तलाक के नियम 2026 - एकतरफा और आपसी सहमति से तलाक के अधिकार



तलाक के नए नियमों के अनुसार, आपसी सहमति (Mutual Divorce) और एकतरफा तलाक (Contested Divorce), दोनों की प्रक्रिया अलग होती है। आपसी सहमति से तलाक के लिए शादी का कम से कम 1 साल पूरा होना ज़रूरी है और याचिका के बाद कोर्ट आमतौर पर 6 महीने का कूलिंग-ऑफ पीरियड देती है, जिसे कुछ मामलों में खत्म भी किया जा सकता है।

एकतरफा तलाक तभी मिल सकता है एक पक्ष, दूसरे पक्ष (पति या पत्नी) की क्रूरता, व्यभिचार या परित्याग जैसे मजबूत आधार साबित कर दें और कोर्ट मान ले कि दोनों का साथ रहना संभव नहीं है। आज हम विस्तार से जानेंगे तलाक के नए नियम 2026 के तहत क्या है (Divorce New Rule in Hindi), डिवोर्स का खर्च क्या आता है, आपसी सहमति से तलाक व एकतरफा तलाक लेने के नए रूल? डिवोर्स के मामले में महिला और पुरुष के अधिकार और नियम क्या है? 




तलाक क्या होता है - Divorce in Hindi

यदि शादी-शुदा पति पत्नी अपने रिश्ते से खुश नहीं रहते या किसी भी कारण से वो दोनों एक दूसरे से अलग होना चाहते है तो उस रिश्ते को खत्म करने के लिए तलाक का सहारा लिया जाता है। तलाक को अंग्रेजी में Divorce कहा जाता है। हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 13 में तलाक के अधिकार के बारे में बताया गया है।

तलाक दो प्रकार से लिए जाता है एक होता है आपसी सहमति (Mutual Consent) से और दूसरा होता है एकतरफा तालाक (unilateral divorce), आज हम आपको तलाक से जुड़ी सभी आवश्यक बातों के बारे में बताएंगे।



तलाक के मुख्य कारण क्या है - Divorce Common Reasons in India

हिन्दू धर्म के अनुसार पति पत्नी के रिश्ते को सात जन्मो का रिश्ता कहा जाता है, परन्तु आज के समय रिश्ते एक जन्म के लिए भी ठीक से नहीं चल पाते। इसलिए यह समझना बहुत जरुरी है कि किसी रिश्ते के ठीक से न चल पाने व तलाक के मुख्य कारण क्या है।

  • किसी भी रिश्ते में एक दूसरे पर विश्वास ना होना तलाक का सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • यदि किसी रिश्ते में झूठ, छल-कपट व धोखा होगा तो वह रिश्ता आगे चलकर डिवोर्स का कारण बनेगा।
  • पति या पत्नी दोनों में से कोई भी एक दूसरे के साथ बेवफाई करता है या किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध बनाता है तो ऐसा रिश्ता तलाक का कारण बनता है।
  • यदि कोई पति अपनी पत्नी को मारता-पीटता है या किसी भी प्रकार से मानसिक व रुप से परेशान करता है तो ऐसी स्थिति में Divorce लेना ही एकमात्र विकल्प होता है।
  • शादीशुदा महिला व पुरुष दोनों द्वारा किसी भी कार्य में आपसी सहयोग ना करना, एक दूसरे की बात ना मानना, अपनी पत्नी को अप्राकृतिक रुप से संबंध बनाने के लिए मजबूर करना जैसे बहुत से अन्य ऐसे कारण है जो तलाक का कारण बनते है।


शादी के कितने दिन बाद तलाक ले सकते है

शादी के 12 महीने बाद ही कोर्ट में तलाक के लिए याचिका (Petition for divorce) दी जा सकती है। अगर पति पत्नी दोनों किसी भी कारण से एक दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते और एक वर्ष यानि 12 महीने तक अलग रहते है तो एक प्रकार से मान लिया जाता है कि शादी टूट गई है। जिसके बाद दोनों द्वारा आपसी सहमति से डिवोर्स लिया जा सकता है।



हिन्दू धर्म में तलाक के नए नियम 2026 - डाइवोर्स रूल इन हिंदी

तलाक के लिए 6 महीने का इंतजार खत्म, जी हाँ डिवोर्स के लिए बनाए गए नियमों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ बदलाव किए गए गये है। इस बदलाव के पहले यदि पति पत्नी आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते थे तो उन्हें 6 महीने का इंतजार करना पड़ता था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कहा गया है कि अगर दोनों पक्ष खुद की सहमति से अलग होना चाहते है तो उन्हें कम से कम समय में तलाक दिया जा सकता है।



आपसी सहमति से तलाक के नये नियम

आपसी सहमति से तलाक (Divorce by mutual consent) लेने का अर्थ है जिसमें पति व पत्नी दोनों बिना किसी विवाद के डाइवोर्स लेने के लिए आपस में मिलकर सहमति कर ले। आपसी सहमति से तलाक के लिए कुछ नियम व शर्तों (Terms & condition for divorce) के बारे में बताया गया है, आईए जानते है वे रूल व शर्तें किस प्रकार है।

