जीरो एफआईआर क्या है? Zero FIR कैसे दर्ज करे



जब भी कोई अपराध होता है, तो पुलिस को सूचना देना पहला कदम होता है। पुलिस शिकायत की जांच करने के बाद अगर उसे मामला सही लगता है, तो एफआईआर (First Information Report) दर्ज की जाती है। एफआईआर आपराधिक केस की शुरुआत मानी जाती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि घटना किसी दूसरे इलाके में हुई हो और पीड़ित तुरंत वहीं के थाने नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की जा सकती है।

जीरो एफआईआर का मतलब है कि आप किसी भी पुलिस स्टेशन में, चाहे वह घटना के क्षेत्र का थाना हो या नहीं, शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसे शुरुआत में “0” नंबर दिया जाता है और बाद में सही क्षेत्र वाले थाने में भेज दिया जाता है। इसका मकसद है कि तुरंत कार्रवाई हो और सबूत खराब न हों, खासकर महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में।

आज हम इस आर्टिकल में जीरो एफआईआर से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों पर चर्चा करेंगे जैसे कि एफआईआर क्या है, Zero FIR क्या है, जीरो एफआईआर और एफआईआर में अंतर, Zero FIR दर्ज करने की प्रक्रिया, नियम और धाराएं आदि।




एफआईआर क्या है?

दंड प्रक्रिया संहिता 1974 के तहत एफआईआर को परिभाषित नहीं किया गया है, हालांकि सीआरपीसी की धारा 154 पुलिस को संज्ञेय अपराध की पहली सूचना देने के प्रावधान से संबंधित है, जिसे आमतौर पर एफआईआर (F.I.R) या प्रथम सूचना रिपोर्ट (First Information Report) के रूप में जाना जाता है।

एफआईआर संज्ञेय अपराध के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को दी गई प्रथम सूचना होती है जिसके आधार पर अपराध की जांच शुरू की जाती है। FIR दर्ज करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, खासकर संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) जैसे – हत्या, बलात्कार, चोरी, मारपीट आदि में।



जीरो एफआईआर क्या है - What if Zero FIR in Hindi?

  • एफआईआर की तरह जीरो एफआईआर भी संज्ञेय अपराध के मामले में पुलिस को दी गई शिकायत है, लेकिन जीरो एफआईआर किसी भी पुलिस स्टेशन में दी जा सकती है, चाहे उसका अधिकार क्षेत्र अपराध की कुछ भी हो।
  • जीरो एफआईआर प्राप्त होने पर इसे अपराध की जांच के लिए उचित अधिकार क्षेत्र वाले संबंधित पुलिस स्टेशन को भेज दिया जाता है।
  • जीरो एफआईआर प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस स्टेशन का प्रभारी नियमित एफआईआर दर्ज करता है और अपराध की जांच शुरू करता हैं।


जीरो एफआईआर दर्ज करने का उद्देश्य

जीरो एफआईआर का प्रावधान आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 में, न्यायमूर्ति वर्मा समिति की सिफारिश पर पेश किया गया था, जिसका गठन 2012 में निर्भया बलात्कार मामले के बाद विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित अपराधों में शीघ्र सुनवाई और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से किया गया था।



एफआईआर और जीरो एफआईआर के बीच अंतर

एफआईआर और जीरो एफआईआर के बीच निम्नलिखित अंतर है:

  • एफआईआर अपराध संख्या के साथ दर्ज की जाती है। जबकि जीरो एफआईआर अपराध संख्या के बिना दर्ज की जाती है।
  • एफआईआर को संबंधित क्षेत्र अधिकार वाले पुलिस स्टेशन में दर्ज किया जाता है। जबकि जीरो एफआईआर किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है।

एफ.आई.आर. के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



जीरो एफ.आई.आर. कैसे दर्ज की जाती है

सीआरपीसी की धारा 154 के अनुसार एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया:

  • संज्ञेय अपराध की सूचना लिखित या मौखिक दोनो रूप से दी जा सकती है;
  • यदि सूचना मौखिक रूप से दी गई है तो थाना प्रभारी या थाने पर तैनात कोई अन्य कर्मचारी थाना प्रभारी के निर्देश पर उसे लिखेगा; और
  • इसे सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाया जाएगा और उसकी पुष्टि के बाद वह इस पर हस्ताक्षर करेगा।
  • दर्ज की गई सूचना की एक प्रति सूचना देने वाले को निःशुल्क दी जाएगी।

जाने - संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध क्या होते है?



