बीएनएस (BNS) धारा 109 : हत्या के प्रयास की धारा में सजा और जमानत नियम


हत्या के प्रयास की बीएनएस धारा BNS Section 109 in Hindi

BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 109, हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से संबंधित है। अगर कोई व्यक्ति किसी को मारने के इरादे से हमला करता है, लेकिन मौत नहीं होती, तो इसे कानून में हत्या का प्रयास माना जाता है। ऐसे मामलों में धारा 109 लागू होती है। इसमें यह देखा जाता है कि आरोपी का इरादा क्या था और उसका किया गया काम ऐसा था या नहीं, जिससे मौत हो सकती थी।

बीएनएस धारा 109 के तहत दोषी को 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर हमले में सामने वाले को गंभीर चोट लगती है, तो आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। वहीं, अगर यह अपराध कोई ऐसा व्यक्ति करता है जो पहले से उम्रकैद की सजा काट रहा है, तो उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास भी हो सकता है।

इस लेख में हम साफ़ भाषा में समझेंगे कि बीएनएस धारा 109 क्या है कब लगती है, हत्या के प्रयास के मुख्य तत्व क्या हैं, और इस धारा में सजा, जमानत व कानूनी बचाव के क्या नियम हैं।

इस अपराध में कुछ महीनों पहले तक आईपीसी की धारा 307 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाती थी। परन्तु भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के बाद से इसे बीएनएस की धारा 109 से बदल दिया गया है। इसलिए इस अपराध से जुड़े बदलावों व बचाव उपायों से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लेख को पूरा पढ़े।


बीएनएस धारा 109 क्या है - यह कब लगती है - Section 109 of BNS in Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रावधान है जो हत्या के प्रयास (Attempt To Murder) के अपराध से संबंधित है। जब कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की हत्या कर देता है तो उस व्यक्ति पर बीएनएस की धारा 103 के तहत कार्यवाही की जाती है। लेकिन धारा 109 ऐसे मामलों में लागू होती है जहां कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति की जान लेने की कोशिश करता है, लेकिन वह अपने इस कार्य में सफल नहीं होता।

इसका मतलब है कि जब भी कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को जान से मारने के इरादे से किसी भी प्रकार का हमला करता है। परन्तु वह उस व्यक्ति को जान से मारने में सफल नहीं हो पाता तो उस व्यक्ति पर बीएनएस धारा 109 के तहत कार्यवाही की जाती है।

उदाहरण:- रमेश सुरेश को जान से मारने के इरादे से गोली चलाकर हमला करता है, परन्तु गोली सुरेश को नहीं लगती और सुरेश बच जाता है। ऐसे मामले को हत्या का प्रयास कहा जाता है।


भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के अपराध की मुख्य बातें:-

हत्या के प्रयास के अपराध को साबित करने के लिए निम्नलिखित बातों का होना आवश्यक है:-

  • इरादा: अपराधी का इरादा किसी दूसरे व्यक्ति को जान से मारने का होना चाहिए।
  • कार्य: अपराधी ने जान लेने के इरादे से कोई ऐसा कार्य किया हो। जिसके करने से सामने वाले व्यक्ति की जान भी जा सकती थी। जैसे गोली चलाना, चाकू मारना आदि।
  • असफल प्रयास: अपराधी के द्वारा किया गया हमला या प्रयास असफल रहा हो। यानी उस हमले के कारण किसी व्यक्ति की जान नहीं गई हो।