  • पति व पत्नी दोनों एक वर्ष या उससे ज्यादा समय से एक दूसरे के साथ ना रहते हो।
  • पति व पत्नी दोनों यह फैसला करते है कि अब वे एक साथ नहीं रहेंगे और आपसी सहमति से तलाक लेंगे।
  • शादी के 1 वर्ष या उसके बाद ही डिवोर्स की याचिका दायर की जानी चाहिए।
  • तलाक की याचिका दायर होने के बाद कोर्ट द्वारा 6 महीने का समय बदलाव से पहले दिया जाता था, ताकि पति पत्नी दोनों 6 महीने बाद तलाक का फैसला बदलना चाहे तो बदल सकते थे।
  • परन्तु नए नियमों के अनुसार 6 महीने के समय को कम करवाया जा सकता है। जिस पर कोर्ट जांच कर कम से कम समय में तलाक दे देती है।
  • डिवोर्स के लिए पहली याचिका डालने के 18 महीनों के अंदर दूसरी याचिका डालनी होती है, यदि इससे ज्यादा समय होता है तो आपको दोबारा से पहली याचिका डालनी पड़ सकती है।

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एकतरफा तलाक के नए नियम

हमारे देश में आपसी सहमति से तलाक लेना बहुत ही आसान तरीका माना जाता है, लेकिन एकतरफा डाइवोर्स लेने के लिए बहुत सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। एकतरफा डाइवोर्स लेने के लिए कुछ नियम बनाए गए है, उन नियमों में से बताई गई किसी स्थिति से आप गुजर रहे है तो एकतरफा तलाक ले सकते है

  • धोखा देना :- यदि पति व पत्नी दोनों में से कोई भी धोखा देकर किसी अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाता है या अन्य अवैध रिश्ता रखता है तो कोर्ट के सामने सबूत पेश कर तलाक लिया जा सकता है।
  • हिंसा या मारपीट करने पर :- पुरुष व महिला दोनों में से किसी को भी शारीरिक या मानसिक रुप से परेशान किया जाता है, तो इस आधार पर हिंसा के सबूत कोर्ट के सामने पेश कर एकतरफा तलाक के लिए आवेदन (Application for unilateral divorce) किया जा सकता है।
  • धर्म परिवर्तन करने पर :- यदि पति पत्नी दोनों में से कोई भी धर्म परिवर्तन (Religion change) करने के लिए मजबूर करता है तो भी तलाक के लिए याचिका दायर की जा सकती है। अकसर कुछ मामलों में देखा जाता है कि शादी से पहले लड़का लड़की अलग धर्म के होते हुए भी एक दूसरे के धर्म को स्वीकार कर लेते है परन्तु शादी के बाद धर्म परिवर्तन करने के लिए परेशान करते है।
  • संन्यास लेने पर :- विवाहित जोड़े में से कोई भी एक पक्ष शादीशुदा जीवन को छोड़कर सन्यास लेता है तो दूसरा पक्ष कोर्ट (Court) से एकतरफा डिवोर्स ले सकता है।
  • यदि पति व पत्नी में से कोई भी 7 वर्ष तक कही गायब हो जाता है और 7 साल तक वापिस नहीं आता तो ऐसे हालात में भी एकतरफा डाइवोर्स लिया जा सकता है।
  • नपुंसकता (impotence) को भी पति पत्नी के अलग होने का एक कारण माना जाता है। जिसमें एकतरफा तलाक के लिए आवेदन किया जा सकता है।
 


तलाक के लिए कौन से कागजात लगते है

  • विवाह का मैरिज सर्टिफिकेट (Marriage certificate)
  • शादी का कोई फोटो या अन्य सबूत
  • पहचान पत्र (Identity card)
  • फोटो पासपोर्ट साइज (Passport size photo)
  • अन्य कोई आवश्यक दस्तावेज (Important document) जो आप किसी सबूत (proof) के तौर पर लगाना चाहे।

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तलाक लेने में कितना खर्चा आता है

वैसे तो तलाक के खर्च के बारे में बारे में वास्तव में कुछ नहीं बताया जा सकता, क्योंकि तलाक लेने से जुड़ी सभी बातों को ध्यान में रखकर ही यह तय हो पाता है कि खर्च कितना आएगा। परन्तु तलाक लेने में आपको कहा खर्च आएगा उसके बारे में थोड़ा आपको बताया जा सकता है। आइये जानते है उन्हीं कुछ बातों को।

एकतरफा के मुकाबले आपसी सहमति से तलाक लेने में बहुत ही कम खर्चा आता है।

यदि Divorce लेने वाले पति पत्नी का कोई बच्चा नहीं है या बच्चे 18 वर्ष से ज्यादा की आयु के है तो तलाक का खर्च कम आता है।

संपत्ति के विभाजन या बच्चों के पालन पोषण के लिए भी होने वाले खर्च को समय व मामले के हिसाब से ही देखा जाता है।

