बीएनएसएस (BNSS) की धारा 35: पुलिस बिना वारंट कब कर सकती है गिरफ्तारी?


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35 पुलिस अधिकारियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में बिना वारंट और बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार प्रदान करती है। पुलिस कब बिना वारंट के किसी को अरेस्ट कर सकती है, उन नियम और शर्तों को इस धारा में विस्तार से बताया है। इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि बीएनएसएस​ की धारा 35 क्या है, कब और कैसे पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है, इस धारा के तहत पुलिस की शक्ति, अधिकार और गिरफ्तार करने के नियम?

पहले गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 41 और 41A लागू होती थीं। लेकिन सीआरपीसी को अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 से बदल दिया गया है। सीआरपीसी की धारा 41 और धारा 41A के प्रावधानों को अब बीएनएस की धारा 35 में एक साथ जोड़ दिया गया है।

इसका मतलब है कि जहाँ पहले ये दो अलग-अलग धाराएँ थीं, अब बीएनएस में इन सभी प्रावधानों को धारा 35 व इसकी उपधाराओं के तहत बताया गया है। इसलिए इस नए कानूनी बदलावों को जानने व समझने के लिए इस लेख को पूरा पढ़े।


बीएनएसएस की धारा 35 क्या है और यह किस बारे में बताती है?

बीएनएसएस की धारा 35 एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है, जो पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। इसका मतलब यह है कि जब कोई गंभीर अपराध हुआ हो, या अपराध होने की पक्की सूचना, संदेह या सबूत हों, तो पुलिस अदालत से अनुमति लिए बिना भी गिरफ्तारी कर सकती है।


पुलिस कब बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता सेक्शन 35 तब लागू होती है जब अपराध गंभीर हो और तुरंत कार्रवाई की ज़रूरत हो। आइये आसान भाषा में जानते है कि कब पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है:

1. जब कोई गंभीर अपराध पुलिस के सामने हो जाए

अगर कोई व्यक्ति पुलिस के सामने ही हत्या, डकैती, देशद्रोह, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को अंजाम देता है तो पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार कर सकती है।

2. जब किसी व्यक्ति पर गंभीर अपराध का पक्का शक या जानकारी हो

अगर पुलिस को किसी व्यक्ति के खिलाफ पक्के सबूत या शिकायत मिलती है, जिससे इस बात का पता चले कि उसने कोई संज्ञेय अपराध किया है, तो पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।

3. जब किसी अपराधी को भगोड़ा घोषित किया गया हो

अगर अदालत ने किसी व्यक्ति को भगोड़ा घोषित (यानि भागा हुआ अपराधी) कर दिया हो, तो पुलिस उसे बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।

4. जब किसी के पास चोरी की संपत्ति मिले

अगर कोई व्यक्ति चोरी की चीज़ों के साथ पकड़ा जाए, तो पुलिस को शक के आधार पर उसे गिरफ्तार करने का अधिकार है।

5. जब कोई पुलिस के कानूनी काम में बाधा डाले

अगर कोई व्यक्ति पुलिस को गिरफ्तारी या जांच जैसे कानूनी कार्यों को करने से रोकता है, तो उसे भी गिरफ्तारी किया जा सकता है।

6. जब कोई हिरासत से भागने की कोशिश करें

अगर कोई व्यक्ति पुलिस की पकड़ से भागने या बचने की कोशिश करता है, तो पुलिस उसे फिर से पकड़ सकती है, वो भी बिना वारंट के।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 की उपधाराएं

बीएनएसएस की सेक्शन 35 में कुल 7 उपधाराएं हैं। ये सारी उपधाराएं इस बात को बताते हैं कि पुलिस कब और कैसे बिना वारंट के किसी को गिरफ्तार कर सकती है और इसके क्या नियम होते हैं।

उपधारा 1: बिना वारंट गिरफ्तारी के मुख्य नियम

सेक्शन 35(1) में बताया गया है कि कोई पुलिस अधिकारी कब और किन हालातों में बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है।

  • किसी अपराधी के खिलाफ शिकायत या जानकारी होना।
  • किसी व्यक्ति को चोरी की चीज लेकर पकड़ा जाना।
  • पुलिस के काम में रुकावट डालना।
  • किसी को अदालत ने भगोड़ा घोषित किया हो। आदि। पुलिस को इन हालात में तुरंत गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है।

