झूठे दस्तावेज की बीएनएस धारा 335 में सजा और जमानत | BNS 335 in Hindi


झूठे दस्तावेज़ की बीएनएस धारा BNS Section 335 in Hindi

आजकल, झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जालसाज़ी और धोखाधड़ी करने के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जरुरी दस्तावेज़ों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ करके लोगों को ठगना भी एक आम बात हो गई है। यह अपराध न केवल व्यक्तियों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को नकली दस्तावेज बनाकर किए जाने वाले जालसाज़ी और धोखाधड़ी के अपराधों के बारे में जागरूक होना आवश्यक है। आज के इस आर्टिकल में हम झूठे दस्तावेज बनाने की कानूनी धारा के बारे में जानेंगे कि, बीएनएस सेक्शन 335 क्या है (BNS Section 335 in Hindi)? यह धारा कब लगती है? धारा 335 में जमानत और सज़ा का क्या प्रावधान है?

इस अपराध के लिए पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 464 लागू होती थी, जो जाली दस्तावेजों के उपयोग व उनमें बदलाव से संबंधित मामलों को देखती थी। हालांकि, अब इस धारा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने बदल दिया है, जिसमें झूठे दस्तावेज बनाने के मामलों को धारा 335 के तहत दर्ज किया जाता है। नई धारा में इलेक्ट्रॉनिक जालसाजी को भी शामिल किया गया है, जो आज के समय में बढ़ते हुए डिजिटल अपराधों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम है। आइये इस महत्वपूर्ण जानकारी को विस्तार से आसान भाषा द्वारा समझते है।


बीएनएस धारा 335 क्या है - BNS Section 335 in Hindi

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 335 एक ऐसे अपराध को परिभाषित (Defined) करती है, जिसमें कोई व्यक्ति धोखे से या गलत तरीके से झूठे दस्तावेज़ (False Documents) बनाते हैं या असली दस्तावेज़ों में गड़बड़ करते हैं। यह धारा नकली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाकर किए जाने वाले जालसाजी (Forgery) के अपराध के बारे में भी विस्तार से बताती है।

आसान भाषा में कहे, तो अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को धोखा देने के लिए या अपने फायदे के लिए कोई झूठे दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाता है, जैसे कि नकली हस्ताक्षर करता है, नकली स्टाम्प बनाता है, या किसी दस्तावेज़ में कुछ गलत बातें लिखता है, तो उस पर झूठे/फेक दस्तावेज बनाने की धारा 335 या जालसाजी के अपराध की धारा 336 के तहत कार्यवाही की जा सकती है।


BNS 335 के अपराध को साबित करने वाले मुख्य तत्व

BNS Section 335 के अंतर्गत अपराध को साबित करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना जरुरी है, जो कि इस प्रकार है:-
  • झूठा दस्तावेज तैयार करना – इसमें यह साबित होना चाहिए कि आरोपी (Accused) ने जानबूझकर एक झूठा दस्तावेज तैयार किया है।
  • किसी अन्य व्यक्ति का हस्ताक्षर, मुहर या अंगूठे का निशान – यदि दस्तावेज में किसी अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर, मुहर या अंगूठे के निशान को गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है।
  • धोखे का इरादा आरोपी का इरादा (Intention) धोखे से किसी अन्य व्यक्ति को फायदा या नुकसान पहुंचाने का होना चाहिए।
  • अनुमति के बिना तैयार किया गया दस्तावेज – यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम से बिना उसकी अनुमति (Permission) के डॉक्यूमेंट तैयार करता है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 335 के स्पष्टीकरण

बीएनएस सेक्शन 335, में नकली या झूठे दस्तावेजों के उपयोग की कुछ विशेष स्थितियों को जालसाजी माना गया है, जिसके लिए कुछ स्पष्टीकरण दिए गए है। आइए इन स्पष्टीकरणों को आसान शब्दों में उदाहरणों के साथ समझते हैं:-

स्पष्टीकरण 1: अपने नाम से हस्ताक्षर (Signature) करना, पर गलत इरादे से

कई बार लोग अपने नाम से हस्ताक्षर (Signature) करते हैं, लेकिन उनका इरादा किसी और को धोखा देना होता है। यह भी जालसाजी की श्रेणी में आता है।

