धारा 465 आईपीसी (IPC Section 465 in Hindi) - कूटरचना के लिए दण्ड।



धारा 465 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 465 के अनुसार, जो कोई कूटरचना करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दण्ड, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।


Offence : जालसाजी


Punishment : 2 साल या जुर्माना या दोनों


Cognizance : गैर - संज्ञेय


Bail : जमानतीय


Triable : प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट





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IPC धारा 465 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


आई. पी. सी. की धारा 465 के तहत क्या अपराध है?

आई. पी. सी. धारा 465 अपराध : जालसाजी


आई. पी. सी. की धारा 465 के मामले की सजा क्या है?

आई. पी. सी. की धारा 465 के मामले में 2 साल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।


आई. पी. सी. की धारा 465 संज्ञेय अपराध है या गैर - संज्ञेय अपराध?

आई. पी. सी. की धारा 465 गैर - संज्ञेय है।


आई. पी. सी. की धारा 465 के अपराध के लिए अपने मामले को कैसे दर्ज करें?

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आई. पी. सी. की धारा 465 जमानती अपराध है या गैर - जमानती अपराध?

आई. पी. सी. की धारा 465 जमानतीय है।


आई. पी. सी. की धारा 465 के मामले को किस न्यायालय में पेश किया जा सकता है?

आई. पी. सी. की धारा 465 के मामले को कोर्ट प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट में पेश किया जा सकता है।


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