धारा 257 आईपीसी (IPC Section 257 in Hindi) - सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना



धारा 257 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 257 के अनुसार, जो कोई सरकार के द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचालित किसी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से, या यह जानते हुए या यह विश्वास करने का
1 . 1955 के अधिनियम सं0 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा (1-1-1956 से) आजीवन निर्वासन के स्थान पर प्रतिस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 50
कारण रखते हुए कि वह ऐसे कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित है, कोई उपकरण बनाएगा या बनाने की प्रव्रिEया के किसी भाग को करेगा या ऐसे किसी उपकरण को खरीदेगा, या बेचेगा या व्ययनित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।


Offence : सरकारी स्टांप को जालसाजी करने के उद्देश्य से साधन बनाना, खरीदना या बेचना


Punishment : 7 साल + जुर्माना


Cognizance : संज्ञेय


Bail : गैर जमानतीय


Triable : प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट





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IPC धारा 257 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


आई. पी. सी. की धारा 257 के तहत क्या अपराध है?

आई. पी. सी. धारा 257 अपराध : सरकारी स्टांप को जालसाजी करने के उद्देश्य से साधन बनाना, खरीदना या बेचना


आई. पी. सी. की धारा 257 के मामले की सजा क्या है?

आई. पी. सी. की धारा 257 के मामले में 7 साल + जुर्माना का प्रावधान है।


आई. पी. सी. की धारा 257 संज्ञेय अपराध है या गैर - संज्ञेय अपराध?

आई. पी. सी. की धारा 257 संज्ञेय है।


आई. पी. सी. की धारा 257 के अपराध के लिए अपने मामले को कैसे दर्ज करें?

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आई. पी. सी. की धारा 257 जमानती अपराध है या गैर - जमानती अपराध?

आई. पी. सी. की धारा 257 गैर जमानतीय है।


आई. पी. सी. की धारा 257 के मामले को किस न्यायालय में पेश किया जा सकता है?

आई. पी. सी. की धारा 257 के मामले को कोर्ट प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट में पेश किया जा सकता है।


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