उदाहरण: मान लीजिए कि दो व्यक्तियों का नाम 'अमित कुमार' है। एक अमित कुमार, दूसरे अमित कुमार के नाम पर एक चेक बनाता है और उस पर अपने हस्ताक्षर करता है। वह ऐसा इसलिए करता है ताकि बैंक को लगे कि यह चेक दूसरे अमित कुमार ने बनाया है। यहाँ पहले अमित कुमार ने जालसाजी की है, भले ही उसने अपने नाम से हस्ताक्षर किए हों।

स्पष्टीकरण 2: काल्पनिक व्यक्ति के नाम पर फेक डॉक्यूमेंट बनाना

अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर दस्तावेज़ बनाता है जिसका वास्तव (Real) में कोई अस्तित्व (Existence) नहीं (यानि उस नाम का कोई व्यक्ति असल में नहीं) है, तो यह भी जालसाजी है।

उदाहरण: एक व्यक्ति 'राहुल' नाम का एक फर्जी पहचान पत्र (Fake Identity) बनाता है और इस पहचान पत्र का उपयोग बैंक से लोन लेने के लिए करता है।

स्पष्टीकरण 3: इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर

आजकल, दस्तावेज़ों पर साइन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक तरीकों का उपयोग किया जाता है। इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (Electronic Signature) को भी उतना ही मान्य (Valid) माना जाता है जितना कि हाथ से किए गए हस्ताक्षर को। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का दुरुपयोग (Misuse) करता है, तो यह भी जालसाजी की श्रेणी में आता है।

उदाहरण: एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के ईमेल खाते का पासवर्ड जान लेता है और उसके ईमेल खाते से फर्जी दस्तावेज़ (Fake Documents) भेजता है। यहाँ, उस व्यक्ति ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का दुरुपयोग करके जालसाजी की है।


ऐसे कुछ मुख्य कार्य जिनको करने पर धारा 335 के तहत आरोप लगाए जा सकते है

हमारे द्वारा यहाँ कुछ ऐसे कार्य बताए गए है, जिनको अगर कोई व्यक्ति करता है, तो वह BNS धारा 335 के तहत आरोपी बन सकता है:

  1. झूठे हस्ताक्षर करना – किसी अन्य व्यक्ति के नाम से जाली हस्ताक्षर (Forged Signatures) करके कोई दस्तावेज तैयार करना।
  2. फर्जी वसीयत बनाना – किसी मरे हुए व्यक्ति की वसीयत (Will) को गलत तरीके से तैयार करना या उसमें हेरफेर करना।
  3. नकली पहचान पत्र बनाना – आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि को जाली तरीके से बनाना या इस्तेमाल करना।
  4. फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाना – सरकारी प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाण पत्र, संपत्ति के दस्तावेज, या अन्य कानूनी कागजात में हेरफेर (Change) करना।
  5. अन्य व्यक्ति के नाम से झूठा एग्रीमेंट तैयार करना – किसी व्यक्ति के नाम से उसकी सहमति (Consent) के बिना कोई भी दस्तावेज तैयार करना या किसी समझौते में बदलाव करना।
  6. बैंक धोखाधड़ी करना – किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर फर्जी बैंक खाता (Bank Account) खोलना या झूठे दस्तावेजों का उपयोग करना।
  7. फर्जी मार्कशीट या डिग्री तैयार करना – किसी भी स्कूल या कालेज की जाली मार्कशीट, सर्टिफिकेट या डिग्री तैयार करना।
  8. किसी अन्य की जमीन या संपत्ति के फर्जी कागजात बनाना – किसी और की जमीन या मकान को अपने नाम पर दिखाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार करना।
  9. फर्जी विवाह प्रमाणपत्र बनाना – किसी की शादी से संबंधित झूठा प्रमाणपत्र बनाना या उसमें गलत जानकारी जोड़ना।
  10. इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों में हेरफेर करना – डिजिटल तरीकों से किसी दस्तावेज में गलत तरीके से बदलाव करना या झूठे डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग करना।

ये सभी कार्य BNS 335 के तहत अपराध माने जाते हैं और इनको करने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।


बीएनएस सेक्शन 335 लगने का उदाहरण

रमेश और सुरेश दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे। एक दिन रमेश को पैसों की सख्त जरूरत थी, लेकिन वह जानता था कि सुरेश उसे आसानी से पैसे नहीं देगा। इसलिए एक दिन रमेश सुरेश के हस्ताक्षर की नकल करके एक चेक बना लेता है। वह उस चेक में 50,000 रुपये की राशि भरकर बैंक में जमा करवा देता है। जिसके बाद बैंक उस चेक को असली समझकर रमेश के खाते में पैसे जमा कर देता है।

जब सुरेश को इस बात का पता चला, तो वह बहुत ही परेशान हो जाता है। इसके बाद वह रमेश के खिलाफ पुलिस में धारा 335 व धारा 336 के तहत शिकायत दर्ज (Complaint Register) करवा देता है।


भारतीय न्याय संहिता की धारा 335 के दोषियों को क्या सजा मिलती है?

