भारत में चिकित्सा (मेडिकल) लापरवाही कानून - सजा, धारा और केस दर्ज प्रक्रिया
अगर गलत इलाज, गलत दवा, ऑपरेशन में गलती या समय पर इलाज न मिलने से मरीज को चोट, गंभीर समस्या या मौत हो जाती है, तो यह चिकित्सा लापरवाही (Medical Negligence) मानी जा सकती है। भारत में ऐसे मामलों में मरीज या उसके परिवार के पास कानूनी अधिकार होते हैं। वे अस्पताल प्रबंधन से शिकायत कर सकते हैं, राज्य मेडिकल काउंसिल में मामला उठा सकते हैं, उपभोक्ता आयोग में मुआवजे की मांग कर सकते हैं या गंभीर मामलों में पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत लापरवाही से मृत्यु होने पर धारा 106 लागू हो सकती है, जिसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
आज हम इस आर्टिकल में विस्तार से जानेंगे कि चिकित्सा लापरवाही क्या होती है, मेडिकल लापरवाही के उदाहरण, प्रकार, गलत इलाज के लिए धारा, सजा, डॉक्टर की गलती के कारण मृत्यु हो जाने पर आपराधिक शिकायत करने की प्रक्रिया आदि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।
अक्सर हमें चिकित्सा लापरवाही की घटनाएं सुनने में आ जाती हैं जैसे कि ऑपरेशन करते समय डॉक्टर या नर्स द्वारा मरीज के शरीर में गलती से कैंची या अन्य उपकरण का रह जाना। यह चिकित्सा कर्मचारियों और डॉक्टरों की लापरवाही का ही नतीजा होता है, जिसके कारण मरीजों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं, और उचित समय पर समस्या का पता न चलने पर मृत्यु का कारण बन जाते है।
विषयसूची
- चिकित्सा लापरवाही क्या है? (What is Medical Negligence)
- चिकित्सा लापरवाही के लिए कानूनी धारा और सज़ा
- डॉक्टर की लापरवाही के कारण मृत्यु हो जाने पर शिकायत (केस) कैसे दर्ज करें
- डॉक्टर की गलती या लापरवाही के उदाहरण
- चिकित्सा लापरवाही (गलत इलाज) के प्रकार (Types Of Medical Negligence)
- चिकित्सा लापरवाही के लिए मुआवजे पाने के लिए उपभोक्ता फोरम में केस कैसे दर्ज करें
- भारतीय चिकित्सा परिषद को चिकित्सा लापरवाही की रिपोर्ट कैसे करें?
- मेडिकल लापरवाही के लिए केस या अपील दायर करने की सीमा या समय अवधि
- प्रशंसापत्र - भारत में चिकित्सा लापरवाही के वास्तविक मामले
- भारत में चिकित्सा लापरवाही के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चिकित्सा लापरवाही क्या है? (What is Medical Negligence)
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग अत्यधिक प्रशिक्षित (Highly Trained) होते हैं, चाहे वे नर्सिंग स्टाफ हों या डॉक्टर, इसलिए उनसे आशा की जाती है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी लगन, सावधानी और सतर्कता के साथ करें। जब वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो इसे चिकित्सकीय लापरवाही या मेडिकल नेगलिजेंस माना जाता है, जिससे मरीजों को न केवल स्वास्थ्य की हानि होती है, बल्कि कुछ मामलों में उनकी मृत्यु भी हो जाती है।
डॉक्टर की गलती या लापरवाही के उदाहरण
चिकित्सा लापरवाही एक व्यापक शब्द है जिसके अंतर्गत न केवल डॉक्टर बल्कि नर्सिंग स्टाफ, पैथोलॉजिकल टेस्टिंग लैब, दवा की दुकानें (मेडिकल स्टोर), तकनीशियन, अस्पताल कर्मचारी आदि भी शामिल हैं। मेडिकल नेग्लिजेंस के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:
- बीमारी का पता ना लगा पाना।
- गलत दवा देना।
- इलाज प्रदान करने में लापरवाही करना।
- मरीज का ऑपरेशन करते समय सावधानी न बरतना।
- चिकित्सा सहायता प्रदान करने में अक्षम होना।
- ऑपरेशन करते समय मरीज के शरीर में कैंची, रुमाल, तौलिया आदि जैसी कोई बाहरी वस्तु छोड़ देना।
- चिकित्सा अधिकारियों द्वारा निर्धारित मानक का पालन किए बिना अस्पताल चलाना।
