मुस्लिम पति पत्नी तलाक कैसे लेते है? इस्लामिक तलाक प्रकार और नियम
मुस्लिम कानून में निकाह को एक समझौता (Contract) माना जाता है, इसलिए इसे तय नियमों के तहत तलाक के ज़रिये खत्म भी किया जा सकता है। इस्लाम में तलाक के अलग-अलग प्रकार और तरीके बताए गए हैं, जिनमें तलाक-ए-सुन्नत (अहसन और हसन) सबसे मान्य माने जाते हैं, जबकि एक साथ तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत अब भारत में अमान्य है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है।
मुस्लिम कानून के तहत तलाक पति द्वारा, पत्नी द्वारा या आपसी सहमति से लिया जा सकता है - जैसे तलाक, खुला, मुबारत और फस्ख। इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि मुस्लिम पुरुष या महिला तलाक कैसे लेते हैं (Divorce in Muslim)?, मुस्लिम तलाक के प्रकार और तरीके कानूनी हैं, इद्दत की अवधि क्या होती है, और तलाक की पूरी प्रक्रिया क्या है।
विषयसूची
- तलाक क्या होता है - Divorce in Hindi
- मुस्लिमों में तलाक के प्रकार (Type of Divorce in Muslims)
- मुस्लिम पत्नी द्वारा लिए जाने वाले तलाक़
- मुस्लिम धर्म में पति पत्नी का आपसी सहमति से तलाक
- मुस्लिम कानून में तलाक विभिन्न रूप (Divorce in Islam)
- इस्लाम धर्म में तलाक मौखिक या लिखित हो सकता है?
- इद्दत काल क्या है (What is Iddat-Period)?
- 1. तलाक-उल-सुन्नत (Talaq-Ul-Sunnat)
- 2. तलाक-ए-बिद्दत (Talaq-E-Biddat) वर्तमान में गैरकानूनी (Triple- Talaq)
- 3. इला (Ila)
- 4. ज़िहार (Zihar)
- 1. तलाक-ए-तफ़वीज़ (Talaq- E-Tafweez)
- 2. तलाक-ए-तालिक (Contingent Talaq)
- 1. खुला द्वारा तलाक (Divorce by Khula)
- 2. मुबारत (Mubarat)
- मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम 1939 के तहत तलाक
- मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के अनुसार मुस्लिम पत्नी के लिए तलाक के आधार
- मुस्लिम पति पत्नी द्वारा किए धर्म परिवर्तन के बाद तलाक़
- मृत्यु या बीमारी के दौरान दिया गया तलाक (Divorce on Death Bed or During Illness)
- शिया मुस्लिम कानून में तलाक (Talaq In Shia Muslims)
- जब तलाक को रद्द नही किया जा सकता है (When Talaq Becomes Irrevocable)
- मुस्लिम तलाक के कानूनी प्रभाव (Effects Of Talaq)
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तलाक क्या होता है - Divorce in Hindi
यदि शादी-शुदा पति पत्नी अपने रिश्ते से खुश नहीं रहते या किसी भी कारण से वो दोनों एक दूसरे से अलग होना चाहते है तो उस रिश्ते को खत्म करने के लिए तलाक का सहारा लिया जाता है। तलाक को अंग्रेजी में Divorce कहा जाता है।
मुस्लिम कानून में तलाक विभिन्न रूप (Divorce in Islam)
मुस्लिम कानून के तहत विवाह को निम्नलिखित में से किसी भी एक तरीके से भंग किया जा सकता है:
- पति द्वारा अपनी इच्छानुसार, न्यायालय के दखल के बिना, जब डाइवोर्स (Divorce) पति की ओर से होता है तो उसे तलाक कहा जाता है;
- पति और पत्नी की आपसी सहमति से तलाक न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना, जब यह आपसी सहमति से किया जाता है, तो इसे खुला या मुबारत कहा जाता है;
- न्यायालय द्वारा तलाक।
पत्नी अपने पति की सहमति के बिना उससे तलाक नहीं ले सकती, विवाह से पहले या बाद में किए गए कॉन्ट्रैक्ट के अलावा, लेकिन कुछ मामलों में वह न्यायालय द्वारा तलाक प्राप्त कर सकती है।
इस्लाम धर्म में तलाक मौखिक या लिखित हो सकता है?
