BNSS Section 126 (CRPC 107) - शांति भंग की आशंका पर कार्रवाई की प्रक्रिया
आज के समय में सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। कई बार कुछ लोग अपने शब्दों, कार्यों या धर्म के नाम पर समाज में अशांति या दंगे फैलाने का प्रयास करते हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 कुछ ऐसे ही ख़ास मामलों में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा से संबंधित है।आज के लेख में हम इस धारा के बारे में विस्तार से बताएंगे कि, बीएनएसएस की धारा 126 क्या है? यह सेक्शन कब लागू होती है? इस सेक्शन के तहत सुरक्षा बंधन (Security Bond) क्या होता है?
यदि कोई व्यक्ति लगातार भड़काऊ भाषण दे रहा है, या अपने कार्यों से किसी भी तरह की हिंसा भड़का सकता है, तो इस तरह के मामलों को रोकने के लिए पहले भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107 लागू की जाती थी। लेकिन नए कानूनों के लागू होने के बाद CrPC की धारा 107 को हटाकर अब BNSS की धारा 126 के तहत शामिल कर दिया गया है।
विषयसूची
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 क्या है?
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 का उद्देश्य क्या है?
- किन परिस्थितियों में बीएनएसएस की धारा 126 लागू होती है?
- बीएनएसएस 126 के तहत की जाने वाली कानूनी कार्यवाही की प्रक्रिया क्या है?
- सुरक्षा बंधन (सिक्योरिटी बांड) क्या होता है?
- इस धारा के तहत क्या सजा व दंड मिलता है?
- बीएनएसएस धारा 126 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 क्या है?
बीएनएसएस की धारा 126 का काम ऐसे मामलों में शांति बनाए रखना है, जहां झगड़े या विवाद के कारण शांति भंग होने की संभावना हो।
आसान भाषा में समझने के लिए, मान लीजिए कि आपके मोहल्ले में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसके व्यवहार से आपको लगता है कि वह झगड़ा कर सकता है, हिंसा कर सकता है। ऐसे में पुलिस या मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को पहले ही चेतावनी दे सकते हैं और उससे शांति बनाए रखने का वादा ले सकते हैं।
बीएनएसएस की धारा 126 को 2 अलग-अलग उपधाराओं के द्वारा बताया गया है, जो कि इस प्रकार है:
- BNSS 126 की उपधारा (1): इसमें अगर किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को पता चलता है कि कोई व्यक्ति झगड़ा करने, हंगामा करने या ऐसा कोई गलत काम करने वाला है जिससे इलाके में शांति भंग हो सकती है, तो मजिस्ट्रेट उसे पहले ही रोक सकता है। इसके लिए वह उस व्यक्ति को नोटिस देकर कारण पूछ सकता है कि क्यों न उसे एक निश्चित समय (अधिकतम एक साल) तक शांति बनाए रखने का आदेश दिया जाए। जरूरत पड़ने पर उसे ज़मानत के साथ या बिना ज़मानत के एक सुरक्षा बंधन (Security Bond) भरने के लिए भी कहा जा सकता है।
- BNSS 126 की उपधारा (2): इस उपधारा के प्रावधान अनुसार बताया गया है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई केवल वही मजिस्ट्रेट कर सकता है, जिसके इलाके में यह खतरा हो। यानी, अगर किसी जगह शांति भंग होने की संभावना है तो जिस मजिस्ट्रेट की सीमा में वह इलाका आता है, वही उस मामले में कार्रवाई कर सकता है। साथ ही अगर कोई व्यक्ति उस इलाके में मौजूद है, जिससे अशांति फैल सकती है, तो भी उस पर कार्रवाई हो सकती है, भले ही उसके द्वारा किए जाने वाला गलत काम किसी और जगह होने वाला हो।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 का उद्देश्य क्या है?
