IPC 307 in Hindi - हत्या के प्रयास की धारा 307 में सजा, जमानत और बचाव

अपडेट किया गया: 01 May, 2024
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा


LawRato

किसी व्यक्ति की हत्या करना सबसे जघन्य अपराधों (heinous crime) में माना जाता है। आजकल लोग छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़ो के कारण हत्या (murder) जैसा गंभीर अपराध कर देते है। जिस कारण उन्हें अपना पूरा जीवन जेल में सजा के तौर पर बिताना पड़ता है। लेकिन क्या आपको पता है यदि कोई व्यक्ति किसी की हत्या का केवल प्रयास करता है। तो उसे कानून की किस धारा में सजा होती है, सजा होती भी है या नहीं? आज के आर्टिकल में हम आपको एक ऐसी ही धारा के बारे में बताएंगे, जो इस अपराध के बारे में बताती है। चलिए जानते है आईपीसी की धारा 307 क्या है (What is IPC Section 307 in Hindi), ये धारा कब और किस अपराध के करने पर लगती है ? IPC 307 के मामले में सजा और जमानत कैसे मिलती है।

भारतीय दंड़ संहिता की धारा जिस प्रकार दोषी व्यक्ति को सजा देने का कार्य करती है उसी प्रकार पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए उनके अधिकारों के बारें मे भी बताती है। हमारे आज के लेख द्वारा आपको आईपीसी सेक्शन 307 से जुड़े हर पहलू की सरल भाषा में विस्तृत व्याख्या मिलेगी तो इसलिए इस लेख को पूरा पढ़े।

धारा 307 क्या है – IPC Section 307 in Hindi

भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के अधिनियम (Act) अनुसार कोई भी व्यक्ति इस तरह के इरादे या ज्ञान के साथ कोई कार्य करता है, और ऐसी परिस्थितियों में उस कार्य को करता है जिसके करने की वजह से वो किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बन सकता है। तो वो व्यक्ति धारा 307 के तहत हत्या का प्रयास करने का दोषी (Guilty of attempted murder) माना जाता है। आइये इसे साधारण शब्दों में जानने का प्रयास करते है।

यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की हत्या करने के इरादे से उस पर हमला करता है। परन्तु जिस व्यक्ति को मारने के लिए उसने हमला किया है, वो बच जाता है मतलब उस व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती तो ऐसा अपराध करने वाले व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या करने के प्रयास (Attempt to murder) के आरोप में मुकदमा दर्ज (court case) कर कार्यवाही की जाती है।


आईपीसी धारा 307 कब लगती है - मुख्य बिंदु

IPC 307 के प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए भारतीय दंड संहिता में दी गई हत्या करने की कुछ मुख्य शर्तें होती है जिन के द्वारा देखा जाता है कि अपराधी ने इस प्रकार का कोई अपराध किया है या नहीं। ये इस प्रकार हैं:

  • आरोपी व्यक्ति का किसी व्यक्ति को मारने का इरादा होना चाहिए।
  • किसी व्यक्ति के द्वारा किसी मनुष्य की मृत्यु के लिए हत्या का प्रयास किया जाना चाहिए। ऐसी शारीरिक चोट पहुँचाना जिससे किसी की मृत्यु होने की संभावना हो।
  • किसी घातक हथियार से हमला करना

भारतीय दंड संहिता में हत्या और गैर-इरादतन हत्या में अंतर

किसी भी अपराध का पता लगाने से पहले अपराधी की उस अपराध को करने के लिए क्या मंशा थी। इस बात का पता होना बहुत जरुरी है। मंशा से हमारा मतलब यह है कि दोषी व्यक्ति ने अपराध को किस इरादे से किया है या बिना किसी इरादे के किया है आइए विस्तार से जानते है।

  • हत्या (Murder):- यदि कोई व्यक्ति को पहले से ही योजना बनाकर या ठंडे खून (बिना किसी क्रोध के) में साजिश करके मार दिया जाता है तो ऐसा अपराध करना हत्या कहलाता है। जिसमें अपराधी की मंशा का साफ पता चलता है कि उसे सामने वाले व्यक्ति को कैसे भी करके मारना है। हत्या के अपराध में आईपीसी 302 के तहत केस दर्ज होता है।
  • गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) :- यदि कोई व्यक्ति बिना किसी योजना के अचानक हुए झगड़े के कारण सामने वाले व्यक्ति को क्रोध के कारण या किसी उकसावे के कारण मार देता है। तो इससे अपराधी की मंशा (Criminal intent ) का पता चलता है कि उसका किसी व्यक्ति को मारने का पहले से ही कोई इरादा (Intention) नहीं था। इसलिए ऐसी हत्या करना गैर-इरादतन हत्या कहलाती है।


