मैं अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों को पैतृक संपत्ति बेचने से कैसे रोक सकता हूं
सवाल
मेरे दादाजी की एक पुरानी पैतृक संपत्ति भावनगर (गुजरात) में है। मेरे पिता का हाल ही में निधन हो गया है, और मेरी दादीजी जीवित हैं। हम इस संपत्ति के कुल 8 सीधे उत्तराधिकारी हैं और मेरा नाम संपत्ति कार्ड में भी दर्ज है। बाकी सभी 7 उत्तराधिकारी इस घर को बेचना चाहते हैं, लेकिन मैं इसे बेचना नहीं चाहता। मैं जानना चाहता हूँ कि मेरी सहमति के बिना क्या वे यह संपत्ति बेच सकते हैं, और मैं इस सौदे को कानूनी रूप से कैसे रोक सकता हूँ?
उत्तर (4)
नहीं, आपकी सहमति के बिना बाकी हिस्सेदार पूरी पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) को तीसरे पक्ष को नहीं बेच सकते। चूँकि आप उस संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) हैं और संपत्ति कार्ड में आपका नाम दर्ज है, इसलिए आपका हिस्सा बेचना कानूनन असंभव है।
आप उस संपत्ति के सह-मालिक (Co-owner) हैं, और किसी भी सह-मालिक को पूरी संयुक्त संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं होता है।
वे आपकी सहमति के बिना क्या कर सकते हैं?
कानूनी रूप से, बाकी 7 सदस्य केवल अपना सामूहिक हिस्सा (7/8th Share) ही बेच सकते हैं। हालाँकि, कोई भी खरीदार (Buyer) उस संपत्ति को खरीदना पसंद नहीं करता जिसमें एक मालिक (आप) अपनी सहमति नहीं दे रहा हो, क्योंकि इससे स्वामित्व (Title) दोषपूर्ण (Defective) हो जाता है।
सौदे को कानूनी रूप से रोकने की प्रक्रिया
इस सौदे को हमेशा के लिए रोकने का एकमात्र सबसे प्रभावी कानूनी तरीका है कि आप तुरंत दीवानी न्यायालय (Civil Court) में जाएं और दो कार्रवाई एक साथ करें:
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बटवारे का मुकदमा (Partition Suit) दायर करना: आपको अपने हिस्से को कानूनी रूप से अलग करने के लिए न्यायालय में 'बंटवारे का मुकदमा' (Partition Suit) दायर करना होगा। इस मुकदमे में आप मांग करेंगे कि न्यायालय संपत्ति को 8 बराबर हिस्सों में बाँटने का आदेश दे।
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अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) प्राप्त करना: विभाजन का वाद दायर करते समय, आपको न्यायालय से एक अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) या स्टे ऑर्डर (Stay Order) जारी करने का अनुरोध करना होगा।
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उद्देश्य: इस आदेश का उद्देश्य न्यायालय को यह बताना है कि बाकी हिस्सेदार मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने से पहले संपत्ति को बेचने का प्रयास कर रहे हैं।
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परिणाम: अगर न्यायालय निषेधाज्ञा जारी कर देता है, तो कोई भी हिस्सेदार न्यायालय के अंतिम आदेश तक संपत्ति को न तो बेच सकता है, न उसका हस्तांतरण (Transfer) कर सकता है और न ही उसमें कोई बदलाव कर सकता है।
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कानूनी सलाह: चूँकि आपके दादाजी की पत्नी (आपकी दादीजी) जीवित हैं, इसलिए 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' (Hindu Succession Act) के तहत उनका भी संपत्ति में एक हिस्सा बनता है। आपको भावनगर के दीवानी न्यायालय में अनुभवी संपत्ति वकील से संपर्क करना चाहिए जो आपके हिस्से को तुरंत सुरक्षित करने के लिए निषेधाज्ञा प्राप्त कर सके।
हां, जैसा कि आप कह रहे हैं कि वे आपकी सहमति के बिना उक्त पैतृक संपत्ति को स्वयं नहीं बेच सकते हैं। इसके अलावा, अब आपका नाम भी संपत्ति कार्ड में है, इसलिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। और अगर वे बेचना भी चाहें तो पहले उन्हें उसका बंटवारा करना होगा और उसके बाद ही वे अपने हिस्से का ही हिस्सा बेच सकते हैं। लेकिन चूंकि यह आवासीय संपत्ति है, इसलिए विभाजन करना संभव नहीं हो सकता। इसलिए, आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, वे इसे आपकी सहमति के बिना नहीं बेच सकते हैं।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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