बीएनएस की धारा 119 क्या है - सजा और जमानत | BNS 119 in Hindi


बीएनएस धारा BNS Section 119 in Hindi

आजकल, डरा-धमका कर व मारपीट करके लोगों की संपत्ति पर कब्जा करने से जुड़े अपराध बहुत ही तेजी से बढ़ रहे है। लोग अपने फायदों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और दूसरों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं चूकते। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोगों को उनकी संपत्ति के लिए या फिर किसी और कारण से जान से मार दिया गया है। आज के इस लेख में हम चोट पहुंचाकर संपत्ति छीनने व अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करने के अपराध से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता की धारा के बारे में जानेंगे कि, बीएनएस धारा 119 क्या है? (BNS Section 119 in Hindi)? इस सेक्शन में सजा कितनी और जमानत कैसे मिलती है?

किसी व्यक्ति के साथ मारपीट करके उसकी संपत्ति छीनना या उस व्यक्ति को कोई गलत कार्य करने के लिए मजबूर करना एक गंभीर अपराध है। जिसमें पहले भारतीय दंड संहिता की दो अलग-अलग धाराओं 327 व 329 के तहत कार्यवाही की जाती थी। परन्तु बीएनएस के लागू होने के बाद से इस अपराध को भारतीय न्याय संहिता की धारा 119(1) व 119(2) के तहत लागू कर कार्यवाही की जाने लगी है।

इस अपराध के बारे में आप सभी का जागरूक होना बहुत जरूरी है ताकि आप खुद को और अपने प्रियजनों को सुरक्षित रख सकें। साथ ही इस लेख में हम सरल भाषा में बताएंगे कि अगर आप इस अपराध के शिकार हो जाते हैं तो आपको क्या करना चाहिए।


बीएनएस धारा 119 क्या है व यह कब लगती है- BNS Section 119 in Hindi

BNS की धारा 119 एक गंभीर अपराध को परिभाषित करती है, जिसमें चोट पहुंचाकर किसी व्यक्ति की संपत्ति को ऐंठने (यानि अपने कब्जे में करना) या किसी व्यक्ति को अवैध कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता है। इस धारा का उद्देश्य ऐसे अपराधों को नियंत्रित करना है, जहां शारीरिक हिंसा या दबाव (Physical violence or Pressure) का उपयोग करके किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन (Violation) किया जाता है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 के अपराध को 2 उपधाराओं (Sub Sections) के द्वारा अपराध की गंभीरता के आधार पर बताया गया है। आइए इस धारा को विस्तार से समझते हैं:-

BNS की उपधारा (1): संपत्ति छिनने या किसी अवैध कार्य को करने के लिए चोट पहुंचाने का अपराध

बीएनएस धारा 119 की उपधारा (1) के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को चोट (Injury) पहुंचाता है और उसका उद्देश्य उस व्यक्ति से संपत्ति या मूल्यवान वस्तु हासिल करना हो या उसे किसी अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करना हो, तो यह एक गंभीर अपराध माना जाता है।

BNS की उपधारा (2): संपत्ति छिनने या किसी अवैध कार्य को करने के लिए गंभीर चोट पहुंचाने का अपराध

यदि कोई व्यक्ति किसी को जानबूझकर गंभीर चोट (Grievous injury) पहुंचाता है और उसका उद्देश्य संपत्ति छीनना, मूल्यवान वस्तु ऐंठना, या किसी व्यक्ति को अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करना हो, तो यह BNS सेक्शन 119(2) के तहत अपराध माना जाता है।


गंभीर चोट का मतलब क्या होता है?

गंभीर चोट का मतलब ऐसी चोट से होता है, जिसमें किसी व्यक्ति के शरीर पर लंबे समय तक गंभीर असर पड़ता है, जैसे: शरीर के किसी अंग का टूटना या खराब हो होना। गंभीर रूप से घायल होना, जिससे जीवन पर खतरा हो।


भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 के मुख्य तत्व

1. संपत्ति ऐंठने के लिए चोट पहुंचाना

यदि अपराधी जानबूझकर (Intentionally) किसी व्यक्ति को शारीरिक चोट (Physical injury) पहुंचाता है, ताकि वह उसकी संपत्ति, नकद, या मूल्यवान वस्तुएं जबरन प्राप्त कर सके, तो यह अपराध इस धारा के अंतर्गत आएगा।

2. अवैध कार्य के लिए बाध्य करने हेतु चोट पहुंचाना

किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाकर उसे ऐसा कोई कार्य करने के लिए मजबूर करना, जो कानूनन अवैध है, इस धारा के अंतर्गत आएगा। जैसे:- किसी व्यक्ति को पीट-पीटकर जबरन चोरी, हत्या, या धोखाधड़ी जैसे अवैध कार्य करवाना।

3. अपराध में सहायता के लिए मजबूर करना

यदि चोट पहुंचाकर या धमकाकर किसी व्यक्ति को किसी अपराध में सहायता करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह भी इस धारा के अंतर्गत आता है।
उदाहरण: धमकाकर या चोट पहुंचाकर किसी व्यक्ति को किसी अपराधी को शरण देने के लिए मजबूर करना।


बीएनएस सेक्शन 119 के अपराध से संबंधित सरल उदाहरण

कपिल एक किसान था, जो अपनी जमीन पर खेती करके होने वाली कमाई से अपना घर को चलाता था। उसी गांव का एक राहुल नाम का व्यक्ति कपिल की जमीन को हड़पना चाहता था। एक दिन राहुल ने अपने साथियों के साथ कपिल को खेत में घेर लिया और धमकाते हुए कहा,"अगर तूने अपनी जमीन हमें नहीं सौंपी, तो तुझे जान से मार दिया जाएगा। उसी समय कपिल उन्हें अपनी जमीन देने से मना कर देता है, जिसके बाद राहुल और उसके साथी कपिल के साथ बुरी तरह मार-पीट कर देते है। जिससे कपिल को गंभीर चोटें आईं।