चिकित्सा लापरवाही (गलत इलाज) के प्रकार (Types Of Medical Negligence)
- ऑपरेशन करते समय एनेस्थीसिया की अनुचित खुराक देना: सर्जरी का पहला चरण मरीज को बेहोश करना होता है ताकि वह ऑपरेशन की दर्दनाक प्रक्रिया से बच सके, लेकिन यह चिकित्सकीय लापरवाही की विडंबना ही है कि मरीज को एनेस्थीसिया की अनुचित खुराक दी जाती है, जिससे ऑपरेशन के दौरान वह होश में आ जाता है, और असहनीय दर्द के कारण कई मामलों में हृदय गति रुकने से उसकी मृत्यु भी हो जाती है।
- सर्जिकल लापरवाही: अक्सर खबरों में सुनने में आजाता है कि महंगी फीस के बावजूद सर्जिकल लापरवाही के कारण मरीजों की जान चली गई, इस तरह की घटनाएं बहुत आम हो चुकी है। जैसे कि मरीज के शरीर में सर्जिकल उपकरण छोड़ देना, सर्जरी के दौरान अत्यधिक खून बह जाना, सुरक्षा मानदंडों का पालन न करना, अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में ऑपरेशन करना, अक्षम चिकित्सा कर्मचारी आदि सख्त कानून होने के बावजूद भी इन पर काबू नही पाया जा रहा है।
- मरीज को गलत दवा देना: कई लोगों को कुछ विशेष प्रकार की दवाओं से एलर्जी होती है। रोगी की मेडिकल हिस्ट्री की जांच किए बिना दवाएं देने से अक्सर वह नई बीमारियों जकड़ मे आ जाते है। जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- लंबे समय तक इलाज में लापरवाही: शायद आपने भी ऐसा अनुभव किया होगा कि नियमित तोर पर डॉक्टरी सलाह और इलाज करवाने के बावजूद भी आपके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होता, बल्कि दिन-प्रतिदिन यह और बिगड़ने लगता है। यह लंबे समय तक इलाज में लापरवाही का परिणाम है जैसे रोग का पता ना लगा पाना, गलत दवा लेना, नई स्वास्थ्य समस्याओं का विकसित होना आदि।
- सर्जरी के दौरान शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचना: यह मेडिकल नेग्लिजेंस का सबसे आम रूप है, आपने लोगों को उसी स्थान पर दर्द की शिकायत करते सुना होगा जहां सर्जरी की गई थी, यह सर्जरी के दोरान अंगों के कटने या फटने की वजह से होता है।
मेड़िकल नेगलिजेंस के कई प्रकार होते है सब का जिक्र कर पाना यहाँ संभव नही है फिर भी अगर आप किसी भी प्रकार के चिकित्सा लापरवाही का सामना कर रहे हैं तो बिना किसी देरी करे सक्षम अधिकारियों से इसकी शिकायत करे, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।
चिकित्सा लापरवाही के लिए कानूनी धारा और सज़ा
चिकित्सा लापरवाही सिविल और आपराधिक दोनों प्रकृति की हो सकती है, सिविल कानून के तहत मुआवजा भी मिल सकता है और आपराधिक कानून के तहत सजा भी सुनिश्चित की जा सकती है। डॉक्टर दवारा गलत इलाज या लापरवाही करने के लिए सजा निम्नलिखित सजा का प्रावधान है:
- आईपीसी की धारा 304ए: भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपनी लापरवाही से किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है तो उसे दो वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
- बीएनएस की धारा 125: यदि कोई व्यक्ति लापरवाही या उतावलेपन से कोई ऐसा कार्य करता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो उसे 3 महीने तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
- बीएनएस की धारा 125 a: यदि कोई व्यक्ति लापरवाही या उतावलेपन से कोई ऐसा कार्य करके किसी को चोट पहुंचाता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो उसे छह महीने तक के कारावास और 500 रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा। गंभीर चोट
- बीएनएस की धारा 125 b: यदि कोई व्यक्ति लापरवाही या उतावलेपन से कोई ऐसा कार्य करके किसी को गंभीर चोट पहुंचाता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो उसे दो वर्ष तक के कारावास और 2000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