बीएनएस की धारा 335 के तहत झूठे दस्तावेज बनाना" एक दंडनीय अपराध (Punishable Offence) है। इसलिए धारा 335 में झूठे दस्तावेज बनाने के अपराध को केवल परिभाषित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति इन झूठे या नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कोई अपराध करता है, तो उसे जालसाजी (Forgery) कहा जाता है। जिसके लिए बीएनएस की धारा 336 के तहत सजा (Punishment) दी जा सकती है। ऐसे अपराधों में सजा को दो प्रकार से दिया जा सकता है।

सामान्य स्थिति: यदि कोई व्यक्ति झूठे दस्तावेज़ बनाता है, उनमें बदलाव करता है, तो उसे दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित (Punished) किया जा सकता है।

धोखाधड़ी के इरादे से: यदि झूठे दस्तावेज़ बनाने का उद्देश्य किसी व्यक्ति को धोखा देना या उससे कोई गलत फायदा उठाना है, तो सजा सात साल तक की कैद और जुर्माने तक बढ़ सकती है।

इसके अलावा झूठे दस्तावेज बनाकर जालसाजी करने के अपराध में दी जाने वाली अलग-अलग प्रकार की सजा के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप सेक्शन 336 के लेख को इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते है।


बीएनएस​ की धारा 335 में जमानत का क्या प्रावधान है?

बीएनएस की धारा 335 के अनुसार झूठे दस्तावेज बनाना एक संज्ञेय (Cognizable) व गैर जमानती अपराध (Non-Bailable Offence) होता है। जिसके आरोप लगते ही आरोपी व्यक्ति को पुलिस द्वारा तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है। जिसके बाद धारा 335 के गैर-जमानती होने के कारण उस व्यक्ति को जमानत (Bail) मिलना भी बहुत ही मुश्किल हो जाता है।

संबधित धाराएं:

निष्कर्ष:- BNS Section 335 बताती है कि यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम से झूठे दस्तावेज तैयार करता है या उसमें हेरफेर करता है, तो यह एक गंभीर अपराध होगा। यदि आप झूठे दस्तावेज बनाने, जालसाजी या अन्य कानूनी मुद्दों से संबंधित किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आज ही हमारे अनुभवी वकीलों से सलाह लें और अपनी समस्या का तुरन्त समाधान पाएं। कानूनी सहायता अभी के अभी प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और विशेषज्ञों से बात करें।




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बीएनएस धारा 335 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


बीएनएस सेक्शन 335 क्या है?

सेक्शन 335 झूठे दस्तावेज़ बनाकर और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स में जालसाज़ी व धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों के बारे में विस्तार से बताती है।



क्या BNS Section 335 संज्ञेय व गैर-जमानती होती है?

हां, BNS 335 का अपराध संज्ञेय होता है, जिसमें आरोपी व्यक्ति के खिलाफ तुरंत कार्यवाही की जा सकती है। इसके अलावा ये धारा अपराध की गंभीरता के अनुसार जमानती व गैर-जमानती हो सकती है। 



भारतीय न्याय संहिता की धारा 335 के तहत सजा क्या है?

इस धारा के तहत अपराध की गंभीरता के आधार पर 2 साल से लेकर 7 साल तक की कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।



धोखाधड़ी और जालसाज़ी में क्या अंतर है?

जालसाज़ी एक प्रकार की धोखाधड़ी ही होती है, जिसमें दस्तावेज़ों के साथ छेड़छाड़ की जाती है। धोखाधड़ी एक ऐसा शब्द है जिसमें धोखा देने के अन्य तरीके भी शामिल हो सकते हैं।



अगर कोई मेरे दस्तावेज़ों के साथ छेड़छाड़ करता है तो मैं क्या करूँ?

ऐसी स्थिति में तुरंत आपको पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए और कानूनी सलाह लेनी चाहिए।



अगर मैंने गलती से किसी गलत दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिए तो क्या होगा?

अगर आपका इरादा गलत नहीं था, तो आपको कानूनी सलाह लेनी चाहिए। हालाँकि, लापरवाही द्वारा कोई कार्य करना भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।