BNSS 105 in Hindi - धारा 105 में तलाशी और जब्ती की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग के नियम


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 तलाशी और जब्ती (Search and Seizure) की पूरी प्रक्रिया के दौरान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बनाती है। बीएनएसएस धारा 105 सुनिश्चित करता है कि पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी पारदर्शी हो, बरामद सामान की सूची सही तरीके से बने और गवाहों के बयान वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए जाएं। इस आर्टिकल में हम विस्तार से समझेंगे कि इस धारा के तहत तलाशी और जब्ती के समय वीडियोग्राफी के नियम और प्रक्रिया? और यह नया नियम आम नागरिक को झूठे केसों से कैसे बचाता है।

अब वो दिन गए जब फिल्मों या हकीकत में पुलिस चुपके से किसी की जेब या घर में सामान "प्लांट" कर देती थी। साल 2026 के डिजिटल युग में, कानून कहता है: "अगर रिकॉर्डिंग नहीं, तो जब्ती सही नहीं।" आइए इस धारा के हर पहलू को गहराई से समझते हैं।


विषयसूची

  1. BNSS धारा 105 के तहत वीडियोग्राफी के नियम और उप-धाराएं
  2. बीएनएसएस धारा 105 का उद्देश्य और इसके क्या फायदे हैं?
  3. BNSS धारा 105 के तहत तलाशी और वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया
  4. धारा 105 से जुड़े हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले
  5. इस धारा के तहत कब पुलिस की कार्रवाई अवैध मानी जाएगी?
  6. 1. रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता (Subsection 1)
  7. 2. मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजना (Subsection 2)
  8. 1. शादाब बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Allahabad High Court, 2025/2026)
  9. 2. राहुल रहमान बनाम एनसीबी (Delhi High Court, 2026)
  10. 3. फिरोज हीरा मानिक बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Supreme Court, 2024)
  11. क्या पुलिस की वीडियोग्राफी न करने पर कार्रवाई हो सकती है?
  12. निष्कर्ष:
  13. बीएनएसएस धारा 105 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BNSS धारा 105 के तहत वीडियोग्राफी के नियम और उप-धाराएं

धारा 105 पुलिस को किसी स्थान की तलाशी लेने या संपत्ति को कब्जे में लेने के दौरान पूरी कार्यवाही को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (जैसे मोबाइल फोन) से रिकॉर्ड करने और उसे बिना देरी के मजिस्ट्रेट को भेजने के नियम निर्धारित करती है।


1. रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता (Subsection 1)

तलाशी की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर सामान की बरामदगी और गवाहों के हस्ताक्षर लेने तक, सब कुछ वीडियो में कैद होना चाहिए। कानून के अनुसार, इसके लिए मोबाइल फोन सबसे आसान विकल्प माना गया है।


2. मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजना (Subsection 2)

पुलिस को यह वीडियो रिकॉर्डिंग और जब्त सामान की सूची (Seizure Memo) बिना किसी देरी के (आमतौर पर 48 घंटों के भीतर) संबंधित जिला मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजनी होती है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नए कानून के नियमो के तहत इसके लिए 48 घंटे का समय तय किया गया है।


बीएनएसएस धारा 105 का उद्देश्य और इसके क्या फायदे हैं?

धारा 105 केवल पुलिस के लिए नियम नहीं है, यह नागरिकों के लिए एक सुरक्षा कवच है:

  • झूठे आरोपों से बचाव: अब पुलिस यह दावा नहीं कर सकती कि आपके घर से कोई नशीला पदार्थ या अवैध हथियार मिला है, अगर उसके पास उसकी बिना कट वाली वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं है।

  • पारदर्शिता: यह पुलिस की जवाबदेही तय करता है। अगर पुलिस नियमों का उल्लंघन करती है, तो वीडियो साक्ष्य के अभाव में जब्ती को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

  • कोर्ट का जल्दी फैसला: वीडियो साक्ष्य होने से गवाहों के मुकरने की संभावना कम हो जाती है, जिससे मुकदमों का फैसला जल्दी आता है।


BNSS धारा 105 के तहत तलाशी और वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया

जब पुलिस किसी अपराध या चोरी की संपत्ति के संदेह में तलाशी लेती है, तो धारा 105 के तहत उसे इन चरणों का पालन करना पड़ता है:

  1. रिकॉर्डिंग की शुरुआत: जैसे ही पुलिस तलाशी वाले स्थान (घर, दुकान, कार आदि) पर पहुँचती है, वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हो जानी चाहिए। इसमें उस स्थान का पूरा दृश्य होना चाहिए।
  2. सामान की बरामदगी: यदि तलाशी के दौरान कोई बैग, अलमारी या अन्य जगह से सामान मिलता है, तो उसे निकालते समय कैमरा चालू होना चाहिए।
  3. सूची तैयार करना (जब्ती मेमो): बरामद वस्तुओं की एक लिस्ट बनाई जाती है, जिसे उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में "फर्द" कहा जाता है। इस लिस्ट को तैयार करते समय वीडियोग्राफी जारी रहती है।
  4. गवाहों के बयान: तलाशी के दौरान मौजूद गवाहों के बयान भी कैमरे के सामने दर्ज किए जाते हैं ताकि बाद में कोई मुकर न सके।
  5. सामान को सील करना: बरामद सामान को वहीं पैकेट में सील किया जाता है और उस सीलिंग की प्रक्रिया को भी रिकॉर्ड किया जाता है।