- शांति बनाए रखना: इसका सबसे बड़ा उद्देश्य समाज में शांति बनाए रखना है।
- दंगों व झगड़ो को रोकना: अगर किसी इलाके में दंगा या झगड़ा होने की संभावना है, तो प्रशासन इस धारा का इस्तेमाल करके लोगों को शांत कर सकता है। जैसे, अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से भड़काऊ भाषण देता है, जिससे हिंसा या झगड़ा फैलने का खतरा हो तो प्रशासन धारा 126 का उपयोग कर सकता है।
- अपराधों को पहले ही रोकना: इस धारा का इस्तेमाल करके पुलिस उन लोगों को रोक सकती है जो अपराध करने की योजना बना रहे हैं। जैसे, अगर किसी को पता चलता है कि कुछ लोग आपस में लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो पुलिस या प्रशासन बीएनएसएस सेक्शन 126 का इस्तेमाल करके उन्हें रोक सकती है।
किन परिस्थितियों में बीएनएसएस की धारा 126 लागू होती है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 उन मामलों में लागू होती है, इस बात को समझने के लिए नीचे कुछ ऐसी स्थितियाँ दी गई हैं, जहाँ यह धारा लग सकती है:
1. आपसी झगड़े या विवाद
अगर दो लोग या लोगों का समूहों के बीच किसी बात को लेकर पहले झगड़ा हो चुका है, और उनके बीच आगे फिर से लड़ाई होने का खतरा है, तो मजिस्ट्रेट उन्हें आदेश देते है कि वे शांति बनाए रखें और कोई हिंसा न करें।
2. राजनीतिक या सांप्रदायिक तनाव
अगर किसी राजनीतिक रैली, विरोध प्रदर्शन या धार्मिक कार्यक्रम में झगड़ा होने का खतरा हो और कोई व्यक्ति या समूह उस जगह का माहौल खराब करने की साजिश कर रहा हो, तो इस बात का पता लगते ही मजिस्ट्रेट उसे रोकने के लिए नोटिस भेज सकते है।
3. संपत्ति को लेकर झगड़ा
जब दो लोगों के बीच जमीन, दुकान या किसी संपत्ति को लेकर पहले से झगड़ा हो और दोनों पक्षों के द्वारा आगे भी लड़ाई या हिंसा करने का खतरा हो, तो मजिस्ट्रेट दोनों पक्ष के लोगों से शांति बनाए रखने के लिए उनसे सुरक्षा बांड भरने को कह सकते है।
5. सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट
यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट डाल रहा हो, जिससे समाज में तनाव या नफरत बढ़ सकती है, और इसके साथ ही इससे हिंसा होने के हालात पैदा हो सकते है, तो प्रशासन नागरिक सुरक्षा संहिता सेक्शन 126 के तहत कार्रवाई कर सकता है।
बीएनएसएस 126 के तहत की जाने वाली कानूनी कार्यवाही की प्रक्रिया क्या है?
बीएनएसएस की धारा 126 के तहत की जाने वाली कानूनी कार्यवाही कुछ चरणों में पूरी की जाती है। आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं:
1. शिकायत या सूचना मिलना
सबसे पहले अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि कोई व्यक्ति झगड़ा या हिंसा कर सकता है और इससे शांति भंग हो सकती है, तो वह इसकी जानकारी मजिस्ट्रेट को जाकर दे सकता है। यह जानकारी कोई भी व्यक्ति दे सकता है जैसे पुलिस, कोई आम आदमी या जिसने किसी घटना को होते देखा हो। वह इसकी खबर सीधा मजिस्ट्रेट को दे सकता है। मजिस्ट्रेट इस जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई करते है ताकि शांति बनी रहे।
2. नोटिस जारी करना
अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि सच में किसी व्यक्ति या समूह की वजह से हिंसा हो सकती है, तो वे उस व्यक्ति को एक नोटिस भेजते है। इस नोटिस में साफ लिखा होता है कि उस व्यक्ति को अदालत में हाजिर होकर यह बताना होगा कि वह भविष्य में कोई ऐसा काम नहीं करेगा जिससे शांति भंग हो।
उदाहरण: यदि किसी व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट डाला हो जिससे दंगे भड़क सकते हैं, तो उसे नोटिस भेजकर कोर्ट में बुलाया जा सकता है।
3. व्यक्ति का अदालत में आना
इसके बाद जिस व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है, उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना होता है। मजिस्ट्रेट उससे पूछता है कि क्या वह सच में कोई ऐसा काम करने वाला था जिससे शांति भंग हो सकती थी? इसके बाद उस व्यक्ति को अपने बचाव में सफाई देने का मौका मिलता है।
उदाहरण: यदि किसी व्यक्ति पर यह आरोप है कि वह हिंसा फैलाने की योजना बना रहा था, तो उसे यह साबित करना होगा कि वह निर्दोष है।
4. सुनवाई और निर्णय
इसके बाद मजिस्ट्रेट दोनों पक्षों की बातें ध्यान से सुनते है और उनके द्वारा दिए गए सबूतों को देखते है। अगर उन्हें लगता है कि सच में यह व्यक्ति आगे कोई झगड़ा या हंगामा कर सकता है, तो वह उसे शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र भरने का आदेश देता है।
लेकिन अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि यह व्यक्ति किसी गलतफहमी या झूठी शिकायत का शिकार है और उससे किसी को कोई खतरा नहीं है, तो वह बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ सकते है।
5. सुरक्षा बंधन भरना
अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि यह व्यक्ति भविष्य में झगड़ा या हंगामा कर सकता है, तो वह उसे एक निश्चित समय (जैसे 6 महीने या 1 साल) तक शांति बनाए रखने का वचन देने को कहता है।
इसके लिए उस व्यक्ति को एक सुरक्षा बंधन भरना पड़ता है, जिसमें वह व्यक्ति वादा करता है कि वह कोई ऐसा काम नहीं करेगा जिससे समाज की शांति भंग हो।
कई बार मजिस्ट्रेट उसे कुछ पैसे जमा करने का भी आदेश देते है, ताकि वह नियमों का सही से पालन करें और शांति बनाए रखे।
सुरक्षा बंधन (सिक्योरिटी बांड) क्या होता है?