तलाक मौखिक रूप से (लेकिन बोले गए शब्दों में) या लिखित दस्तावेज़ (तलाक-नामा) द्वारा दिया जा सकता है:
- मौखिक तलाक: तलाक देने के लिए शब्दों का कोई विशेष रूप निर्धारित नहीं है। यदि शब्द स्पष्ट हैं या तलाक का संकेत देते हैं तो तलाक की नियत (Intention) के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है, यदि शब्द अस्पष्ट हों तो तलाक की नियत (Intention) सिद्ध करनी होगी। यह आवश्यक नहीं है कि तलाक पत्नी की उपस्थिति में ही सुनाया जाए या उसे संबोधित करके ही कहा जाए (अहमद कासिम बनाम खातून बीबी 1932)।
- लिखित रूप में तलाक: तलाक-नामा लिखित रूप में दिया गया तलाक है यह वह दस्तावेज (Deed) है जिसके द्वारा तलाक दिया जाता है। इसके माध्यम से पत्नी की अनुपस्थिति में भी उसे तलाक दिया जा सकता है इसे काजी या पत्नी के पिता या अन्य गवाहों की उपस्थिति में निष्पादित (execute) किया जा सकता है।
इद्दत काल क्या है (What is Iddat-Period)?
मुस्लिम कानून के अनुसार पति की मौत या पति के द्वारा तलाक देने के बाद पत्नी को कुछ समय के लिए दुबारा निकाह करने की इजाजत नही दी जाती है इस समय को इद्दत काल कहाँ जाता है। ऐसा इस लिए किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके की पहले पति द्वारा पत्नी गर्भवती तो नही है जिस से बच्चे का पिता सुनिश्चित किया जा सके इद्दत काल मे किया गया निकाह शून्य (Void) माना जाता है।
जाने - मुस्लिम धर्म में तलाक के बाद इद्दत की पूरी जानकारी
मुस्लिमों में तलाक के प्रकार (Type of Divorce in Muslims)
कोई भी स्वस्थ दिमाग वाला वयस्क मुसलमान, अपनी पत्नी को बिना कोई कारण बताए तलाक दे सकता है। तलाक के निम्नलिखित प्रकार है:
1. तलाक-उल-सुन्नत (Talaq-Ul-Sunnat)
यह पैगंबर की सुन्नत (परंपराओं) में निर्धारित नियमों के अनुसार है। इसके दो प्रकार होते है- अहसान और हसन जो:- तलाक-ए-अहसन (Talaq-E-Ahsan) : इसमें एक बार तुहर (मासिक धर्म के बीच की अवधि) के दौरान तलाक की घोषणा करना और उसके बाद इद्दत की अवधि के दौरान संभोग से परहेज करना शामिल है। इस अवधि के दौरान, यदि पति अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध पुनः स्थापित करता है, तो तलाक रद्द हो जाता है। जब संभोग (Sexual Intercourse) नहीं हुआ हो, तो तलाक-ए-अहसन के रूप में तलाक दिया जा सकता है, भले ही पत्नी मासिक धर्म में हो।जहां पत्नी मासिक धर्म से गुजर चुकी है, वहां तुहर के दौरान घोषणा की आवश्यकता लागू नहीं होती है; इसके अलावा यह आवश्यकता केवल मौखिक तलाक पर लागू होती है, लिखित तलाक पर नहीं।
- तलाक-ए-हसन (Talaq-E-Hasan) : इसमें लगातार तुहर (मासिक धर्म के बीच की अवधि) के दौरान तलाक की तीन घोषणाएं शामिल हैं, तीनों तुहर में से किसी के दौरान कोई संभोग (Sexual-Intercourse) नहीं होता है। पहली घोषणा एक तुहर के दौरान, दूसरी अगले तुहर के दौरान तथा तीसरी उसके बाद वाले तुहर के दौरान की जानी चाहिए।