धारा 105 से जुड़े हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले

अदालतों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पुलिस धारा 105 का पालन नहीं करती, तो पूरी जांच संदिग्ध मानी जाएगी।


1. शादाब बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Allahabad High Court, 2025/2026)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में आरोपी को केवल इसलिए जमानत दे दी क्योंकि पुलिस ने मोटरसाइकिल बरामद करते समय वीडियोग्राफी नहीं की थी। कोर्ट ने कहा:

"धारा 105 के तहत वीडियोग्राफी अनिवार्य है। यदि पुलिस इसका पालन नहीं करती, तो यह पुलिस की मनमानी और लापरवाही को दर्शाता है, जिससे अभियोजन (Prosecution) की कहानी पर शक पैदा होता है।"


2. राहुल रहमान बनाम एनसीबी (Delhi High Court, 2026)

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इसी तरह के एक मामले में कहा कि जब पुलिस के पास संसाधन मौजूद हैं, तो वीडियोग्राफी न करने का कोई बहाना नहीं चलेगा। कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन माना।


3. फिरोज हीरा मानिक बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Supreme Court, 2024)

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग अब केवल 'विकल्प' नहीं है। पारदर्शी जांच के लिए यह एक अनिवार्य हिस्सा है।


इस धारा के तहत कब पुलिस की कार्रवाई अवैध मानी जाएगी?

आइए कुछ उदाहरणों से समझते हैं कि धारा 105 कैसे काम करती है:

  • उदाहरण 1 (सही प्रक्रिया): पुलिस एक घर में छापेमारी करती है। पुलिस अधिकारी मोबाइल पर ई-साक्ष्य ऐप खोलता है। वह अलमारी से नशीला पदार्थ निकलते हुए वीडियो बनाता है, गवाहों के चेहरे दिखाता है और मौके पर ही डिजिटल साइन लेता है। यह मज़बूत सबूत है।

  • उदाहरण 2 (गलत प्रक्रिया): पुलिस कहती है कि उन्होंने आरोपी की कार से हथियार बरामद किया, लेकिन उनके पास कोई वीडियो नहीं है। वे बहाना बनाते हैं कि "मोबाइल की बैटरी खत्म थी।" कोर्ट ऐसी स्थिति में पुलिस की कहानी को झुठला सकता है और आरोपी को जमानत मिल सकती है।


क्या पुलिस की वीडियोग्राफी न करने पर कार्रवाई हो सकती है?

हाँ, हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि जो पुलिस अधिकारी धारा 105 का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय जांच (Disciplinary Proceedings) शुरू की जानी चाहिए। यह नियम केवल आरोपी को बचाने के लिए नहीं, बल्कि पुलिस को और ज़्यादा पेशेवर बनाने के लिए लाया गया है।

निष्कर्ष:

BNSS की धारा 105 डिजिटल इंडिया की दिशा में कानून का एक बड़ा कदम है। यह पुलिस की कार्यशैली को पारदर्शी बनाती है और यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी बेगुनाह को झूठी बरामदगी के आधार पर जेल न भेजा जाए। यदि पुलिस आपके साथ ऐसी किसी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन करती है, तो आप इसे मज़बूती से कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

क्या आपके खिलाफ कोई ऐसी जब्ती दिखाई गई है जिसकी वीडियोग्राफी नहीं हुई? क्या आप जानना चाहते हैं कि डिजिटल सबूतों को कोर्ट में कैसे अमान्य करार दिया जा सकता है? सही कानूनी सलाह पाने के लिए आज ही हमारे एक्सपर्ट वकीलों से बात करें।



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बीएनएसएस धारा 105 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


क्या BNSS 105 केवल गंभीर अपराधों के लिए है?

नहीं, यह धारा हर उस तलाशी और जब्ती पर लागू होती है जो BNSS की धारा 7 या धारा 185 के तहत की जाती है।



क्या मैं पुलिस को तलाशी के दौरान खुद वीडियो बनाने के लिए कह सकता हूँ?

हाँ, यह आपका कानूनी हक है। नए नियमों के अनुसार, पुलिस को खुद ही रिकॉर्डिंग करनी चाहिए, लेकिन आप उन्हें इस नियम की याद दिला सकते हैं।



क्या रिकॉर्ड किया गया वीडियो मुझे मिल सकता है?

केस दर्ज होने और चार्जशीट फाइल होने के बाद, आरोपी को सबूतों की कॉपी (जिसमें वीडियो फुटेज भी शामिल है) मांगने का अधिकार होता है।



क्या वीडियोग्राफी के लिए किसी विशेष कैमरे की ज़रूरत होती है?

नहीं, पुलिस विभाग द्वारा दिए गए स्मार्टफोन या कैमरे का इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते उसमें eSaksh ऑफिसियल ऐप हो जो स्थान और समय को रिकॉर्ड करे।