BNSS 94 in Hindi – दस्तावेज़ या सामान पेश करने के लिए समन जारी करना


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 किसी दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य या अन्य आवश्यक वस्तु को पेश करने के लिए समन या लिखित आदेश जारी करने से संबंधित है। आज के इस लेख में हम आपको एक धारा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी देंगे, कि बीएनएसएस धारा 94 क्या है, यह कब और कैसे लागू होती है? इस धारा के तहत समन मिलने पर क्या करना चाहिए?  यह सेक्शन किन दस्तावेज़ों पर यह लागू नहीं होती, और समन का पालन न करने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 वैसे तो पुराने कानून यानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 91 की तरह ही है। लेकिन बीएनएसएस के नए कानून के रुप में लागू होने के बाद से अब सीआरपीसी की धारा 91 की जगह BNSS की धारा 94 का इस्तेमाल किया जाने लगा है, और इसमें एक खास बदलाव किया गया है कि अब डिजिटल जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे अब मोबाइल, कंप्यूटर, ईमेल और चैट जैसे सबूत भी कानूनी रूप से मांगे जा सकते हैं।


बीएनएसएस की धारा 94 क्या है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), की धारा 94 न्यायालय या पुलिस अधिकारी को यह अधिकार देती है कि वे किसी व्यक्ति को आदेश दे सकें कि वह अपने पास रखे हुए कोई दस्तावेज़, जरूरी चीज़ या इलेक्ट्रॉनिक जानकारी अदालत के सामने पेश करें। यह प्रावधान इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी मामले की सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिल सके और कोई भी जरूरी सबूत छिपाया न जा सके।

इस धारा का मुख्य उद्देश्य यही है कि कोई भी जरूरी सबूत छिपाया न जाए और जांच या अदालत की कार्यवाही ईमानदारी और पूरी जानकारी के साथ हो सके।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 कब लागू होती है?

धारा 94 तब लागू होती है जब कोई जांच या मुकदमा चल रहा हो, और कोर्ट को किसी दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या वस्तु की जरूरत उस जांच या मुकदमे के लिए हो।

बीएनएसएस की धारा 94 को तीन हिस्सों यानी उपधाराओं में बाँटा गया है ताकि इसके अलग-अलग पहलुओं को अच्छे से समझा जा सके। आइये इसकी तीनों उपधाराओं के द्वारा इसके कानूनी प्रावधानों को समझते है:

उपधारा (1): धारा 94(1) में बताया गया है, कि अगर किसी न्यायालय या पुलिस अधिकारी को लगता है कि किसी व्यक्ति के पास केस की जांच, सुनवाई के लिए काम आने वाले किसी आवश्यक दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक जानकारी (जैसे मोबाइल में चैट, ईमेल, वीडियो, आदि) या कोई और जरुरी वस्तु है, तो कोर्ट उस व्यक्ति को समन या लिखित आदेश जारी कर सकता है।

इस आदेश में यह साफ लिखा होगा कि किस तारीख को, कहाँ, और क्या चीज़ लेकर उस व्यक्ति को आना है।

उदाहरण: मान लीजिए किसी कंपनी में धोखाधड़ी हुई है और पुलिस को लगता है कि एक कर्मचारी के पास ऐसा ईमेल है जो सच्चाई सामने ला सकता है। पुलिस अधिकारी उस कर्मचारी को समन भेज सकता है कि वह ईमेल की कॉपी एक निश्चित दिन कोर्ट में लाकर पेश करे।

उपधारा (2): धारा 94(2) कहती है, कि अगर किसी व्यक्ति को कोई आवश्यक दस्तावेज़ या जरूरी चीज़ पेश करने के लिए कोर्ट या पुलिस की तरफ से समन भेजा गया है। लेकिन अगर वो खुद किसी कारण से कोर्ट में नहीं जा पाता, तो वह किसी और के हाथों या डाक से उन जरुरी दस्तावेजों को कोर्ट में भेज सकता है। जिससे यही माना जाएगा कि उसने कोर्ट द्वारा भेजे गए समन का पालन कर लिया है।

उदाहरण: अगर किसी व्यक्ति को बैंक स्टेटमेंट पेश करने के लिए कोर्ट बुलाया गया है, लेकिन वह खुद नहीं जा पा रहा है, तो वह डाक से या किसी जानकार व्यक्ति के हाथ भेज सकता है। इससे यह मान लिया जाएगा कि उसने आदेश का पालन किया है।

