धारा 251 आईपीसी (IPC Section 251 in Hindi) - भारतीय सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है



धारा 251 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 251 के अनुसार, जो कोई किसी ऐसे सिक्के को कब्जे में रखते हुए, जिसके बारे में धारा 247 या 249 में परिभाषित अपराध किया गया हो, और जिसके बारे में उस समय, जब वह सिक्का उसके कब्जे में आया था, वह यह जानता था कि ऐसा अपराध उसके बारे में किया गया है, कपटपूर्वक या इस आशय से कि कपट किया जाए, किसी अन्य व्यक्ति को वह सिक्का परिदत्त करेगा या किसी अन्य व्यक्ति को उसे लेने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।


Offence : भारतीय सिक्के की डिलीवरी ज्ञान के साथ पास है कि यह बदल गया है


Punishment : 10 साल + जुर्माना


Cognizance : संज्ञेय


Bail : गैर जमानतीय


Triable : सत्र न्यायालय





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IPC धारा 251 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


आई. पी. सी. की धारा 251 के तहत क्या अपराध है?

आई. पी. सी. धारा 251 अपराध : भारतीय सिक्के की डिलीवरी ज्ञान के साथ पास है कि यह बदल गया है


आई. पी. सी. की धारा 251 के मामले की सजा क्या है?

आई. पी. सी. की धारा 251 के मामले में 10 साल + जुर्माना का प्रावधान है।


आई. पी. सी. की धारा 251 संज्ञेय अपराध है या गैर - संज्ञेय अपराध?

आई. पी. सी. की धारा 251 संज्ञेय है।


आई. पी. सी. की धारा 251 के अपराध के लिए अपने मामले को कैसे दर्ज करें?

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आई. पी. सी. की धारा 251 जमानती अपराध है या गैर - जमानती अपराध?

आई. पी. सी. की धारा 251 गैर जमानतीय है।


आई. पी. सी. की धारा 251 के मामले को किस न्यायालय में पेश किया जा सकता है?

आई. पी. सी. की धारा 251 के मामले को कोर्ट सत्र न्यायालय में पेश किया जा सकता है।


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