अपराध में शामिल मुख्य कार्य

  • चाकू, बंदूक, या किसी अन्य खतरनाक हथियार के द्वारा किसी पर हमला करना।
  • किसी व्यक्ति को खाने पीने की वस्तु में जहर देकर मारने का प्रयास करना।
  • जानबूझकर किसी व्यक्ति की जान लेने के लिए उसे पानी में डुबाने का प्रयास करना।
  • जान से मारने के लिए किसी का गला घोंटने का प्रयास करना।
  • किसी को ऊंचाई से धक्का देकर या चलती गाड़ी के सामने धक्का देकर मारने का प्रयास करना।
  • किसी को गंभीर रूप से घायल करने का प्रयास करना, जिससे उसकी मृत्यु हो सकती है।
  • जान से मारने की धमकी देकर और उसे अंजाम देने का प्रयास करना।
  • किसी को मारने के लिए दूसरों को उकसाना या प्रेरित करना।
  • किसी को मारने के लिए हथियार या अन्य उपकरण उपलब्ध करवाना।

ये सभी कुछ ऐसे कार्य है जिनको करने पर किसी भी व्यक्ति पर बीएनएस सेक्शन 109 के अपराध के तहत कार्यवाही की जा सकती है। इसके साथ ही इनसे अलग भी बहुत से ऐसे कार्य हो सकते है जो हत्या के प्रयास के अपराध से जुड़े हो सकते है।


आपराधिक उदाहरण

रवि और प्रदीप दोनों बचपन के दोस्त थे। वे दोनों एक ही शहर में रहते थे और एक ही स्कूल में पढ़ते थे। वे अक्सर एक साथ समय बिताते थे और एक दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे। कुछ समय से रवि, प्रदीप की प्रेमिका अंजली से प्यार करने लगा था।

एक दिन प्रदीप को जब इस बात का पता चलता है, तो वह बहुत गुस्सा हो जाता है। जिसके बाद प्रदीप रवि को धमकी देता है कि अगर उसने अंजली से बात करना बंद नहीं किया तो वो उसे जान से मार देगा।

लेकिन रवि फिर भी नहीं माना और अंजली से मिलता रहा। एक दिन प्रदीप रवि को एक सुनसान जगह बुलाता है। जिसके बाद वह उस पर चाकू से हमला कर देता है, लेकिन रवि वहाँ से बचकर भाग जाता है।

इस मामले में प्रदीप ने रवि को जान से मारने की नीयत से हमला किया था। लेकिन वह रवि को मारने में सफल नहीं हुआ। इसलिए प्रदीप पर बीएनएस धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास के अपराध का मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है।


बीएनएस सेक्शन 109 में सज़ा कितनी होती है?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 में हत्या करने के प्रयास के अपराध की सजा को तीन प्रकार से बताया गया है। जो कि इस प्रकार है:-

  1. जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को जान से मारने के इरादे से हमला करता है, और यदि किए गए उस प्रयास से सामने वाले व्यक्ति को कोई चोट नहीं लगती। तो दोषी व्यक्ति को 10 वर्ष तक की कारावास व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
  2. परन्तु अगर उस प्रयास के दौरान पीड़ित व्यक्ति को चोट या गंभीर चोट लग जाती है। तो ऐसे अपराध के दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति आजीवन कारावास तक की सजा व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
  3. यदि कोई व्यक्ति जिसे पहले से ही किसी अपराध के दोषी पाये जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिली हो। ऐसा व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की हत्या का प्रयास करता है और सामने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार से घायल कर देता है। तो ऐसे व्यक्ति को उसकी बाकी बची पूरी जिंदगी के लिए कारावास की सजा या मृत्युदंड से दंडित किया जा सकता है।

बीएनएस की धारा 109 में जमानत कब व कैसे मिलती है

बीएनएस सेक्शन 109 के अनुसार हत्या का प्रयास करना एक बेहद ही गंभीर अपराध माना जाता है। जिसमें आरोपी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के कारण किसी व्यक्ति की जान जाने की भी संभावना हो सकती है। इसलिए इस अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही इसे संज्ञेय व गैर-जमानती रखा गया है।

जिसका मतलब है कि इस अपराध के आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तारी के बाद जमानत नहीं दी जा सकेगी। इसके साथ ही ऐसे अपराध में कोर्ट के बाहर किसी भी प्रकार का समझौता भी नहीं किया जा सकता है।


