हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 क्या है - नियम और तलाक लेने के आधार

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 उन कानूनी आधारों का उल्लेख करती है जिन पर कोई पति या पत्नी तलाक की डिक्री मांग सकता है, चाहे दूसरा पक्ष तलाक के लिए सहमत न हो। इस धारा के तहत तलाक लेने के आधार में व्यभिचार, क्रूरता, परित्याग, मानसिक विकार और लगातार सात साल तक बिना संपर्क के रहना जैसे कारण शामिल हैं।
आसान भाषा में कहें तो यह धारा पति-पत्नी को कानूनी रूप से अलग होने का अधिकार देती है जब शादी निभाना संभव न रहे। इस लेख में हम आगे विस्तार से जानेंगे कि हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 क्या है (Hindu Marriage Act Section 13 in Hindi)? हिंदू मैरिज एक्ट 13 लागू होने के नियम और तलाक लेने के आधार क्या है?
विषयसूची
- हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 क्या है - Section 13 of the Hindu Marriage Act
- हिंदू मैरिज एक्ट सेक्शन 13 के तहत तलाक वेध कारण और आधार
- हिंदू मैरिज एक्ट सेक्शन 13 का उद्देश्य क्या है?
- हिंदू विवाह एक्ट की धारा 13 कब लागू होती है - नियम
- धारा 13 किस पर लागू नहीं होती है?
- धारा 13 की उपधारा (2): महिलाओं के लिए तलाक लेने में काम आने वाले विशेष आधार
- धारा 13 के तहत तलाक लेने के लिए आवश्यक सबूत और दस्तावेज़
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 क्या है - Section 13 of the Hindu Marriage Act
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 एक ऐसी स्थिति के बारे में बताती है जिसमें अगर किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच कोई ऐसा विवाद हो जाता है। जिसमें बात इतनी बढ़ जाती है कि एक दूसरे के बीच सारी बातों को सुधारना या ठीक करना मुश्किल हो जाऐ और दोनों का एक एक साथ रहना भी मुश्किल हो जाए।
ऐसे मामलों में हिंदू विवाह कानून की धारा 13 पति व पत्नी को कानूनी रुप से अलग होने यानी तलाक लेने का अधिकार देती है।इसे हम साधारण भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कोई पति पत्नी एक दूसरे के साथ खुश नहीं है और उनके रिश्ते में किन्हीं कारणों से दरार आ गई है। जिसके बाद वो एक दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते है, तो वे इस धारा के तहत कोर्ट से तलाक ले सकते हैं।
हिंदू मैरिज एक्ट सेक्शन 13 का उद्देश्य क्या है?
वैसे तो विवाह अधिनियम की धारा 13 का उद्देश्य पति व पत्नी के बीच के रिश्ते में शांति और संतुलन बनाए रखना है, लेकिन कई बार दोनों के रिश्तों में ऐसी वजह या बातें सामने आ जाती है जिसके बाद एक साथ रहना संभव नहीं हो पाता है। जिसमें उन दोनों को कानूनी रुप से अलग होने में धारा 13 सहायता कर सकती है।
- अगर पति पत्नी के बीच का रिश्ता मानसिक या शारीरिक रूप से बोझ बन जाए, तो उससे बाहर निकलने का अवसर इस प्रावधान द्वारा दिया जाता है।
- पति या पत्नी में से जो भी अपने रिश्ते से परेशान है, उसे इस कानून से न्याय और सुरक्षा मिलती है।
- अलग होने या तलाक के बाद दोनों लोग अपने आगे के जीवन को खुशी से जी सकते है।
हिंदू विवाह एक्ट की धारा 13 कब लागू होती है - नियम
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 केवल हिंदू धर्म के लोगों और ऐसी शादियों पर लागू होती है, जो हिंदू धर्म के अनुसार ही की गई हो। आइये इसे विस्तार से सरल भाषा द्वारा समझते है।
- यह सेक्शन केवल उन लोगों पर लागू हो सकती है जो हिंदू धर्म को मानते है और उनका पालन करते हैं या जिनका धर्म हिंदू, बौद्ध, जैन, या सिख है। ये चारों धर्म हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आते हैं।
- धारा 13 का प्रावधान सिर्फ उन शादियों पर लागू होता है जो दो हिंदू व्यक्तियों के बीच हुए हों।
- जिन शादियों को हिंदू धर्म की रीति-रिवाजों, रस्मों, और परंपराओं के अनुसार किया गया हो, वे शादियाँ ही इस धारा के अंतर्गत आती हैं।
- यह धारा तभी लागू होती है जब विवाह वैध हो यानी विवाह के समय दोनों पक्षों द्वारा सभी नियम और शर्तों का पालन किया गया हो, जैसे कि दोनों पक्षों की सहमति, उम्र की शर्तें, और विवाह में किसी अन्य कानूनी वजह की रुकावट ना होना आदि।
- यदि किसी व्यक्ति का पहले विवाह हुआ है और फिर तलाक हो गया है, और उन्होंने दोबारा से शादी कर ली होगी तो यह धारा उसके नए विवाह पर भी लागू होती है।
धारा 13 किस पर लागू नहीं होती है?