1 जुलाई 2024 को नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद चिकित्सा लापरवाही और अन्य अपराध भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय होंगे:
- भारतीय न्याय संहिता की धारा (बीएनएस) 106: यदि किसी की मृत्यु इलाज के दोरान पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी की लापरवाही के कारण होती है तो उसे दो वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
डॉक्टर की लापरवाही के कारण मृत्यु हो जाने पर शिकायत (केस) कैसे दर्ज करें
जब मृत्यु चिकित्सीय लापरवाही के कारण होती है तो आईपीसी की धारा 304ए के तहत दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है। आपराधिक शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- आप घटना के विवरण के साथ निकटतम पुलिस स्टेशन में लिखित या मौखिक शिकायत दे सकते हैं।
- शिकायत प्राप्त होने के बाद एस.एच.ओ./थाना प्रभारी आपकी एफ.आई.आर. दर्ज करेगा।
- एफ.आई.आर. दर्ज हो जाने के बाद जांच अधिकारी मामले की जांच करेंगे।
- मामले की जांच के बाद जांच अधिकारी अदालत में आरोप पत्र या अंतिम रिपोर्ट पेश करेगा।
- चार्जशीट मिलने के बाद अदालत मुकदमे की कार्यवाही शुरू करेगी।
- यदि जांच अधिकारी अदालत में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करता है तो आप इसके खिलाफ विरोध याचिका दायर कर सकते हैं।
- यदि न्यायालय आपकी प्रोटेस्ट पेटिशन विरोध याचिका से संतुष्ट हो जाता है तो वह मामले की पुनः जांच का आदेश दे सकता है।
चिकित्सा लापरवाही के लिए मुआवजे पाने के लिए उपभोक्ता फोरम में केस कैसे दर्ज करें
आप उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(1) के तहत चिकित्सा लापरवाही के लिए मुआवजे का दावा करने के लिए सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं, जिसके निम्नलिखित नियम है:
- बीस लाख रुपये तक का दावा आप जिला उपभोक्ता फोरम में कर सकते हैं।
- बीस लाख से एक करोड़ रुपये तक का दावा राज्य उपभोक्ता फोरम में कर सकते हैं।
- एक करोड़ रुपये से अधिक का दावा राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में किया जा सकता है।
उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज करने की निम्नलिखित प्रक्रिया है:
- वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजें: चिकित्सा लापरवाही के लिए मुआवजे का दावा करने के लिए सबसे पहले आपको को प्रतिवादी/विपक्षी को वकील के द्वारा कानूनी नोटिस भेजना होगा।
- नोटिस के जवाब की प्रतीक्षा करें: कानूनी नोटिस भेजने के बाद उसके जवाब के लिए कम से कम 15 दिनों तक इंतजार करना चाहिए।
- मुआवज़े के लिए मुकदमा दायर करें: यदि प्रतिवादी ने आपके कानूनी नोटिस का जवाब नहीं दिया है तो आप प्रतिवादी द्वारा हुए नुकसान के लिए मुआवजे का दावा करने के लिए उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दायर कर सकते हैं।
- कोर्ट में उपस्थित होने के लिए नोटिस: संज्ञान लेने के बाद अदालत विपक्षी को अपने समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी करेगी।
- न्यायालय द्वारा मामले की सुनवाई: दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत तथ्यों और गवाहों द्वारा दिए गए बयानों की जांच करेगी।
- एकपक्षीय कार्यवाही: जब प्रतिवादी अदालत द्वारा दिए गए नोटिस पर उपस्थित नहीं होता है तो अदालत उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही शुरू कर सकती है।
- न्यायालय द्वारा निर्णय: तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद न्यायालय अपना फैसला सुनाएगा।
भारतीय चिकित्सा परिषद को चिकित्सा लापरवाही की रिपोर्ट कैसे करें?