जीरो एफआईआर दर्ज करने से इंकार करे तो क्या करे?

  • यदि किसी पुलिस स्टेशन का प्रभारी अपने अधिकार क्षेत्र के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार करता है, तो व्यक्ति संज्ञेय अपराध और एफआईआर दर्ज न होने के बारे में संबंधित पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से मिलकर या पंजीकृत डाक के माध्यम से लिखित शिकायत दे सकता है।
  • ऐसी सूचना प्राप्त होने पर पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक शिकायत की प्रति संबंधित पुलिस थाने को एफ.आई.आर. दर्ज करने के लिए भेजेंगे।
  • ऐसी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित पुलिस स्टेशन का प्रभारी शिकायतकर्ता से संपर्क करेगा और एफआईआर दर्ज करने की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उसे पुलिस स्टेशन बुलाएगा।


जीरो एफआईआर के समर्थन में कोर्ट निर्णय

  1. आंध्र प्रदेश राज्य बनाम पुनाती रामुलु एवं अन्य: इस मामले में पुलिस स्टेशन द्वारा अपराध अपने  अधिकार क्षेत्र में ना होने के कारण  एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि संज्ञेय अपराध के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करने और इसे उचित अधिकार क्षेत्र वाले सक्षम पुलिस स्टेशन को ट्रान्सफर करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
  2. ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार: इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संज्ञेय अपराध के संबंध में सीआरपीसी की धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
  3. कीर्ति बनाम राज्य: इस मामले में न्यायालय ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर  को दिल्ली के प्रत्येक पुलिस स्टेशन को दिशा-निर्देश जारी करने के लिए आदेश दिया कि वे अपने क्षेत्रीय अधिकार ना होने के बावजूद भी संज्ञेय अपराध के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करें और सक्षम पुलिस स्टेशन को ट्रान्सफर करें।


जीरो एफआईआर दर्ज न करने पर सजा

अगर कोई पुलिस अधिकारी भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आने वाले संज्ञेय अपराधों - जैसे कि बलात्कार (धारा 64), पत्नी के साथ मारपीट (धारा 85), महिला की पर हमला करना (धारा 74), अपहरण करना (धारा 137), या अश्लील इशारे और शब्दों से अपमान (धारा 79) - की शिकायत को दर्ज नही करता है, तो उसे कम से कम छह महीने के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही जुर्माना भी देना होगा।​

निष्कर्ष:

FIR और Zero FIR, दोनों ही कानूनी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा हैं। Zero FIR खासकर उन मामलों में उपयोगी है जहाँ पीड़ित को तत्काल मदद की जरूरत होती है लेकिन घटना उसके लोकल थाने में नहीं हुई होती। 



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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


एफआईआर दर्ज न होने पर क्या करे?

पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज ना करने पर, आप सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज कराने के लिए सक्षम क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



क्या जीरो फ़िर को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रान्सफर किया जा सकता है?

एफआईआर को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रान्सफर नहीं किया जा सकता।



F.I.R दर्ज होने के बाद क्या होता है?

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच करती है और अदालत में चार्जशीट (Charge sheet) या अंतिम रिपोर्ट (Final Report) पेश करती है।



जीरो एफआईआर कौन दर्ज करा सकता है?

जीरो एफआईआर किसी भी व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई जा सकती है, जिसमें पीड़ित स्वयं, उसके रिश्तेदार, मित्र, परिवार का सदस्य या पीड़ित की ओर से घटना के तथ्यों से परिचित कोई अन्य व्यक्ति शामिल है।


क्या हर थाने में Zero FIR दर्ज की जा सकती है?

हाँ, किसी भी पुलिस स्टेशन में Zero FIR दर्ज हो सकती है, चाहे अपराध किसी दूसरे एरिया में क्यों न हुआ हो।