इसलिए अपराधी का इरादा और आगे की कार्रवाई के बाद ही यह तय किया जाता है कि यह हत्या है या गैर इरादतन हत्या। और इसीलिए हत्या का प्रयास करना भी हत्या करने के वास्तविक अपराध जितना गंभीर माना जाता है।

Note:- यदि आप गैर-इरादतन हत्या के बारे में और अधिक जानकारी चाहते है तो आप हमारे गैर-इरादतन हत्या की धारा 308 पर बनाए गए लेख को पढ़ सकते है।


धारा 307 के अपराध का उदाहरण

एक बार रवि नाम का एक व्यक्ति होता है। उसका कुछ दिन पहले अजय के साथ झगड़ा हो गया था। जिस कारण रवि अजय को मारने का प्लान बना रहा था और एक दिन वो ऐसा करने में कामयाब भी हो जाता है। एक शाम जब अजय अपने कार्यालय से घर की और जा रहा था, तब रवि अजय को रास्ते में रोककर उसकी हत्या करने के इरादे से गोली चला देता है। लेकिन समय पर हस्पताल ले जाने पर अजय की जान बच जाती है। उसके बाद अजय के होश में आने के बाद पुलिस पुछताछ करने के बाद रवि के खिलाफ अजय की हत्या करने के प्रयास के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही करती है।

धारा 307 में सजा – IPC 307 Punishment in Hindi

आईपीसी की धारा 307 के अनुसार हत्या के प्रयास का अपराध करने की सजा को तीन हिस्सों में बांटा गया है।

  • हत्या करने का प्रयत्न:- यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को मारने के इरादे से उस पर हमला करता है, लेकिन सामने वाला व्यक्ति सुरक्षित बच जाता है तो हमला करने वाले व्यक्ति को हत्या करने के प्रयत्न के तहत दोषी पाये जाने पर 10 वर्ष तक की कारावास से दंड़ित किया जा सकता है।
  • हत्या के प्रयत्न के दौरान चोट लगने से:- यदि कोई व्यक्ति किसी को मारने की कोशिश करता है और इससे सामने वाले व्यक्ति को चोट लग जाती है तो अपराध की प्रकृति व गंभीरता को देखते हुए IPC Section 307 के तहत 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास (Life imprisonment) तक की सजा हो सकती है।
  • आजीवन कारावास की सजा वाले व्यक्ति द्वारा अपराध करने पर :- अगर हत्या के प्रयास का कार्य कोई ऐसा व्यक्ति करता है जो पहले से ही किसी अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा हो। तो उसे 10 साल की कारावास से लेकर मृत्यु दंड (capital punishment) से भी दंडित किया जा सकता है।

जमानत का प्रावधान – IPC 307 is Bailable or Not?

आई पी सी की धारा 307 के प्रावधान अनुसार हत्या का प्रयास करना जैसे गंभीर मामले में जमानत (bail) का मिलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। क्योंकि इस अपराध की गंभीरता इतनी अधिक है और यह एक संज्ञेय श्रेणी का अपराध (cognizable offence) माना जाता है। इसलिए एक गैर-जमानती अपराध (Non bailable crime) कहलाता है।

ऐसे मामलों में गिरफ्तारी से पहले आरोपी को अग्रिम जमानत (Anticipatory bail) के लिए आवेदन करना पड़ता है। जिसके बाद अदालत जमानत देने के लिए विभिन्न आवश्यक बातों पर विचार करेगी जैसे आरोपी का पुराना रिकार्ड, समाज में उसकी स्थिति, अपराध को करने का मकसद, पुलिस द्वारा दायर की चार्जशीट देखकर आदि।

ऐसे केस में एक आपराधिक वकील (Criminal lawyer) की सहायता लेना महत्वपूर्ण है। जो आपको जमानत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। Section 307 में याचिकाकर्ता (petitioner) अपनी मर्जी से आपसी समझौता करके इस केस को वापिस नहीं ले सकता। IPC 307 के तहत दर्ज मामले सत्र न्यायलय (Sessions Court) द्वारा विचारणीय होते है।


हत्या के प्रयास की धारा 307 में शिकायत कैसे दर्ज करें?