उपधारा 2: इसमें बताया गया है, कि अगर कोई अपराध गैर- संज्ञेय यानि कम गंभीर होता है, तो पुलिस बिना अदालत के वारंट या मजिस्ट्रेट के आदेश के उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। मतलब, ऐसे मामलों में पुलिस को गिरफ्तारी करने के लिए पहले अदालत से अनुमति लेना जरूरी है।

उपधारा 3: सेक्शन 35 (3) में बताया गया है, कि अगर उपधारा 1 के तहत बताए गए अपराधों को छोड़कर गिरफ्तारी करना जरूरी नहीं है, तो पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार करने के बजाय एक नोटिस भेज सकता है। इस नोटिस में व्यक्ति को पुलिस के सामने आने और अपनी बात रखने का आदेश दिया जाता है।

उपधारा 4: इसमें बताया गया है कि अगर पुलिस ने किसी व्यक्ति को नोटिस भेजा है, तो उस व्यक्ति का फ़र्ज़ है कि वह नोटिस में बताई गई तारीख और समय पर पुलिस के सामने जरूर आए। नोटिस का पालन करना बहुत ज़रूरी होता है।

उपधारा 5: धारा 35(5) के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को पुलिस ने नोटिस दिया है और वह उस नोटिस में बताए गए दिन और समय पर पुलिस के सामने हाजिर हो जाता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि जब तक पुलिस के पास गिरफ्तारी का कोई नया और सही कारण नहीं होता, तब तक पुलिस उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती।

यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि जो लोग पुलिस की बात मानते हैं और समय पर पेश होते हैं, उन्हें तुरन्त गिरफ्तार करने से बचाया जा सके।

उपधारा 6 में बताया गया है कि अगर पुलिस ने किसी व्यक्ति को नोटिस दिया है, लेकिन वह व्यक्ति उस नोटिस में बताई गई तारीख और समय पर पुलिस के सामने नहीं आता, यानी नोटिस का पालन नहीं करता, तो पुलिस के पास उसे गिरफ्तार करने का अधिकार होता है।

इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति पुलिस को अपनी सही पहचान बताने से मना करता है, तो भी पुलिस बिना वारंट के उसे गिरफ्तार कर सकती है।

उपधारा 7 में बताया गया है कि बुजुर्ग लोगों (जो 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं) और कमजोर लोगों के लिए खास नियम बनाए गए हैं। अगर ये लोग ऐसे अपराध में फंसे हैं, जिनमें तीन साल से कम की सजा हो सकती है, तो पुलिस उन्हें तुरंत गिरफ्तार नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में पुलिस को पहले अपने वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति लेनी पड़ती है।


गिरफ्तारी के लिए नोटिस कब मिलता है और इसका क्या मतलब है?

जब कोई अपराध बहुत गंभीर नहीं होता और पुलिस को लगता है कि गिरफ्तारी की तुरंत जरूरत नहीं है, तो ऐसे मामलों में पुलिस सीधे गिरफ्तार करने की बजाय पहले एक नोटिस जारी करती है। इसे हम "गिरफ्तारी का नोटिस" कह सकते हैं।

नोटिस का मतलब क्या है?

इसका मतलब है कि पुलिस आरोपी को लिखित रूप में बुलावा भेजती है, जिसमें लिखा होता है कि उसे जांच में शामिल होना है या पुलिस के सामने पेश होना है।

अगर कोई पुलिस के नोटिस का पालन नहीं करता तो क्या होगा?

अगर किसी व्यक्ति ने पुलिस का नोटिस मानने से इनकार कर दिया, तो पुलिस उसके खिलाफ कड़ा कदम उठा सकती है। पुलिस बिना कोर्ट से अनुमति लिए उसे सीधे गिरफ्तार कर सकती है। फिर उस व्यक्ति को थाने ले जाकर उससे सवाल-जवाब करती है और जांच करती है। अगर कोई पुलिस की बात नहीं मानता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो सकती है।


बीएनएसएस सेक्शन 35 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति के क्या अधिकार है?