सुरक्षा बंधन एक प्रकार की कानूनी गारंटी होती है, जिसमें कोई व्यक्ति यह वादा करता है कि वह भविष्य में कोई ऐसा काम नहीं करेगा जिससे शांति भंग हो।
कब लागू होता है सुरक्षा बंधन?
अगर किसी व्यक्ति से भविष्य में दंगे, हिंसा, मारपीट, संपत्ति के नुकसान या किसी और प्रकार की गड़बड़ी होने की संभावना हो, तो मजिस्ट्रेट उसे सुरक्षा बंधन भरने का आदेश दे सकता है।
सुरक्षा बंधन की शर्तें
जब मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को सुरक्षा बंधन भरने का आदेश देता है, तो उसमें कुछ शर्तें हो सकती हैं:
- शांति बनाए रखना: व्यक्ति को यह वादा करना होगा कि वह किसी भी तरह की हिंसा या गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होगा।
- निश्चित समय तक बंधन में रहना: यह बंधन 6 महीने, 1 साल या उससे अधिक समय तक लागू हो सकता है, जो मजिस्ट्रेट द्वारा ही तय किया जाता है।
- धनराशि जमा करना: इस मामले में उस व्यक्ति को एक तय की गई रकम यानि जमानत जमा करनी पड़ सकती है, जिसे गारंटी कहा जाता है।
- समाज में शांति बनाए रखने का वादा: इसके अलावा उस व्यक्ति को एक लिखित वादा देना पड़ सकता है,इसका मतलब है कि उसे एक कागज पर लिखकर देना होगा कि वह सभी नियमों का पालन करेगा और किसी भी तरह की हिंसा या गड़बड़ी नहीं करेगा। अगर वह अपने वादे को तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इस धारा के तहत क्या सजा व दंड मिलता है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 का मकसद किसी भी झगड़े या गड़बड़ी को होने से पहले ही रोकना है। इस धारा के तहत किसी को सीधे जेल या सजा नहीं दी जाती। लेकिन अगर कोई व्यक्ति मजिस्ट्रेट के आदेश को नहीं मानता या जो सुरक्षा बंधन (Security Bond) उसने भरा है, उसे तोड़ता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इसका मतलब है कि अगर वह शांति बनाए रखने का वादा करके भी नियम तोड़ता है, तो उसे जेल भेजा जा सकता है या और सख्त कार्रवाई हो सकती है।
अगर कोई व्यक्ति सेक्शन 126 के तहत मजिस्ट्रेट के आदेश का पालन नहीं करें तो किस तरह की कानूनी कार्यवाही की जाती है?
यदि मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बंधन भरने का आदेश देते है और वह व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
- न्यायिक हिरासत: यदि कोई व्यक्ति सुरक्षा बंधन भरने से मना करता है, तो उसे जेल भेजा जा सकता है।
- न्यायिक कार्रवाई: इसके अलावा मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को अन्य कानूनी धाराओं के तहत दंडित कर सकता है।
- जमानत की जब्ती: यदि किसी व्यक्ति ने पहले कोई सुरक्षा बंधन भरा था और बाद में उसे तोड़ दिया, तो उसकी जमानत राशि जब्त की जा सकती है।
निष्कर्ष: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 समाज में शांति बनाए रखने में बहुत मदद करती है। अगर व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता या नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए, अगर आपके खिलाफ इस धारा के तहत कोई मामला दर्ज हो गया है, तो आपको सही कानूनी सलाह लेना बहुत जरूरी है।
बीएनएसएस धारा 126 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बीएनएसएस की धारा 126 किन परिस्थितियों में लागू होती है?
यह धारा तब लागू होती है जब किसी व्यक्ति के बारे में यह शक होता है कि वह दंगे, झगड़े या शांति भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल हो सकता है। किसी को डराने-धमकाने या हिंसा करने की योजना बना रहा है।
क्या BNSS 126 के तहत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है?
नहीं, इस धारा के तहत किसी व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार नहीं किया जाता। बल्कि मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
यदि कोई व्यक्ति सिक्यूरिटी बांड भरने से इनकार कर दे तो क्या होगा?
अगर कोई व्यक्ति सिक्यूरिटी बांड भरने से इनकार कर देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे जेल भेज सकता है।
BNSS की धारा 126 और CrPC की धारा 107 में क्या अंतर है?
CrPC की धारा 107 को अब नए कानून BNSS में धारा 126 के रूप में शामिल कर लिया गया है। दोनों का उद्देश्य लोक शांति बनाए रखना और संभावित अपराध को रोकना है।