धारा 109 के आरोपी व्यक्तियों के लिए बचाव उपाय

  • किसी भी अपराध के आरोप लगने पर सबसे पहले कदम हमारा ये होना चाहिए की हमें ऐसे अपराधों से निपटने में अनुभवी किसी वकील से मिलना चाहिए।
  • वकील से मिलकर उसे अपने मामले से जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से बताए।
  • किसी भी बात को अपने वकील से ना छिपाए क्योंकि पता नहीं कौन सी बात आपके बचाव के काम आ सकती है।
  • यदि आप पर इस अपराध के आरोप लगे है तो आप यह दावा कर सकते है कि आपने केवल अपनी आत्मरक्षा में हमला किया था।
  • अगर आपका किसी को मारने का इरादा नहीं था तो यह बात भी आपके बचाव के काम आ सकती है। जिसमें आप सबूतों के द्वारा साबित कर सकते है कि आपने जानबूझकर किसी को घायल नहीं किया है।
  • अपने बचाव के लिए ज्यादा से ज्यादा सबूत व गवाह इकट्ठा करें।
  • यदि आपको झूठे केस में फंसाया जा रहा है, तो ये सबूत ही आपका बचाव कर सकते है।
  • इसके अलावा अगर आप मानसिक रुप से किसी बीमारी से पीड़ित है तो ये बात भी आपके बचाव के रुप में काम आ सकती है।

हत्या के प्रयास से जुडी अन्य धाराएं:

निष्कर्ष :- BNS Section 109 के तहत हत्या का प्रयास करना एक बहुत ही गंभीर अपराध होता है। इसलिए इस अपराध को करने वाले व्यक्तियों को कठोर दंड देने के लिए ये सभी प्रावधान बनाए गए है। जिनका मुख्य उद्देश्य ऐसे गंभीर अपराधों को रोकना व पीड़ित व्यक्तियों को समय पर न्याय दिलाना है।

यदि आप हत्या के प्रयास के अपराध के शिकार हुए हैं या किसी ऐसे मामले को करने के आरोप में शामिल है। जिसके लिए आप किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता प्राप्त करना चाहते है तो आज ही हमारे वकील से संपर्क कर सकते है।


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बीएनएस धारा 109 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 कब लगती है?

बीएनएस की धारा 109 हत्या करने के प्रयास के लिए दंड से संबंधित है। यह धारा तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की हत्या करने का प्रयास करता है, लेकिन ऐसा करने में वो सफल नहीं हो पाता।


भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 जमानती है या गैर-जमानती?

बीएनएस की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास के अपराध को गैर-जमानती माना जाता है। जिसमें गिरफ्तारी के बाद आरोपी व्यक्ति को जमानत नहीं दी जा सकती है।  



बीएनएस की धारा 109 के तहत हत्या का प्रयास कब माना जाता है?

BNS Section 109 के अपराध के लिए इन सभी बातों का होना बहुत जरुरी है:-

  • आरोपी का पीड़ित को मारने का इरादा होना चाहिए।
  • आरोपी ने अपराध करने के लिए कुछ कार्य किया होगा।
  • किए गए कार्य द्वारा किसी की जान जाने के खतरे की पूरी संभावना होनी चाहिए।


BNS 109 के मामले में समझौता किया जा सकता है?

नहीं, सेक्शन 109 के तहत हत्या के प्रयास के अपराध में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है।



हत्या के प्रयास में और हत्या में क्या अंतर है?

हत्या और हत्या के प्रयास में मुख्य अंतर यह है कि हत्या में व्यक्ति की जान चली जाती है, जबकि हत्या के प्रयास में व्यक्ति बच जाता है। हालांकि, दोनों ही अपराध बहुत गंभीर होते है और इनके लिए कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है।



हत्या के प्रयास और मारपीट में क्या फर्क है?

हत्या के प्रयास में आरोपी की नीयत जान लेने की मानी जाती है, जबकि सामान्य मारपीट में ऐसा जरूरी नहीं होता।