अगर पुलिस ने आपको धारा 35 के तहत गिरफ्तार किया है, तो आपके कुछ खास अधिकार होते हैं। ये अधिकार आपकी सुरक्षा और न्याय के लिए बहुत जरूरी हैं। आइये इन अधिकारों को सरल भाषा में जानते व समझते है:

  1. गिरफ्तारी का कारण जानें: पुलिस से पूछें कि आपको क्यों गिरफ्तार किया गया है। उन्हें आपको बताना जरूरी है कि आप पर क्या आरोप हैं।
  2. चुप रहने का अधिकार: आपको चुप रहने का अधिकार है। जब तक आपका वकील आपके साथ न हो, तब तक पुलिस आपको किसी सवाल का जवाब देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
  3. वकील से मिलने का अधिकार: आपको अपने वकील से मिलने का पूरा अधिकार है। अगर आपके पास वकील नहीं है, तो आप सरकार से मुफ्त वकील की मांग कर सकते हैं।
  4. अत्याचार से बचाव: पुलिस आपके साथ कोई गलत व्यवहार या अत्याचार नहीं कर सकती। अगर ऐसा होता है, तो इसकी शिकायत अदालत में कर सकते हैं।
  5. जमानत का अधिकार: आप जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं, जब तक कि आपका केस गंभीर न हो और अदालत ने जमानत न रोक रखी हो।
  6. 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने का अधिकार: अगर पुलिस ने आपको गिरफ्तार किया है, तो आपको 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना जरूरी है। इसका मतलब है कि पुलिस आपके साथ ज्यादा समय तक थाने या हिरासत में नहीं रख सकती बिना मजिस्ट्रेट की जानकारी दिए।

वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर व्यक्तियों के लिए सेक्शन 35 में क्या खास नियम है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 में कुछ ऐसे नियम बनाए गए हैं, जो खासतौर पर बुजुर्गों (60 साल से ऊपर) और कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए हैं। इसका उद्देश्य है कि बुजुर्गों और कमजोर लोगों को बिना वजह परेशान या डराया-धमकाया न जाए। उनकी सुरक्षा और सम्मान की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की होती है।
  • छोटे अपराधों में गिरफ्तारी पर रोक: अगर बुजुर्ग या कमजोर व्यक्ति से जुड़ा मामला ऐसा है जिसमें सजा तीन साल से कम की हो सकती है, तो उनके खिलाफ तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
  • पुलिस अधिकारी से अनुमति जरूरी: ऐसे मामलों में पुलिस के छोटे अधिकारी सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकते। उन्हें अपने ऊपर के अधिकारी (पुलिस उप-अधीक्षक या उससे ऊपर) से खास अनुमति लेनी होती है।
  • इज्जत और सम्मान का ध्यान: पुलिस को बुजुर्गों और कमजोर लोगों के साथ सम्मान से पेश आना होता है और उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखना होता है।

निष्कर्ष: बीएनएसएस सेक्शन 35 बिना वारंट के गिरफ्तारी करने के नियमों को बताने के साथ-साथ आपके अधिकारों की भी सुरक्षा करती है। अगर कभी आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को गिरफ्तारी का सामना करना पड़े, तो इस धारा की जानकारी आपके लिए बहुत काम की होती है।

अगर आप इस धारा या किसी भी अन्य कानूनी मामले में सलाह या सहायता लेना चाहते हैं, तो आप घर बैठे ही कुछ ही मिनटों में सीधा हमारे अनुभवी वकीलों से बात कर सकते है। हम आपकी पूरी मदद करेंगे ताकि आपके अधिकार सुरक्षित रहें और आपको सही सलाह मिल सके।



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बीएनएसएस धारा 35 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 क्या है और इसका मतलब क्या है?

BNSS सेक्शन 35 पुलिस को बिना वारंट के किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी करने की अनुमति देती है। इसके अलावा सेक्शन यह भी बताती है कि पुलिस किन हालात में तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है।



धारा 35 के अनुसार संज्ञेय अपराध' क्या होता है?

संज्ञेय अपराध वे गंभीर अपराध होते हैं जिनमें पुलिस बिना वारंट के तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है, जैसे हत्या, बलात्कार, डकैती आदि।



क्या पुलिस छोटे अपराधों के लिए भी बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है?

नहीं। छोटे या काम गंभीर अपराधों में पुलिस को गिरफ्तारी के लिए कोर्ट का आदेश या वारंट लेना पड़ता है। बीएनएस सेक्शन 35 के प्रावधान सिर्फ गंभीर मामलों में लागू होती है।



अगर मैं नोटिस का पालन नहीं करता तो क्या होगा?

अगर आप पुलिस के नोटिस की अनदेखी करते हैं या पुलिस को सहयोग नहीं करते, तो पुलिस आपको बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।