धारा 93 आईपीसी - IPC 93 in Hindi - सजा और जमानत - सद््भावपूर्वक दी गई संसूचना

अपडेट किया गया: 01 Jul, 2026
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा


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विषयसूची

  1. धारा 93 का विवरण

धारा 93 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 93 के अनुसार सद््भावपूर्वक दी गई संसूचना उस अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस व्यक्ति की हो जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई हो ।
दृष्टांत
क, एक शल्यचिकित्सक, एक रोगी को सद््भावपूर्वक यह संसूचित करता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता । इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की मॄत्यु हो जाती है । क ने कोई अपराध नहीं किया है, यद्यपि वह जानता था कि उस संसूचना से उस रोगी की मॄत्यु कारित होना संभाव्य है ।
आईपीसी धारा 93 को बीएनएस धारा 31 में बदल दिया गया है।



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