अगर पति या पत्नी में से कोई एक हिंदू न हो, और वे किसी अन्य धर्म को मानता हों तो यह धारा लागू नहीं होती। अन्य धर्मों के लोगों, जैसे मुसलमान, ईसाई, पारसी आदि के विवाह पर यह धारा लागू नहीं होती, क्योंकि उनके लिए अलग कानून बनाए गए हैं।
हिंदू मैरिज एक्ट सेक्शन 13 के तहत तलाक वेध कारण और आधार
हिंदू विवाह अधिनियम सेक्शन 13 व इसकी उपधाराओं में तलाक लेने के लिए काम आने वाले कुछ जरुरी कानूनी आधार व कारण बताए गए है जिनके तहत पति या पत्नी में से कोई भी अदालत में तलाक के लिए अर्जी दे सकता है। आइये जानते और समझते हैँ :-
सेक्शन 13 की उपधारा (1) खण्ड (i): व्यभिचार (Adultery)
यदि पति या पत्नी में से कोई भी व्यक्ति किसी अन्य पुरुष या महिला के साथ अवैध संबंध रखता है जैसे शारीरिक संबंध बनाना तो इसे तलाक के लिए एक आवश्यक आधार माना जा सकता है। ऐसे रिश्तों में दोनों का एक साथ रहना बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (ia) : क्रूरता (Cruelty)
अगर पति या पत्नी में से कोई भी एक-दूसरे के साथ शारीरिक या मानसिक रुप से अत्याचार करते है, यानी मारपीट या लड़ाई करते है तो ऐसे मामलों में क्रूरता के कारण डाइवोर्स लिया जा सकता है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (ib): परित्याग (Desertion)
यदि पति या पत्नी में से कोई भी बिना किसी कारण या सही वजह के लगातार दो सालों तक दूसरे को छोड़कर अलग रह रहा हो तो उसे परित्याग करने का कारण माना जाता है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (ii): धर्म परिवर्तन (Conversion)
यदि पति या पत्नी में से कोई एक हिंदू धर्म को छोड़ देता है और किसी अलग धर्म को अपना लेता है तो इस धर्म परिवर्तन के कारण भी कोर्ट में तलाक की अर्जी दी जा सकती है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (iii): मानसिक विकार (Mental Disorder)
अगर शादीशुदा जीवन में रह रहे दो लोगों में से कोई भी मानसिक रुप से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो भी दोनों का एक साथ रहना बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (iv): कुष्ठ रोग (Leprosy)
यदि शादीशुदा पुरुष या महिला में से कोई एक व्यक्ति किसी कुष्ठ रोग से पीड़ित है जो कभी भी ठीक नहीं होगा तो इस आधार पर भी तलाक लिया जा सकता है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (v): यौन संचारित रोग (Venereal Disease)
यदि पति या पत्नी में से किसी को यौन रोग (जैसे HIV) हो जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने का डर हो और उसके इलाज या उपचार का कोई तरीका नहीं हो तो ऐसे मामलों में भी तलाक के लिए आवेदन किया जा सकता है।
सेक्शन 13(1) खण्ड (vi): अज्ञातवास (Presumption of Death)
अगर पति या पत्नी में से कोई भी 7 सालों तक लापता रहता है यानि वो कहा है इस बात का कुछ पता ना हो, तो उस व्यक्ति को मरा हुआ मानकर डिवोर्स लिया जा सकता है।
जाने - एकतरफा और आपसी सहमती तलाक के नियम
धारा 13 की उपधारा (2): महिलाओं के लिए तलाक लेने में काम आने वाले विशेष आधार
हिन्दू विवाह एक्ट की धारा 13 की इस उपधारा में सिर्फ महिलाओं को विशेष आधार या कारण दिए गए है। जिन कारणों के होने पर वे अपने पति से तलाक ले सकती है:-
- यदि पति ने अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी अन्य महिला से दूसरी शादी कर ली है, तो पत्नी इसे तलाक के लिए एक आधार बना सकती है। भारतीय कानून के अनुसार हिंदू धर्म में एक समय में एक ही शादी मान्य होती है, और दूसरी शादी अवैध होती है।
- अगर किसी महिला के पति ने बलात्कार, सोडोमी (अप्राकृतिक यौन संबंध), या बेस्टियलिटी (जानवरों के साथ यौन संबंध बनाना) जैसे गंभीर और असाधारण अपराध किए हों, तो इस कारण भी पत्नी तलाक ले सकती है।
