विषयसूची
- बीएनएस की धारा 308 क्या है कब लगती है - BNS Section 308 in Hindi
- जबरन वसूली की धारा के आवश्यक तत्व क्या हैं?
- जबरन वसूली (Extortion) के अपराध का उदाहरण
- कुछ कार्य जिनको करना आपको इस धारा के तहत अपराधी बना सकता है
- बीएनएस की धारा 308 की सभी उपधाराओं की सजा
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 में जमानत कब व कैसे मिलती है
- बीएनएस धारा 308 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308 जबरन वसूली (Extortion) के अपराध से संबंधित है। इस धारा के तहत, जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे को डरा धमकाकर, नुकसान पहुँचाने की धमकी देकर या बल प्रयोग के ज़रिए उससे धन या संपत्ति हासिल करने की कोशिश करता है, तो यह अपराध माना जाता है। यह धमकी शारीरिक चोट, मानहानि या आर्थिक नुकसान पहुँचाने के डर से दी जाती है। इस अपराध में सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है, और कुछ मामलों में इसे जमानती (Bailable) माना जा सकता है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि बीएनएस की धारा 308 क्या है, यह कब और कैसे लागू होती है, और जबरन वसूली के लिए सजा, जमानत और कानूनी प्रावधान क्या हैं।
किसी की मेहनत की कमाई को डरा-धमका कर छीन लेना बहुत ही गंभीर अपराध है पहले, इस तरह के मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 383 से 389 का इस्तेमाल होता था। लेकिन अब, नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के आने के बाद, इन मामलों में धारा 308 लगाई जाने लगी है।
नई धारा 308, जबरदस्ती वसूली को और गंभीर अपराध मानती है और इसमें सख्त सजा का प्रावधान है। यह लेख आपको इस अपराध के बारे में संपूर्ण जानकारी देगा जिससे आपको जबरन वसूली के अपराधों के पूरी कानूनी कार्यवाही की समझ हो जाएगी।
बीएनएस की धारा 308 क्या है कब लगती है - BNS Section 308 in Hindi
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308 जबरन वसूली (Extortion) से संबंधित है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को डराने-धमकाने की कोशिश करता है ताकि वह उससे संपत्ति या कोई कीमती चीज़ जबरदस्ती हासिल कर सके, तो यह एक अपराध माना जाएगा।
धारा 308 में जबरन वसूली को कई तरह के गंभीर तरीकों के आधार पर इसकी 7 उपधाराओं द्वारा बताया गया है, आइये इन सभी उपधाराओं को आसान भाषा में जानते है:-
- बीएनएस धारा 308 (1):- "जबरन वसूली" एक ऐसा अपराध है जिसमें कोई व्यक्ति जानबूझकर (Intentionally) किसी दूसरे व्यक्ति को डराकर या धमका कर उसे कुछ देने के लिए मजबूर करता है। इस डर के चलते, पीड़ित व्यक्ति अपनी संपत्ति, पैसे, या किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज (Important Documents) को दे देता है।
- बीएनएस धारा 308 (2):- अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली (Extortion) करता है, यानी किसी को डराकर या धमकाकर उसकी संपत्ति, पैसे, या महत्वपूर्ण दस्तावेज लेता है, तो उस व्यक्ति को दोषी पाये जाने पर धारा 308(2) के तहत सजा दी जाती है।
- बीएनएस सेक्शन 308 (3): अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली करने के लिए किसी को डराता (Scares) है या उसे किसी तरह की चोट (Injury) पहुँचाने के डर में डालता है, तो उस पर धारा 308(3) लागू की जाती है। उदाहरण:- अगर कोई व्यक्ति किसी को चोट पहुंचाने की धमकी (Threat) देता है ताकि वह अपनी कीमती चीजें दे दे, तो उसे इस अपराध के तहत सजा मिल सकती है।
- बीएनएस सेक्शन 308 (4):- अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली के लिए किसी को मौत या गंभीर चोट (Death Or Serious Injury) का डर दिखाता है या ऐसा करने का प्रयास करता है, तो उसे सेक्शन 308(4) के तहत सजा मिल सकती है।
- बीएनएस सेक्शन 308 (5):- जब कोई व्यक्ति किसी को मौत या गंभीर चोट का डर दिखाकर जबरन वसूली करता है, तो इसे उस व्यक्ति को इस उपधारा (Sub-Section) के तहत दंडित किया जाएगा।
- बीएनएस सेक्शन 308 (6):- अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली के लिए किसी को डराता है और कहता है कि वह उस पर या किसी और पर गंभीर अपराध करने का आरोप (Blame) लगाएगा, जैसे कि हत्या या आजीवन कारावास की सजा वाले अपराधों के आरोप। ऐसे व्यक्ति पर धारा 308(6) लागू कर कार्यवाही की जाती है।
- बीएनएस सेक्शन 308 (7):- जब कोई व्यक्ति धमकाता है कि वह तुम्हें या किसी और को गंभीर अपराध का आरोपी बना देगा, या किसी को ऐसा अपराध करने के लिए उकसाएगा तो उस पर सेक्शन 308(7) के तहत कार्यवाही की जाती है।
जबरन वसूली की धारा के आवश्यक तत्व क्या हैं?
