शादी का वादा करके मुकरने वाले प्रेमी के खिलाफ पुलिस केस कैसे करें


सवाल

मैं पिछले चार साल से एक लड़के के साथ प्रेम संबंध में हूं और उसने मुझसे शादी करने का पक्का वादा किया था। अब वह अपने माता-पिता के दबाव में आकर किसी दूसरी लड़की से शादी करने जा रहा है और मुझे धोखा दे रहा है। मेरे पास हमारे रिश्ते का कोई ठोस लिखित सबूत नहीं है लेकिन मैं उसकी शादी रुकवाना चाहती हूं क्योंकि उसने मेरा शोषण किया है। कृपया मुझे बताएं कि मैं उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कैसे करूं और सबूत कैसे जुटाऊं?

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यह एक बहुत ही गंभीर मामला है और आपको घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय कानून में शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना और फिर मुकर जाना एक दंडनीय अपराध है। भले ही आपके पास लिखित समझौता न हो, लेकिन कानून आपकी गवाही को ही सबसे बड़ा सबूत मानता है।

कानूनी तौर पर, अगर किसी लड़के ने शादी का झूठा वादा करके आपके साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं, तो यह बलात्कार (Rape) की श्रेणी में आता है। नई भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 साफ तौर पर कहती है कि अगर कोई 'धोखे से' (Deceitful Means) यानी शादी का झूठा वादा करके महिला से संबंध बनाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, आप उस पर धोखाधड़ी (Cheating) के लिए धारा 318 और धमकी देने के लिए धारा 351 के तहत भी केस कर सकती हैं।

जहां तक सबूतों (Evidence) की बात है, आप गलत सोच रही हैं कि आपके पास सबूत नहीं हैं। चार साल के रिश्ते में आपके पास मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, साथ में खींची गई फोटो, होटल के बिल या गिफ्ट्स की रसीदें जरूर होंगी। यहां तक कि अगर आपके दोस्तों या परिवार को इस रिश्ते के बारे में पता है, तो उनकी गवाही भी कोर्ट में सबूत मानी जाती है। सबसे बड़ा सबूत आपका खुद का बयान है जो आप मजिस्ट्रेट के सामने धारा 183 (पहले सीआरपीसी 164) के तहत देंगी।

कार्रवाई करने के लिए आपको तुरंत अपने नजदीकी महिला पुलिस थाने जाना चाहिए और लिखित शिकायत देनी चाहिए। पुलिस को एफआईआर (First Information Report) दर्ज करनी ही होगी क्योंकि यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है। जैसे ही एफआईआर दर्ज होगी और पुलिस जांच शुरू करेगी, तो गिरफ्तारी के डर से उसकी दूसरी शादी अपने आप रुक सकती है, क्योंकि कोई भी परिवार ऐसे लड़के से अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहेगा जिस पर इतना गंभीर केस हो।

अगर थाने में पुलिस आपकी नहीं सुनती है, तो आप जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत भेज सकती हैं। अगर वहां भी बात न बने, तो आप सीधे कोर्ट में जाकर वकील के जरिए शिकायत दर्ज करवा सकती हैं और कोर्ट पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देगा।


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