- अगर किसी महिला की शादी 15 वर्ष से कम उम्र से पहले करा दी गई हो और वह इस शादी को सही नहीं मानती है तो वह तलाक के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकती है।
- अगर किसी महिला को उसके पत्नी ने 5 साल से ज्यादा समय तक बिना किसी कारण के छोड़ दिया हो और वह उससे अलग रहता हो तो धारा 13 की उपधारा 2 के तहत वह महिला ऐसे रिश्ते को खत्म करने के ले अधिकार के तौर पर तलाक मांग सकती है।
धारा 13 के तहत तलाक लेने के लिए आवश्यक सबूत और दस्तावेज़
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1) और धारा 13(2) में बताए गए आधारों के लिए तलाक के आवेदन के समय कुछ सबूतों की आवश्यकता होती है। ये सबूत ही कोर्ट में सभी कारणों को सही साबित करते है और तलाक लेने में आसानी होती है।
- अगर किसी शादीशुदा पुरुष या महिला का किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध है तो ऐसी बातों को साबित करने के लिए सबूतों की बहुत आवश्यकता पड़ती है जैसे फोटो, विडियों मैसेज और गवाहों के बयान।
- यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन साथी को मारता पीटता है तो चिकित्सा रिपोर्ट, पुलिस रिपोर्ट, या गवाहों के बयान बहुत काम आते हैं।
- अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति अपना धर्म बदल लेता है तो इस बात को साबित करने का प्रमाण पत्र व गवाह आवश्यक होते है।
- अगर किसी महिला की शादी कम उम्र में करा दी गई है तो वह उस रिश्ते से निकलने के लिए शादी का प्रमाण पत्र और अपनी जन्मतिथि का दस्तावेज कोर्ट में सबूत के तौर पर दिखा सकती है।
- इसी प्रकार से ऐसे सभी मामलों में गवाहों, चिकित्सा रिपोर्ट, व फोटो आदि का इस्तेमाल सबूतों के तौर पर किया जा सकता है।
जाने - मुस्लिम धर्म में तलाक कैसे लेते हैं
निष्कर्ष:- Hindu Marriage Act Section 13 के तहत ऐसे रिश्तों से शादीशुदा महिला व पुरुषों को राहत मिल सकती है, जिस रिश्ते में इतनी दूरियाँ या दरारें आ चुकी हो की उनका एक साथ रहना मुश्किल हो जाए। यदि आप भी किसी ऐसे मामले से परेशान है और घर बैठे इस समस्या के समाधान से जुड़ी किसी भी प्रकार की कानूनी जानकारी जानना चाहते है तो आज ही हमारे वकीलों से सहायता प्राप्त कर सकते है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हिंदू विवाह कानून की धारा 13 क्या है?
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13, हिंदू परंपरा के तहत किए गए शादी के बंधन को खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है। अगर कोई शादीशुदा पुरुष या महिला अपने जीवन में एक साथ नहीं रह पा रहे हैं और उनके रिश्ते में इतनी दरार आ गई है कि तो वे इस धारा के तहत कोर्ट से तलाक ले सकते हैं।
हिन्दू मैरिज एक्ट 13 के अनुसार तलाक के जरुरी डाक्यूमेंट्स कौन से है?
इस धारा के तहत तलाक लेने के लिए विवाह का प्रमाण पत्र, तलाक का आधार साबित करने वाले दस्तावेज, विवाह को हुए कितना समय हुआ है, और गवाहों के बयान आदि शामिल हैं।
क्या Hindu Marriage Act 13 में दिए गए तलाक के सभी कारण व नियम एक समान लागू होते हैं?
नहीं, तलाक के हर आधार या कारण को कोर्ट में साबित करने के लिए अलग-अलग नियम लागू होते है और उन्हें साबित करने के लिए सबूतों की आवश्यकता होती है।
महिलाओं को हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत कौन से विशेष अधिकार दिए गए हैं?
महिलाओं को धारा 13 के तहत पति के व्यभिचार, बलात्कार, और दूसरी शादी करने जैसे विशेष आधारों पर तलाक का अधिकार दिया गया है।
तलाक के कितने समय बाद पुनर्विवाह किया जा सकता है?
तलाक के आदेश के तुरंत बाद पुनर्विवाह का अधिकार होता है, लेकिन कुछ मामलों में अपील करने के लिए कुछ समय का इंतजार करना पड़ सकता है।
धारा 13 और 13B में क्या अंतर है?
धारा 13 विवाद वाले तलाक के लिए है, जबकि धारा 13B आपसी सहमति से तलाक के लिए होती है।