- डराना: अपराधी जानबूझकर पीड़ित (Victim) को डराता है, जैसे उसे मारने की धमकी देना, या उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना।
- पैसे या चीज़ लेना: अपराधी का मुख्य काम पीड़ित से पैसे या कोई कीमती चीज़ लेना होता है।
- गलत तरीके से दबाव डालना: अपराधी पीड़ित पर गलत तरीके से दबाव डालता है, जैसे उसे बदनाम करने की धमकी देना या उसके बारे में झूठी बातें फैलाने की धमकी देना।
- मजबूरी में देना: इस अपराध के चलते पीड़ित डर के मारे पैसे या कोई संपत्ति देता है।
जबरन वसूली (Extortion) के अपराध का उदाहरण
एक छोटे से शहर में प्रीतम नाम का एक दुकानदार अपनी दुकान चलाता था। उसकी दुकान काफी लोकप्रिय थी और उसमें हर रोज बहुत से ग्राहक आते थे। एक दिन वह रात के समय जब अपनी दुकान को बंद कर रहा था, तो उसके पास अचानक से सुमित नाम का एक बदमाश आ जाता है। सुमित ने प्रीतम को धमकाते हुए कहा, "अगर तुमने मुझे 50,000 रुपये नहीं दिए तो मैं तुम्हारी दुकान में तोड़फोड़ कर दूंगा और तुम्हें जान से मार दूंगा।"
प्रीतम बहुत डर गया और उसने श्याम को 50,000 रुपये दे दिए। यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे सुमित ने प्रीतम को डराकर उससे पैसे लिए। इस मामले में सुमित ने धारा 308 के तहत जबरन वसूली का अपराध किया है क्योंकि उसने प्रीतम को डराकर उससे पैसे लिए हैं।
कुछ कार्य जिनको करना आपको इस धारा के तहत अपराधी बना सकता है
- पैसे या अन्य किसी वस्तु की माँग के लिए किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान (Physically Harm) पहुंचाने या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना।
- जबरन वसूली करने के ले किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने या उसे बदनाम करने की धमकी देना।
- जबरदस्ती पैसों की मांग के साथ किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देना।
- पैसा या कोई वस्तु ना देने पर किसी व्यक्ति को किसी अपराध में फंसाने की धमकी देना।
- किसी व्यक्ति के परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना।
बीएनएस की धारा 308 की सभी उपधाराओं की सजा
भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 308 में जबरन वसूली के अपराध में दंड को इसकी 7 उपधाराओं (Sub-Sections) में विस्तार से अपराध की गंभीरता के आधार पर बाँटा गया है जो कि इस प्रकार है:-
- उपधारा 308 (2) :- इसके अनुसार बताया गया है कि जो भी व्यक्ति जबरन वसूली के अपराध को करने का दोषी (Guilty) पाया जाएगा। उसे न्यायालय द्वारा धारा 308(2) के तहत 7 वर्ष की कारावास व जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
- उपधारा 308 (3):- अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली के लिए किसी को डराने या चोट पहुँचाने का डर दिखाने का दोषी पाया जाएगा। उस पर 2 वर्ष तक की जेल व जुर्माना (Fine) लगाया जा सकता है।
- उपधारा 308 (4) :- जब कोई व्यक्ति जबरन वसूली करने के लिए गंभीर चोट पहुँचाने का डर दिखाने के अपराध का दोषी होगा। उसे उसके किए गए अपराध के लिए 7 वर्ष तक की जेल व जुर्माने की सजा (Punishment) दी जा सकती है।
- उपधारा 308 (5) :- जो भी व्यक्ति जबरन वसूली के लिए मौत का डर बनाकर इस अपराध को करने का दोषी होगा उसे 10 वर्ष की जेल व जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
