आईपीसी की धारा 144 | IPC Section 144 in Hindi (Dhara 144) - सजा और जमानत

धारा 144 आईपीसी (IPC Section 144 in Hindi) - घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होना।


विवरण

जो भी कोई किसी घातक आयुध, या किसी ऐसी चीज से, जिसे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मॄत्यु कारित होनी संभाव्य है, सज्जित हो कर किसी विधिविरुद्ध जनसमूह का सदस्य होगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दण्ड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
 
लागू अपराध
घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होना।
सजा - दो वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
 
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
 

धारा 144- घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होना

भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ख) में यह निर्धारित किया गया है की सभी नागरिकों को शांति पूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार है। इसका मतलब है कि भारत के नागरिकों को अपनी इच्छा से सार्वजनिक सभा या यहां तक कि जुलूसों को इकट्ठा करने और व्यवस्थित करने की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन इकट्ठा करने का यह अधिकार भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में राज्य द्वारा उचित प्रतिबंध के अधीन है। इसलिए, एक उपयुक्त प्राधिकारी सार्वजनिक बैठक के आयोजन पर रोक लगा सकता है, अगर ऐसे मामले में वे इस विचार के होते हैं कि सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए ऐसा करना आवश्यक है।
 

क्या है भारतीय दंड संहिता की धारा 144?

धारा 144 भारतीय दंड संहिता की धारा 143 का उग्र रूप है। इस खंड में स्पष्ट रूप से बल प्रयोग करने के इरादे से, हथियार या घातक हथियार जैसे पिस्तौल, बंदूकें, भाले, तलवारें से लेकर खंजर, किरपान, और कांटा आदि से सार्वजनिक शांति को भंग करने वाले व्यक्ति के लिए सजा का प्रावधान है।

यह धारा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए सजा का प्रावधान करती है जो किसी गैरकानूनी असेंबली में घातक हथियार से लैस हो। धारा के अनुसार, जो कोई भी गैरकानूनी असेंबली का सदस्य है, जो घातक हथियार से लैस है, या ऐसा कुछ जो अपराध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, और जिससे मौत की संभावना है, ऐसे व्यक्ति को साधारण या कठोर कारावास से दंडित करती है जो दो साल तक या जुर्माना या दोनों के साथ विस्तारित हो सकता है।
 

गैरकानूनी असेंबली किसे कहते हैं?

एक गैर कानूनी असेम्बी में पांच या पांच से अधिक लोगों का होना आवश्यक है। हालाँकि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धर्म पाल सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य जैसे कई मामलों में निरस्त कर दिया है कि; जहां केवल पांच नामांकित व्यक्ति ही एक गैरकानूनी असेंबली में शामिल होने के लिए अभियुक्त किये गए हैं, और उनमें से एक या अधिक के खिलाफ इलज़ाम साबित हो जाता है, परन्तु शेष पदावनत (जो कि पांच व्यक्तियों से कम हैं), जो कि गैर कानूनी असेंबली बनाने के जुर्म में अभियुक्त किये गए हैं, को बरी कर दिया जाता है, ऐसे में अन्य अभियुक्त लोगों को गैरकानूनी असेंबली बनाने के जुर्म में दण्डित नहीं किया जाएगा।
 

धारा 144 के मामलों में वकील की जरुरत क्यों होती है?

भारतीय दंड संहिता में धारा 406, का अपराध एक बहुत ही संगीन अपराध है, जिसमें एक दोषी को कारावास की सजा के साथ - साथ आर्थिक दंड का भी प्रावधान दिया गया है, जिसमें कारावास की सजा की समय सीमा को 2 बर्षों, तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे अपराध से किसी भी आरोपी का बच निकलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है, इसमें आरोपी को निर्दोष साबित कर पाना बहुत ही कठिन हो जाता है। ऐसी विकट परिस्तिथि से निपटने के लिए केवल एक वकील ही ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जो किसी भी आरोपी को बचाने के लिए उचित रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है, और अगर वह वकील अपने क्षेत्र में निपुण वकील है, तो वह आरोपी को उसके आरोप से मुक्त भी करा सकता है। और घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होने जैसे बड़े मामलों में ऐसे किसी वकील को नियुक्त करना चाहिए जो कि ऐसे मामलों में पहले से ही पारंगत हो, और धारा 144 जैसे मामलों को उचित तरीके से सुलझा सकता हो। जिससे आपके केस को जीतने के अवसर और भी बढ़ सकते हैं।


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