कपिल इस घटना से बहुत ही डरा हुआ था, जिसके बाद वह राहुल व उसके साथियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज (Complaint Register) करवा देता है। पुलिस कपिल की शिकायत के आधार पर राहुल व उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 के तहत शिकायत दर्ज कर लेती है, और राहुल और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लेती है।


BNS Section 119 के अपराध में किए जाने वाले कुछ मुख्य कार्य

भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 एक गंभीर अपराध है जिसमें किसी व्यक्ति को जानबूझकर चोट पहुंचाई जाती है ताकि उससे संपत्ति छीनी जा सके या उसे कोई अवैध कार्य करने के लिए मजबूर किया जा सके। इस अपराध में शामिल कुछ अन्य मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:

  • जब अपराधी पीड़ित पर शारीरिक हमला करता है जैसे कि मारना, पीटना, या किसी हथियार से हमला करना।
  • जब कोई व्यक्ति पीड़ित पर मानसिक रुप से किसी कार्य को करने के लिए दबाव डालता है जैसे कि उसे डराकर, धमकाकर, या अपमानित करके।
  • यदि आरोपी पीड़ित का अपहरण (Kidnapping) कर लेता है और फिरौती (Ransom) मांगता है
  • जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति (Property) पर जबरन कब्जा कर लेता है।
  • जब कोई व्यक्ति गवाहों (Witnesses) को डराता है ताकि वे पुलिस या अदालत में उसके खिलाफ गवाही न दें।
  • अपराधी पीड़ित पर झूठे आरोप (False Blames) लगाता है ताकि उसे बदनाम किया जा सके।
  • जब अपराधी अन्य लोगों के साथ मिलकर इस प्रकार के अपराधों को अंजाम देता है।

बीएनएस की धारा 119 के अपराध के दोषी व्यक्तियों को दी जाने वाली सजा

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 119 के तहत उन लोगों को दंडित (Punished) किया जाता है जो किसी व्यक्ति को चोट या गंभीर चोट पहुंचाते हैं, ताकि संपत्ति ऐंठ सकें, अवैध कार्य करवाएं, या किसी अपराध में सहायता प्राप्त कर सकें।

सेक्शन 119 में सजा को भी अलग-अलग प्रकार से इसकी 2 उपधाराओं में बताया गया है जो कि इस प्रकार है:-

  • BNS 119(1) के तहत सजा: यदि अपराधी द्वारा किया गया अपराध कम गंभीर है, लेकिन चोट पहुंचाने के इरादे और अवैध उद्देश्य के कारण किया गया है, तो दोषी को सेक्शन 119(1) के तहत 10 वर्ष तक के कारावास (Imprisonment) की सजा हो सकती है। इसके अलावा दोषी को जुर्माने (Fine) से भी दंडित किया जा सकता है।
  • BNS 119(2) के तहत सजा: यदि किसी व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध बहुत गंभीर है और इसके परिणामस्वरूप पीड़ित को बहुत ज्यादा शारीरिक या मानसिक नुकसान हुआ है, तो दोषी व्यक्ति को सेक्शन 119(2) के तहत 10 साल से लेकर आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही दोषी व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

बीएनएस की धारा 119 में जमानत कब और कैसे मिलती है?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 के तहत किए गए अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) होते है। इसका अर्थ यह है कि पुलिस इस अपराध की जानकारी मिलने पर बिना वारंट के ही आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है। यह अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसलिए इसे गैर-जमानती (Non-Bailable) भी रखा गया है, यानि गिरफ्तारी के बाद आरोपी व्यक्ति को जमानत (Bail) मिलना आसान नहीं होता है।

जमानत देने या ना देने करने का निर्णय न्यायालय के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है। पीड़ित को न्याय और दोषी को दंड देने के लिए इस अपराध की सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate) द्वारा की जाती है।

निष्कर्ष:- BNS Section 119 एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है जो समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में मदद करता है। इस धारा के तहत सजा का प्रावधान काफी कठोर है, इसलिए सभी लोगों को कानून का पालन करना चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी से दूर रहना चाहिए।

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बीएनएस धारा 119 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


BNS की धारा 119 क्या है व यह किस जुर्म में लागू होती है?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 के तहत, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर दूसरे व्यक्ति को चोट पहुंचाता है ताकि उससे संपत्ति छीन सके या उसे किसी अवैध कार्य के लिए मजबूर कर सके, तो यह अपराध माना जाता है। 



भारतीय न्याय संहिता की धारा 119 के तहत कितनी सजा दी जाती है?

बीएनएस सेक्शन 119 व इसकी उपधाराओं के प्रावधान अनुसार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा दी जाती है।  



क्या इस धारा के तहत किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना जरूरी है?

हां, इस धारा के लागू होने के लिए शारीरिक चोट पहुंचाना जरूरी है, और यदि गंभीर चोट पहुंचाई जाती है, तो यह उपधारा (2) के तहत आता है, जिसमें कठोर सजा का प्रावधान है।



क्या धारा 119 का अपराध केवल संपत्ति छीनने तक ही सीमित है?

नहीं, इस धारा के तहत केवल संपत्ति छीनने का उद्देश्य नहीं है, बल्कि इसे अवैध कार्य करने के लिए किसी को मजबूर करने के उद्देश्य से भी चोट पहुंचाई जाती है।