दादाजी को पैतृक संपत्ति बेचने से कैसे रोकें
सवाल
उत्तर (3)
हाँ, आप और आपके पिता अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके दादाजी को पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) बेचने से कानूनी रूप से रोक सकते हैं। कानून के अनुसार, पैतृक संपत्ति पर परिवार की चार पीढ़ियों का जन्मजात अधिकार होता है। इसका मतलब है कि दादाजी उस जमीन के अकेले मालिक नहीं हैं, बल्कि वह केवल उसके प्रबंधक या कर्ता हैं और वह बिना वैध कानूनी जरूरत (Legal Necessity) के इसे नहीं बेच सकते।
इसे रोकने के लिए सबसे पहला और प्रभावी कदम यह है कि आप सिविल कोर्ट में एक निषेधाज्ञा मुकदमा (Injunction Suit) दायर करें। आप अदालत से स्थगन आदेश (Stay Order) की मांग कर सकते हैं। एक बार जब कोर्ट जमीन की बिक्री पर रोक लगा देता है, तो दादाजी उस संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को कानूनी रूप से नहीं बेच पाएंगे।
इसके साथ ही, आपको अदालत में विभाजन का मुकदमा (Partition Suit) भी दायर करना चाहिए। इस मुकदमे के जरिए आप मांग कर सकते हैं कि पैतृक जमीन में आपके पिता का हिस्सा अलग कर दिया जाए। जब तक मामला कोर्ट में रहेगा, तब तक उस संपत्ति का हस्तांतरण (Transfer) नहीं किया जा सकेगा।
मेरी सलाह है कि आप सबसे पहले तहसील जाकर जमीन की वर्तमान खतौनी (Land Records) निकालें ताकि यह पक्का हो सके कि जमीन दादाजी के नाम पर ही है और वह वास्तव में पैतृक है। यदि दादाजी को वह जमीन उनके पूर्वजों से मिली है, तो आपके पिता का उसमें बराबर का हिस्सा है और उनकी मर्जी के बिना पूरी जमीन बेचना गैर-कानूनी है।
प्रिय ग्राहक, यदि यह संपत्ति आपके दादा जी की स्वयं अर्जित संपत्ति है तो वह अपनी इच्छानुसार किसी को भी संपत्ति हस्तांतरित कर सकते हैं। लेकिन अगर यह संपत्ति आपके दादा के पूर्वजों ने अर्जित की है तो वह इस संपत्ति को बेच नहीं सकते हैं। इसके लिए आप कंप्लेंट कोर्ट में दीवानी मुकदमा दायर कर स्टे ले सकते हैं।
अस्वीकरण: इस पृष्ठ का अनुवाद Google Translate की मदद से किया गया है। इसमें कुछ अंश या संपूर्ण अनुवादित लेख गलत हो सकता है क्योंकि सटीकता के लिए किसी वकील द्वारा इसकी जाँच नहीं की गई है। कोई भी व्यक्ति या संस्था जो इस अनुवादित जानकारी पर निर्भर है, वह ऐसा अपने जोखिम पर करता है। LawRato.com अनुवादित जानकारी की सटीकता, विश्वसनीयता, अस्पष्टता, चूक या समयबद्धता पर निर्भरता के कारण होने वाले किसी भी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अपने स्वयं के कानूनी मामले के लिए किसी भी निर्णय लेने के लिए अपने वकील से जांच और पुष्टि कर सुनिश्चित करें।
अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
प्रॉपर्टी कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- सेवा में, *श्रीमान पुलिस आयुक्त महोदय,* *पुलिस कमिश्नरेट, अयोध्या,* *उत्तर प्रदेश।* *विषय: गरीब मजदूर के साथ वीज़ा के नाम पर ₹70,000/- की ऑनलाइन / ऑफलाइन ठगी - FIR दर्ज करने हेतु प्रार्थना।* *मान्यवर,* सादर प्रणाम। मैं *सत्येन्द्र कुमार पुत्र बाबूलाल, निवासी: ग्राम - कोटवा, पोस्ट - इनायतनगर, जनपद - अयोध्या* का निवासी हूँ। *महोदय, मैं गांव में मजदूरी करता हूँ, रोज कमाता-खाता हूँ।* अपने परिवार की गरीबी दूर करने के लिए मैं विदेश में मजदूरी करने जाना चाहता था। इसी उम्मीद में मेरी मुलाकात *Dream Success Consultant, SCO No. 115, फेज़-7, मोहाली, पंजाब* के लोगों से हुई। उन्होंने कहा 30 दिन में वीज़ा लगवा देंगे। मैंने उन पर भरोसा कर लिया और दिन-रात मजदूरी करके व कर्ज लेकर कुल *₹70,000/-* रुपये बड़ी मुश्किल से जुटाए और उन्हें दे दिए - - ₹27,000/- अनमोल कुमार के खाते में - ₹3,000/- अरुण पाल सिंह के खाते में - ₹40,000/- नकद उन्होंने *10/08/2026 को शपथ-पत्र* भी दिया था कि काम न हुआ तो पैसा वापस कर देंगे। महोदय, 30 दिन की अवधि *09/09/2026* को खत्म हो गई। न तो मेरा वीज़ा लगा
- Mere papa or bade papa dono ne milkar unki maa ke naam pr zameen li thi or wo mere bade papa ne ma se sign Kara ke bech diya or sare paise khud rakh liye or bataye bhi nhi . Hmare papa Chandigarh rehte the unhe 4 saal baad pata laga doosre se . Unhone ghr pe poocha tb pata laga ki zameen bech diye 10 lakh ki or sb paise kha gye . Ab wo kehte hai ki ma ko apni betiyo ki shadi karni thi unhone zameen bechke unki shadi ki . Paise Jake unse mango . Pr wo jhooth bol rhe hai or . Or ab unki ma b bhi khatam ho gyi hai . To kya koi tarika hai jisse mai apne hisse ke paise pa sakoo
- हमने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से एक सीसी लिमिट बनवा दी 50 लाख की जिसमें प्रॉपर्टी मॉर्टगेज की है, किंतु बिजनेस बंद होने के कारण अब नहीं भर पा रहे हैं ना उसका ब्याज भर पा रहे हैं बैंक वाली ऑपरेशन कर रही है तो क्या करें
- मैने लगभग 30 वर्ष पहले अपने निःसंतान भाई से जमीन रजिस्ट्री कराए थे लेकिन धोखाधड़ी से गांव के ही एक व्यक्ति ने फर्जी वसीयत बनाकर अपने नाम से खारिज दाखिल कराकर खतौनी मे अपना नाम दर्ज करा लिया है अब मौके पर वह जमीन जोत बो रहा है अब मै क्या करु