- सबसे पहले आपको स्वयं या किसी वकील की मदद से लिखित शिकायत तैयार करनी होगी।
- इसके बाद आपको मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में शिकायत दर्ज करानी होगी।
- एक बार आपकी शिकायत दर्ज हो जाने पर भारतीय चिकित्सा परिषद कार्यवाही शुरू करेगी। अपने नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार 6 महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेगी।
- शिकायत के लंबित रहने के दौरान भारतीय चिकित्सा परिषद आरोपी डॉक्टर को चिकित्सा व्यवसाय करने से रोक सकती है।
- यदि चिकित्सा परिषद को लगता है कि आरोपी व्यक्ति चिकित्सा लापरवाही का दोषी है तो उसकी सेवाओं पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
मेडिकल लापरवाही के लिए केस या अपील दायर करने की सीमा या समय अवधि
डॉक्टर या अस्पताल या मेडिकल प्रैक्टिशनर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में एक उपभोक्ता की शिकायत दुर्भाग्यपूर्ण घटना / लापरवाही अधिनियम / सेवा में कमी की तारीख से 2 साल के भीतर दर्ज की जानी चाहिए। हालाँकि, यह 2 साल बाद भी दायर किया जा सकता है यदि शिकायतकर्ता जिला फोरम को संतुष्ट करता है कि उसके पास 2 साल की अवधि के भीतर शिकायत दर्ज न करने के पर्याप्त कारण हैं।
अपील के लिए, जिला फोरम से राज्य आयोग, राज्य आयोग से राष्ट्रीय आयोग और राष्ट्रीय आयोग से सुप्रीम कोर्ट में अपील याचिका वर्तमान फोरम / आयोग से आदेश प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर दायर की जाएगी।
प्रशंसापत्र - भारत में चिकित्सा लापरवाही के वास्तविक मामले
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"मेरी चाची के ऑपरेशन के दौरान, डॉक्टर उसके अंदर कैंची की एक जोड़ी को भूल गए और हम सौभाग्य से इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत के तुरंत बाद ही मिल गए, दूसरे डॉक्टर की बदौलत।" हमने उसके खिलाफ ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है और उसे मुआवजा मिलने की उम्मीद कर रहे हैं ”
-श्री फ़कीर अहमद
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"मेरे दादाजी के मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने लापरवाही से एक समाप्त लेंस को प्रत्यारोपित किया, जिससे उनकी बाईं आंख में अंधापन हो गया। हमने अपने वकील की मदद ली और शुक्र है कि उपभोक्ता फोरम ने मुआवजा दिया। ”
-सुश्री मलिका त्रेहान
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"एक प्रसिद्ध अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मेरी महान दादी का निधन हो गया। डॉक्टर की लापरवाही / लापरवाही के कारण अगले ऑपरेशन के लिए एक बड़ी हड़बड़ी में, उन्होंने चिकित्सा उपकरणों को निष्फल नहीं किया और इसके परिणामस्वरूप, उनके रक्त में एक घातक संक्रमण फैल गया, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश संक्रमण हुआ उसके अंगों और अंततः उसकी मृत्यु में। मेरे परिवार ने एक वकील की मदद ली और अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराया ”
-श्रीमती प्रिया कुमार
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"मेरे चाचा लकवाग्रस्त हो गए और गुर्दे की पथरी को हटाने के लिए सर्जरी कराने के बाद उन्होंने अपनी आवाज़ खो दी। उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उच्च न्यायालय ने घोषित किया कि अस्पताल और डॉक्टर लापरवाही कर रहे हैं और मेरे चाचा ने अपनी आवाज़ खो दी है।" चिकित्सा लापरवाही के कारण। उन्हें प्रति वर्ष 6% ब्याज के साथ 20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई। "
