआ है। अब दोनों जल्दी और सही तरीके से काम करते हैं। पहले पुलिस की जांच में बहुत समय लग जाता था और कभी-कभी पीड़ितों को पता नहीं चलता था कि उनका मामला कहाँ तक पहुंचा है। इस कानून के लागू होने के बाद से पुलिस ज्यादा जिम्मेदार हो गई है।

कोर्ट में भी अब वीडियो कॉल से सुनवाई हो सकती, जिससे न्याय मिलने में आसानी और समय की बचत होती है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी खास नियम बनाए गए हैं। इसलिए BNSS की वजह से पुलिस और कोर्ट दोनों का काम आसान और तेज हो गया है और लोगों को जल्दी न्याय मिलता है।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएनएसएस क्या है?
बीएनएसएस (BNSS) का पूरा नाम है – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023। यह एक नया कानून है, जो पुराने कानून CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता, 1973) की जगह लाया गया है। इसका मकसद अपराध के मामलों की जांच, सुनवाई और सजा की प्रक्रिया को तेज़, आसान और तकनीक से जुड़ा बनाना है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कब से लागू हुआ?
बीएनएसएस कानून को 25 दिसंबर 2023 को संसद में पारित किया गया था, लेकिन यह पूरे देश में 1 जुलाई 2024 से लागू किया जाएगा।

दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) को क्यों लागू किया गया?
बीएनएसएस को नए कानून के रुप में इसलिए लागू किया गया, क्योंकि पुराना कानून (CRPC) बहुत लंबा, मुश्किल और ज्यादा समय लेने वाला था। नया कानून लोगों को जल्दी और साफ तरीके से न्याय दिलाने के लिए लाया गया है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में कौन से नए प्रावधानों को जोड़ा गया है?
BNSS में कई नई बातें जोड़ी गई हैं, जैसे:
• ऑनलाइन FIR दर्ज करना
• वीडियो कॉल से अदालत में पेशी
• तलाशी की वीडियो रिकॉर्डिंग
• फॉरेंसिक जांच जरूरी
• समय तय किया गया है कि केस कितने दिन में खत्म हो
• महिलाओं और बच्चों की बेहतर सुरक्षा

क्या बीएनएसएस में किसी नई सजा या जुर्माने को जोड़ा गया है?
हाँ, कुछ अपराधों में समुदाय सेवा की सजा का प्रावधान जोड़ा गया है और जुर्माने की राशि भी कई मामलों में बढ़ाई गई है।

नए कानूनों में महिलाओं के लिए क्या खास प्रावधान है?
महिलाओं को रात में (6 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले) बिना मजिस्ट्रेट की इजाजत के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। साथ ही महिला की जांच और बयान लेने में भी महिला अफसर की मौजूदगी जरूरी होगी।