भारतीय दंड संहित की धारा 307 के तहत शिकायत दर्ज (Complaint Register) करने के लिए जिसमें Attempt to murder के Crime के बारे में बताया गया है, आप इन सभी बातों का ध्यान रख कर अपनी शिकायत कर सकते है।

  • पास के पुलिस स्टेशन पर जाएँ: ऐसी कोई भी घटना होने पर सबसे पहले उस घटना के होने वाली जगह पर जाए या पुलिस के सहायता न0 100 (Police helpline no 100) पर शिकायत करें।
  • अपनी सभी जानकारी प्रदान करें: थाने में जाकर थान प्रभारी अधिकारी (SHO) से मिले और अपनी सारी करें और अपनी सारी जानकारी दे, जैसे जैसे आपका नाम, पता और मोबाइल न0.
  • घटना की सारी बात बताए : उसके बद पुरी घटना के बारे में पुलिस अधिकारी को बताए जिसमें Attempt to murder से जुड़ी सभी बातें शामिल है, जैसे कि इस Crime को करने में कौन शामिल था, कब और कहाँ हुआ, और कोई अन्य सभी जरुरी जानकारी।
  • सबूत दे: अगर आपके पास उस घटना से जुड़े कोई भी सबूत हैं, जैसे कि तस्वीरें, वीडियो या गवाह, तो उन्हें उसी समय जल्द से जल्द पुलिस को उपलब्ध कराएं। यह आपकी शिकायत (Complaint) को दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान कर देगा और जांच में मदद करेगा।
  • एफआईआर दर्ज करवाए: पुलिस अधिकारी से अपनी शिकायत के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने के लिए कहें।
  • प्राथमिकी की फोटो कापी जरुर ले: ऊपर बताए गए सभी कार्य करने के बाद पुलिस से FIR की Photocopy जरुर ले। जिसमें आपकी शिकायत से जुड़ी सभी बातें लिखी होती है। यह आपके लिए आगे चलकर बहुत ही काम आएगी।
  • जांच का पालन करें: शिकायत दर्ज कराने के बाद Police के संपर्क में रहें और जांच (Investigation) की कार्यवाही के बारे में पूछताछ करते रहे।

IPC 307 के तहत आरोपी के लिए वकील क्यों जरुरी होता है?

इस प्रकार के गंभीर अपराध में जब किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया जाता है, तो उसे अपने बचाव के लिए या अपने पक्ष को अदालत के सामने रखने के लिए एक वकील (Lawyer) की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए आप सभी के लिए इस प्रकार के मामलों में एक अच्छे वकील की भूमिका व उसके कार्यों के बारे में जानना बहुत ही जरुरी है।

  • कानूनी सलाह देना: वकील आरोपी व्यक्ति को उनके अधिकारों (Rights) और संभावित सुरक्षा के विषय में सही मार्गदर्शन करता है और उन्हें आगे की कार्यवाही के लिए कानूनी सलाह (Legal Advice) भी देता है।
  • मामले का मूल्यांकन करना: वकील दूसरे पक्ष के द्वारा लगाए गए आरोपों (Allegations) व पेश किए गए सबूतों (Evidences) को अच्छे से पढ़ता है और उनका विश्लेषण करता है। यदि दूसरे पक्ष द्वारा कोई गलत आरोप लगाया गया है तो वह उन आरोपों को खारिज (Rejected) करने के लिए भी Court में याचिका दायर (Petition File) करता है।
  • रक्षा रणनीति तैयार करना: कानून (Law) के द्वारा बनाए गए सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए वकील सभी परिस्थितियों के अनुसार ही रक्षा रणनीति (Defence Strategy) बनाकर उसपर आगे की कार्यवाही करता है।
  • मामले की जांच करना: सबूत इकट्ठा करना और गवाहों से पूछताछ करना और आपके Defence के लिए उपयोगी जानकारी एकत्र करने के लिए सभी पहलुओं की जांच करना।
  • जिरह: जिरह (Cross Examination) के दौरान दूसरे पक्ष के गवाहों (Witnesses) द्वारा बताई गई बातों को चुनौती देने और उनकी गवाही (Testimony) में किसी भी गलत बात को उजागर करने के लिए सवाल करना।
  • कानूनी दस्तावेज: वकील ही आरोपी व्यक्ति की तरफ से सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेज (Legal documents) तैयार करता है और उन्हें न्यायालय के सामने प्रस्तुत करता है। जैसे:- अपील करना, आवेदन देना आदि।
  • अपील और परीक्षण के बाद की कार्यवाही: यदि अभियुक्त (Accused) को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो वकील अपील दायर (Appeal filled) करने में सहायता करता है व फैसले को वापस लेने या सजा को कम करने की मांग कर सकता है।