- उपधारा 308 (6) (7) :- अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को किसी गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देने का या किसी को उकसाने का अपराध करता है। तो उस पर 10 वर्ष की कारावास (Imprisonment) की सजा व जुर्माना लगाकर दंडित (Punished) किया जा सकता है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 में जमानत कब व कैसे मिलती है
बीएनएस सेक्शन 308 के अंतर्गत आने वाला जबरन वसूली का यह अपराध संज्ञेय (Cognizable) होता है। संज्ञेय अपराध में पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जल्द से जल्द कार्यवाही कर सकती है। इस धारा में जमानत (Bail) का फैसला अपराध की गंभीरता के आधार पर ही लिया जा सकता है, यदि आरोपी ने ज्यादा गंभीर अपराध किया है तो जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है। इस धारा के अंतर्गत अपराध की सुनवाई किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है।
जबरन वसूली के अपराध से संबधित अन्य धाराएं:
निष्कर्ष:- BNS Section 308 एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है जो समाज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यह धारा उन लोगों को दंडित करती है जो दूसरों को डरा धमकाकर या बल प्रयोग करके उनसे धन या संपत्ति हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे किसी भी अपराध में कानूनी सलाह प्राप्त करने के लिए आप हमारे वकीलों से घर बैठे बात कर हर उपयोगी सलाह व जानकारी प्राप्त कर सकते है।
बीएनएस धारा 308 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जबरन वसूली (Extortion) के अपराधी पर कौन सी धारा लगती है?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 जबरन वसूली के अपराध से संबंधित है। यह जबरन वसूली को एक आपराधिक कृत्य के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के डर में डालता है। ऐसे व्यक्तियों पर BNS 308 लागू कर कार्यवाही की जाती है।
BNS की धारा 308 में जमानत कैसे मिलती है?
बीएनएस की धारा 308 में न्यायालय द्वारा आरोपी को उसके किए गए अपराध की गंभीरता के आधार पर ही जमानत का फैसला लिया जा सकता है। लेकिन आमतौर पर यह धारा गैर-जमानती होती है।
क्या भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 का अपराध संज्ञेय है?
बीएनएस की धारा 308 के अंतर्गत आने वाला जबरन वसूली का अपराध एक संज्ञेय यानी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। व इसकी उपधाराओं में बताए गए सभी अपराध संज्ञेय यानी गंभीर होते है। जिनमें आरोपी व्यक्ति को पुलिस द्वारा बिना कोर्ट की अनुमति के भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
जबरन वसूली के लिए क्या सजा है?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 में इसकी उपधाराओं के अंदर बताई गई सजा के अनुसार दोषी व्यक्ति को 2 साल से लेकर 10 साल तक की जेल व जुर्माने का दंड लगाया जा सकता है।
क्या जबरन वसूली करने का प्रयास करने के लिए किसी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है?
हां, अगर कोई व्यक्ति जबरन वसूली करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को चोट पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसे दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
BNS 308 में क्या FIR रद्द हो सकती है?
अगर मामला झूठा है या दोनों पक्षों में समझौता हो गया है, तो आप हाई कोर्ट में FIR रद्द करवाने (quash) के लिए याचिका दायर कर सकते हैं।