तलाक लेने में वकील का खर्च

तलाक लेने के लिए वकील की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए सभी वकील अपनी फीस अपने हिसाब से मांगते है। वकील का खर्च डिवोर्स मिलने में जितना समय लगता है उस हिसाब से घट बढ़ भी सकता है।

अन्य खर्चे:

तलाक के केस में कुछ अन्य खर्चे भी हो सकते है जिनमें फाईल के शुल्क, दस्तावेजों की फोटो कापी का खर्च और यात्रा संबंधित खर्च इत्यादि।



डिवोर्स के लिए महिला के अधिकार

हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार महिला को तलाक का पूरा अधिकार दिया गया है। महिला अपने तालाक लेने के अधिकारों का प्रयोग कर सकती है, जिनके लिए कुछ बातों को जानना जरुरी है।

  • पति द्वारा मारपीट या हिंसा करने पर।
  • ससुराल के लोगों द्वारा घर से निकाले जाने व परेशान करने के कारण।
  • मानसिक व शारीरिक रुप से परेशान किए जाने पर ऐसे ही अन्य कुछ कारणों से कोई भी महिला अपने पति से तलाक ले सकती है।
  • डाइवोर्स के नियमों के अनुसार महिला को उसके पति से अपना जीवन व्यतीत करने के लिए खर्च प्राप्त करने का अधिकार होता है।


तलाक के बाद बच्चे का अधिकार - बच्चा किसको मिलेगा?

तलाक के मामलों में अगर बच्चा 5 साल से कम आयु का है तो बच्चे की कस्टड़ी मां को दी जाती है। यदि बच्चा 9 साल से ज्यादा आयु का है तो वह माँ या पिता में से किस के साथ रहना चाहता है इस बात को कोर्ट के सामने रख सकता है। अगर बच्चा बड़ा हो गया है तो उसकी कस्टड़ी पिता को ही मिलती है और लड़की की कस्ट़ड़ी माँ को मिलती है।

जाने - तलाक के बाद चाइल्ड कस्टडी के नियम



तलाक (Divorce) के बाद पुरुष और महिला का जीवन

तलाक के बाद महिला व पुरुष दोनो के जीवन में बहुत ही बदलाव आ जाते है। तलाक के बाद कुछ लोगों के जीवन में अकेलापन हो जाता है व कुछ लोग तलाक़ लेकर अपना जीवन खुशी से व्यतीत करते है। डाइवोर्स लेने के बाद अपने जीवन की एक नई शुरुआत करनी चाहिए।

अकसर तलाक रिश्ते में विश्वास के खत्म होने के बाद ही लिया जाता है। ऐसी स्थिति में खुद को ऐसे बंधन से आजाद करना ही सही फैसला होता है।

इस लेख में हमने आपको आसान भाषा में विस्तार से बताया कि तलाक के नये नियम क्या है एकतरफा तलाक व आपसी तलाक क्या होता है? हम यही कामना करते है कि तलाक के कानून से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। अगर आपको तलाक से जुड़ी किसी भी कानूनी सलाह की जरूरत है, तो हमारे अनुभवी वकीलों से संपर्क करें।



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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


क्या अब तलाक के लिए छह महीने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा?

नहीं, अब नए नियमो के अनुसार आपसी सहमति से तलाक के लिए छह महीने का इंतजार नहीं करना पड़ता। डाइवोर्स प्रक्रिया और जल्दी पूरी हो सकती है।



तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी किसे मिलती है?

बच्चों की कस्टडी कोर्ट तय करता है, हालाँकि बच्चा किसको मिलेगा, इसमें मां को प्राथमिकता दी जाती है, खासकर अगर बच्चा छोटा हो।



तलाक के केस में कितनी फीस लगती है?

तलाक की फीस वकील, कोर्ट और केस की अवधि पर निर्भर करती है। आमतौर तलाक लेने में ₹5,000 से ₹50,000 तक का खर्च आ सकता है।



क्या तलाक के दौरान पति-पत्नी साथ रह सकते हैं?

अगर मामला कोर्ट में है और फैसला नहीं हुआ है, तब तक साथ रहना कानूनन मना नहीं है, लेकिन आपसी सहमति ज़रूरी है।



आपसी सहमति से तलाक लेने के नए नियम क्या हैं?

आपसी सहमति से तलाक तब लिया जाता है जब पति और पत्नी दोनों तलाक के लिए तैयार हों। नए नियमों के तहत अब तलाक लेने में कम समय लगने लगा है, बशर्ते दोनों पक्ष सहमत हों और कोई विवाद बाकी न हो।



तलाक के मामले में पुरुष के क्या अधिकार होते हैं?

तलाक में पुरुष यानि पति को भी निष्पक्ष सुनवाई, बच्चों से मिलने का अधिकार और झूठे आरोपों से बचाव का कानूनी हक होता है। कोर्ट दोनों पक्षों की स्थिति देखकर फैसला करती है।