IPC Section 307 में बचाव के लिए सावधानियां

धारा 307 के इस अपराध मे फंसने वाले व्यक्ति का सजा से बच पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को ऐसे Crimes को करने से अपना बचाव जरुर करना चाहिए। कोई भी ऐसा कार्य ना करें जिससे ना सिर्फ आपको साथ ही आपके पूरे परिवार को उम्र भर परेशान रहना पड़े। इसलिए आइये IPC Section 307 से बचाव से जुड़ी कुछ बातों को जानते है।

  • सबसे पहली और सबसे जरुरी बात तो यह है कि किसी भी व्यक्ति से झगड़ा करने से अपना बचाव करें।
  • यदि कोई आप पर हमला करता है तो कानून अपने हाथ में ना ले वहाँ से कैसे भी अपना बचाव करके निकल जाएं, और हमला करने वाले की शिकायत पुलिस में कर दे।
  • किसी को मजाक करने के इरादे से धक्का दे देना या कोई भी ऐसा काम कर देना जिससे सामने वाले व्यक्ति को गंभीर चोट (Serious injury) लग जाए, ऐसा कोई भी कार्य करने से बचे।
  • यदि आपको कोई धारा 307 के झूठे केस (False Case) में फँसा देता है तो किसी वकील से सलाह ले। व खुद को निर्दोष (Innocent) साबित करने वाली सभी बातों को वकील को बताएँ।

इस धारा के तहत अपराध करने के लिए यदि आप ने किसी खतरनाक हथियार (Dangerous Weapon) का इस्तेमाल किया है तो आप पर IPC 307 के तहत कार्यवाही होगी। जैसे- यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य को मारने के इरादे से टॉय पॉप गन से गोली मारता है, तो उस व्यक्ति को IPC Section 307 के तहत दोषी नहीं ठहराया जाएगा क्योंकि हत्या का प्रयास करने के लिए उसके पास कोई जानलेवा हथियार नही था।

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प्रशंसापत्र

1. " मेरे मित्र पर पार्किंग के मुद्दे पर अपने पड़ोसी के साथ लड़ाई में उतरने के बाद हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है। उसका पड़ोसी उसके जीवन के लिए लड़ रहा है और मेरे दोस्त ने उसे बहुत बुरी तरह से पीटा। मैंने एक वकील से सलाह ली जिसने मुझे जमानत के लिए आवेदन करने की सलाह दी। मैंने उनकी सलाह ली और अपने मित्र के लिए जमानत की अर्जी दायर की। मामले पर सावधानी से विचार करने पर , अदालत पड़ोसी की ओर झुकी हुई लगती है। मामला अभी भी चल रहा है , हालांकि , यह दोनों पार्टी की गलती थी क्योंकि पड़ोसी ने पहले मेरे दोस्त पर आरोप लगाया था। हालांकि , न्यायालय सबसे अच्छा न्यायाधीश है और हमें विश्वास है कि सम्मानित न्यायाधीशों से अच्छा निर्णय आएगा।

- श्री राजीव अग्रवाल

2. " मेरी बेटी हत्या के मामले में मुख्य संदिग्ध थी। उस पर गलत आरोप लगाया गया क्योंकि जिस व्यक्ति ने वास्तव में अपराध किया था , उसने बहुत चतुराई से मेरी बेटी को अपराध के दृश्य में उपस्थित होने के लिए कहा था ताकि उसे फ्रेम किया जा सके और खुद गायब हो गया। हालांकि , चूंकि मेरी बेटी को अपराध स्थल पर गिरफ्तार किया गया था , इसलिए उसके खिलाफ मामला बहुत मजबूत था। उनकी गिरफ्तारी पर , मैंने तुरंत अपने आपराधिक वकील के परामर्श से जमानत याचिका दायर की। कोर्ट में 18 महीने की लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया और मेरी बेटी को जमानत दे दी। यह मामला अभी भी लंबित है , हालांकि , हमारे वकील के लिए धन्यवाद , हम उन सबूतों को सामने लाने में सक्षम हैं जो मेरी बेटी की बेगुनाही साबित कर सकते हैं। “

- श्री प्रशांत कश्यप

3. " हमारे घर को लूटते समय एक चोर ने भी मुझे और मेरे पति को मारने का प्रयास किया जब हमने उसे रात में चोरी करते हुए पकड़ा। उस पर डकैती के साथ - साथ हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया और पुलिस के पहुंचने के तुरंत बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वह लगभग 2 साल तक हिरासत में रहे , इससे पहले कि अदालत ने अंततः उन्हें लूट और हत्या के प्रयास के लिए दोषी ठहराया। केवल वकील से सलाह लेने पर हम मामले में शामिल कई तकनीकी को समझ सकते हैं और अदालत में अपने लिए ठोस मामला बना सकते हैं। ”