उपधारा (3): उपधारा (3) में बताया गया है कि बीएनएसएस की धारा 94 कुछ खास मामलों में लागू नहीं होती। यानी कुछ दस्तावेज़ और चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें इस धारा के तहत नहीं माँगा जा सकता।

उदाहरण: अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी वकील से कहता है कि वह अपने मुवक्किल के साथ हुई बातचीत के ईमेल कोर्ट में लाकर दे, तो वह मना कर सकता है क्योंकि यह गोपनीय जानकारी है।


किन चीज़ों पर बीएनएसएस सेक्शन 94 लागू नहीं होती?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 का मकसद जांच और कानूनी प्रक्रिया में मदद करना है,लेकिन कुछ खास दस्तावेज़ और चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें कानून की सुरक्षा मिली हुई होती है। इसलिए उन पर यह धारा लागू नहीं होती।

1. वकील और उसके मुवक्किल के बीच की बातचीत या दस्तावेज़

अगर कोई वकील अपने मुवक्किल से बातचीत करता है या उसके लिए कोई दस्तावेज़ तैयार करता है, तो उसे गोपनीय माना जाता है। इसलिए ऐसे दस्तावेजों को पुलिस या अदालत बीएनएसएस की धारा 94 के तहत नहीं मांग सकते।

2. कुछ विशेष दस्तावेज़ जिन्हें कानून ने छूट दी है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 130 के अनुसार कुछ दस्तावेज़ ऐसे होते हैं, जिन्हें बिना उसके मालिक की मर्जी के अदालत में नहीं मंगाया जा सकता।

उदाहरण: अगर किसी संस्था के पास ऐसा दस्तावेज़ है जो बहुत गोपनीय है, तो अदालत उसे मजबूर नहीं कर सकती जब तक वह संस्था खुद पेश करने के लिए राज़ी न हो।

3. बैंक रिकॉर्ड और खाता संबंधी जानकारी

बैंक से जुड़ी जानकारी जैसे किसी का बैंक स्टेटमेंट, या लेन-देन की रिपोर्ट, अन्य दस्तावेज़ों की तरह सीधे नहीं मंगाई जा सकती। ऐसी जानकारी को कानून में खास सुरक्षा दी गई है। अगर पुलिस या कोर्ट को किसी केस में बैंक से जुड़ी जानकारी चाहिए,तो वो इसे सीधे BNSS की धारा 94 के तहत नहीं मंगा सकते।

4. डाक विभाग के पास रखे गए पत्र और पार्सल

अगर कोई पत्र, पोस्टकार्ड, पार्सल या कोई और चीज डाक विभाग के पास है, तो उसे भी बीएनएसएस की धारा 94 के तहत नहीं मंगाया जा सकता।

उदाहरण: अगर कोई जांच अधिकारी डाकघर से किसी का भेजा हुआ पत्र मांगना चाहे, तो वह धारा 94 के ज़रिए नहीं मांग सकता।


बीएनएसएस की धारा 94 के अनुसार समन और लिखित आदेश का मतलब क्या है?

समन या लिखित आदेश का मतलब होता है, जिसमें पुलिस या कोर्ट किसी आदमी को कानूनी तौर पर यह कहती है, कि वह अपने पास रखा हुआ कोई ज़रूरी कागज़, मोबाइल में मौजूद जानकारी (जैसे चैट, वीडियो, ईमेल वगैरह) या कोई और चीज़ अदालत में लाकर दिखाए।

इस प्रक्रिया में कोर्ट द्वारा लिखित आदेश जारी किया जाता है, जिसे समन या नोटिस कहते हैं। इसमें साफ-साफ लिखा होता है कि कौन-सी चीज़ पेश करनी है, किस तारीख तक और कहां लाकर देनी है।


किन परिस्थितियों में समन भेजा जा सकता है?

समन उस समय भेजा जा सकता है जब:

कोई जांच, मुकदमा या अन्य कानूनी प्रक्रिया चल रही हो, और किसी खास दस्तावेज़, डिजिटल जानकारी या अन्य वस्तु की जरूरत हो, जो उस प्रक्रिया में मदद कर सकती हो।

इस धारा के तहत कौन सा अधिकारी समन जारी कर सकता है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के अनुसार अदालत या पुलिस अधिकारी जो किसी मामले की जांच कर रहे हो या जिस मामले की जांच का उन्हें अधिकार मिला हो। ये अधिकारी धारा 94 के तहत समन जारी कर सकते हैं, जब उन्हें लगे कि किसी चीज़ की पेशी जरूरी है।

क्या समन मिलने पर खुद आना ज़रूरी है?