-श्री रघुवीर हांडा
भारत में चिकित्सा लापरवाही के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चिकित्सा लापरवाही के लिए उचित दिशा-निर्देश बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन 17 साल बाद भी सरकार ऐसा करने में विफल रही। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से चिकित्सा लापरवाही के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- उचित देखभाल प्रदान करने में विफलता: अस्पताल, डॉक्टर, मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ अपने मरीजों को उचित देखभाल प्रदान करने के लिए बाध्य हैं, यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो वे चिकित्सा लापरवाही के लिए जिम्मेदार होंगे।
- मरीज़ों की सहमति प्राप्त करते समय जोखिम के बारे में सूचित न करना: सर्जरी, ऑपरेशन आदि जैसी चिकित्सा प्रक्रियाएं कभी भी पूर्ण सफलता का आश्वासन नहीं देती हैं, इनमें हमेशा असफल होने का जोखिम रहता है, इससे जुड़े लोगों का कर्तव्य है कि वे मरीज और उसके रिश्तेदारों की सहमति प्राप्त करते से पहले उन्हें इसके बारे में सूचित करें।
- आवश्यक एवं पर्याप्त सावधानी न बरतना: आपने सर्जरी के बाद होने वाले संक्रमण के बारे में सुना या अनुभव किया होगा, ये ऑपरेशन या सर्जरी के दौरान आवश्यक सावधानी न बरतने का परिणाम होते हैं, जैसे कि सर्जिकल उपकरणों को साफ न करना, एक बार उपयोग के लिए बने उपकरणों का बार-बार उपयोग करना आदि।
- इलाज करने के लिए पर्याप्त योग्यता और कौशल न होना: कभी-कभी एक विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी विशेषज्ञता के अलावा अन्य समस्याओं का इलाज करना शुरू कर देता है या आपने अक्सर कम्पाउंडरों, नर्सों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को शहरी और पिछड़े इलाकों मे अपना क्लीनिक चलाते दवाइयाँ लिखते हैं, गंभीर बीमारियों का इलाज करते देखा ही होगा असल में यह लोग मरीज़ो को धोखा देकर उनकी जान जोखिम में डाल देते है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या चिकित्सा लापरवाही एक संज्ञेय अपराध है?
हां, यदि चिकित्सा लापरवाही के कारण किसी की मृत्यु हो जाती है तो यह भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए के तहत एक संज्ञेय अपराध है।
भारत में चिकित्सा लापरवाही की सज़ा क्या है?
भारत में चिकित्सा लापरवाही के लिए दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है।
गलत इलाज करने पर कोन सी धारा लगती है?
गलत इलाज या मेडिकल लापरवाही होने पर आईपीसी की धारा 304ए, 337 और 338 लग सकती है। 1 जुलाई 2024 के बाद आईपीसी को बीएनएस में बदल दिया गया है जिसके अंतर्गत चिकित्सा व्यवसायी की लापरवाही के कारन किसी की मौत होने पर डॉक्टर या संबधित स्टाफ पर बीएनएस 106 लगती है।
डॉक्टर के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस का केस कहां दर्ज कराएं?
डॉक्टर की गलती या लापरवाही के खिलाफ आप राज्य और राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आप जिला उपभोक्ता फोरम, स्टेट कंज्यूमर कोर्ट या पुलिस में भी शिकायत कर सकते हैं।