- श्रीमती मीना त्रिपाठी

4. " मैंने अपने भाई पर हत्या और दुख पहुंचाने की कोशिश की शिकायत दर्ज की थी जिसने हमारे पिता को लगभग मार डाला था जब उन्होंने उसे अपनी संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार कर दिया था। मैंने लॉराटो के एक वकील से सलाह ली , जिसने मुझे मामले के हर चरण के माध्यम से निर्देशित किया और मुझे इस तरह के जघन्य अपराध को करने के लिए उसे उचित सजा दिलाने में मदद की। यह केस करीब 3 साल तक चला जिस दौरान मेरे भाई को कैद कर लिया गया। ”

- मिस कीर्ति सिंह

5. " मेरे पिता मृतकों से वापस मिल गए और उनकी हत्या उनके व्यापारिक साथी द्वारा की गई , जिन्होंने उन्हें जहर दिया था। किसी तरह आरोपी झूठे सबूत हासिल करने में कामयाब रहे और उन्हें जमानत मिल गई। पुलिस भी आरोपी की तरफ जा रही थी। हालांकि , मजिस्ट्रेट मामले की जड़ तक पहुंच गया और सीसीटीवी फुटेज सहित मजबूत सबूतों की मदद से , हम अपना पक्ष साबित करने में कामयाब रहे और आरोपी कारोबारी को सही सलामत जेल पहुंचा दिया। '

- श्री रणदीप सेठी

  • अनुभाग का वर्गीकरण
  • हत्या का प्रयास

Offence : हत्या का प्रयास


Punishment : 10 साल + जुर्माना आजीवन कारावास या 10 साल +


Cognizance : संज्ञेय


Bail : गैर जमानतीय


Triable : सत्र न्यायालय



Offence : यदि इस तरह के कृत्य से किसी भी व्यक्ति को चोट लगती है


Punishment : जुर्माना मौत या 10 साल + जुर्माना


Cognizance : संज्ञेय


Bail : गैर जमानतीय


Triable : सत्र न्यायालय



Offence : आजीवन दोषी की हत्या का प्रयास, अगर चोट का कारण है


Punishment : मौत या 10 साल + जुर्माना


Cognizance : संज्ञेय


Bail : गैर जमानतीय


Triable : सत्र न्यायालय





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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


आईपीसी की धारा 307 क्या है?

भारतीय दंड़ संहिता की धारा 307 भारतीय दंड संहिता की एक ऐसी धारा के बारे में बताती है, जो "हत्या के प्रयास" के अपराध से संबंधित है।



"हत्या का प्रयास" का क्या अर्थ है?

"हत्या का प्रयास" किसी अन्य व्यक्ति को उनकी मृत्यु का कारण बनने के इरादे से जानबूझकर नुकसान या चोट पहुंचाने के कार्य के बारे में बताता है, लेकिन उसकी मृत्यु (Death) करने में सफल नहीं हो पाता है तो उसे हत्या का प्रयास (Attempt to murder) कहा जाता है।



IPC Section 307 के तहत अपराध की क्या सजा है?

आईपीसी की धारा 307 की सजा मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अलग-अलग हो सकती है। यह कारावास से लेकर एक अवधि तक हो सकता है जो दस साल तक बढ़ाई जा सकती है, और कुछ मामलों में आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा भी हो सकती है।



आईपीसी की धारा 307 और धारा 302 में क्या अंतर है?

IPC 307 "हत्या के प्रयास" के अपराध से संबंधित है, जहां आरोपी किसी अन्य व्यक्ति की मौत का कारण बनना चाहता है, लेकिन मौत का कारण बनने में सफल नहीं होता है। दूसरी ओर, आईपीसी की धारा 302 "हत्या" के अपराध से संबंधित है, जहां आरोपी किसी अन्य व्यक्ति की मौत का कारण बनता है या यह जानते हुए भी कि उसके किए गए कार्यों से सामने वाले व्यक्ति की मौत होने की संभावना है।



क्या आत्मरक्षा के मामलों में आईपीसी सेक्शन 307 लागू की जा सकती है?

यदि किसी मामले में आरोपी कोर्ट के सामने यह साबित कर देता है कि उसने आत्मरक्षा (Self Defence) के लिए यह कार्य किया है तो उस पर यह सेक्शन लागू नहीं होगा।



क्या धारा 307 को कंपाउंड या वापस लिया जा सकता है?

IPC Section 307 एक गैर-क्षमनीय अपराध है, जिसका अर्थ है कि इसमें शामिल पक्षों द्वारा इसे सुलझाया या वापस नहीं लिया जा सकता है।