बीएनएसएस की धारा 94 की उपधारा (2) में इसके बारे में बताया गया है। आइए इसे बेहद सरल और साफ भाषा में समझते हैं।

अगर किसी व्यक्ति को धारा 94 के तहत पुलिस या अदालत से समन मिलता है, तो इसका मतलब होता है कि उससे कोई दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक जानकारी या कोई अन्य चीज़ पेश करने को कहा गया है। ऐसे में खुद जाना ज़रूरी नहीं है। अगर आप समन में मांगी गई चीज़ को किसी और तरीके से जैसे डाक से भेज कर या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के ज़रिए भिजवाकर अदालत या पुलिस के पास पहुंचा देते हैं, तो ये भी माना जाएगा कि आपने समन का पालन कर लिया है।

उदाहरण मान लीजिए किसी को बैंक धोखाधड़ी के मामले में उसका बैंक स्टेटमेंट देने के लिए समन मिला है। अगर वह व्यक्ति खुद नहीं जा सकता, तो वह उस दस्तावेज़ को डाक, ईमेल या अपने वकील के ज़रिए भिजवा सकता है। जब वह मांगी गई चीज़ सही समय पर पहुंचा देगा,तो कानून उसे मान लेगा कि उसने समन का पालन कर दिया।


बीएनएसएस​ की धारा 94 के तहत समन न मानने पर क्या हो सकता है?

अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, की धारा 94 के तहत मिले समन या आदेश का पालन नहीं करता, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाता है।

इसके अलावा पुलिस या अदालत उस दस्तावेज़ या वस्तु को जबरदस्ती ज़ब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है। यह तब किया जाता है जब ऐसा लगता है कि व्यक्ति जानबूझकर सहयोग नहीं कर रहा है।


धारा 94 के तहत कोर्ट का आदेश ना मानने पर क्या सजा मिल सकती है?

यदि कोई व्यक्ति बिना किसी वैध कारण के समन या आदेश का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) या BNSS के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

भारतीय कानून के तहत अदालत के आदेश का पालन ना करने पर एक महीने की जेल व जुर्माने की सजा दी जा सकती है।

इसके अलावा अगर यह साबित हो जाता है, कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया तो उस पर सख्त सजा भी दी जा सकती है। अगर वह दस्तावेज़ किसी गंभीर अपराध से जुड़ा हो, तो दंड और भी सख्त हो सकता है।

निष्कर्ष: बीएनएसएस की धारा 94 के तहत पुलिस या अदालत ऐसे लोगों को कोर्ट में बुला सकती है, जिनके पास कोई जरूरी जानकारी या सबूत है। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति को समन भेजा जाता है, तो उसका पालन करना जरूरी है, और यदि वह इसका पालन नहीं करता है तो उसे कानूनी परिणामों का सामना भी करना पड़ सकता है।

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बीएनएसएस धारा 94 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


​भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 क्या है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 पुलिस और अदालत को यह अधिकार देती है कि वे किसी व्यक्ति से दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक जानकारी या कोई अन्य चीज़ पेश करने के लिए कह सकते हैं, यदि वह चीज़ किसी जांच या मुकदमे के लिए जरूरी हो।



बीएनएसएस सेक्शन 94 कब लागू होती है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 तब लागू होती है जब पुलिस या अदालत को लगता है कि किसी व्यक्ति के पास कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ या सबूत हो सकते है, जो जांच या मुकदमे के लिए जरूरी हो।



इस धारा के तहत समन कैसे जारी किया जाता है?

समन एक लिखित आदेश होता है, जिसमें पुलिस या अदालत किसी व्यक्ति से दस्तावेज़ या जरुरी जानकारी लाने के लिए कह सकती है। 



धारा 94 के तहत समन कौन जारी कर सकता है?

सेक्शन 94 में बताया गया है, कि समन पुलिस अधिकारी या अदालत का अधिकारी, जैसे जज, समन जारी कर सकते हैं, यदि उन्हें लगता है कि किसी व्यक्ति के पास जरूरी जानकारी या दस्तावेज़ हो सकता है।