2. तलाक-ए-बिद्दत (Talaq-E-Biddat) वर्तमान में गैरकानूनी (Triple- Talaq)
- इसमे एक ही तुहर के दौरान तीन घोषणाएँ या तो एक वाक्य में, जैसे, "मैं तुम्हें तीन बार तलाक देता हूँ, या अलग-अलग वाक्यों में, जैसे, "मैं तुम्हें तलाक देता हूँ, मैं तुम्हें तलाक देता हूँ, मैं तुम्हें तलाक देता हूँ" या;
- तुहर के दौरान की गई एक घोषणा से स्पष्ट रूप से विवाह को अपरिवर्तनीय रूप से भंग करने का इरादा संकेत मिलता है, "मैं तुम्हें अटलनीय रूप से तलाक देता हूं"।
3. इला (Ila)
- यह तलाक का एक ऐसा रूप है जिसके तहत पति को शपथ लेकर यह घोषणा करने का अधिकार है कि वह अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध नहीं बनाएगा।
- इस घोषणा के बाद, पत्नी को इद्दत का पालन करना होता है। अगर पति इस अवधि के दौरान पत्नी के साथ यौन संबंध बनाता है, तो इला रद्द हो जाता है।
- इद्दत की अवधि समाप्त होने के बाद, तलाक अटल हो जाता है। भारत में इस प्रकार का तलाक प्रचलित नहीं है।
4. ज़िहार (Zihar)
- यदि पति अपनी पत्नी की तुलना अपनी मां या किसी अन्य महिला से करता है, जैसे कि दादी या मोसी जो निषिद्ध सीमा के भीतर हो (Within prohibited degree)।
- तब पत्नी को खुद को उससे अलग करने का अधिकार है जब तक कि वह प्रायश्चित न कर ले। पति दो महीने का उपवास रखकर इस तलाक को रद्द कर सकता है इस प्रकार का तलाक अब प्रचलन में नहीं है।
पढ़े - गुजारा भत्ता (Alimony) क्या है? कानून और नियम
मुस्लिम पत्नी द्वारा लिए जाने वाले तलाक़
1. तलाक-ए-तफ़वीज़ (Talaq- E-Tafweez)
- इसे प्रत्यायोजित तलाक (Delegated Divorce) के नाम से भी जाना जाता है पति अपनी पत्नी को तलाक का अधिकार सौंप सकता है।
- इसके लिए उसे स्वस्थ दिमाग वाला वयस्क (18 वर्ष से अधिक आयु) होना चाहिए।
- इस प्रकार के तलाक को समझौता (Contract) भी कहा जाता है, जो विवाह से पहले या बाद में पति-पत्नी के बीच किया जा सकता है।
- यदि समझौते की शर्तें पूरी नहीं की जाती हैं तो पत्नी तलाक की मांग कर सकती है।
- पति का अपनी पत्नी को तलाक देने का अधिकार बरकरार रहता है; यह पति को तलाक देने के उसके अधिकार से वंचित नहीं करता है।
- पत्नी को इद्दत का पालन करना जरूरी है।
2. तलाक-ए-तालिक (Contingent Talaq)
- इसमें निकाह के समय शर्तें तय की जाती हैं और तलाक की घोषणा भविष्य में किसी घटना के घटित होने पर प्रभावी हो सकती है।
- बच्चू बनाम बिस्मिल्लाह 1936 इस मामले में पति ने एक निश्चित समय के भीतर अपनी पत्नी को भरण-पोषण देने पर सहमति व्यक्त की थी, तथा भुगतान में चूक होने पर लिखित समझौता तलाक के रूप में प्रभावी हो गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना था कि पति द्वारा भुगतान में चूक होने पर लिखित समझौता वैध तलाक के रूप में प्रभावी हो गया था।
मुस्लिम धर्म में पति पत्नी का आपसी सहमति से तलाक
विवाह को न केवल तलाक़ द्वारा जो पति का मनमाना अधिकार है, बल्कि पति और पत्नी के बीच समझौते (Contract) द्वारा भी समाप्त किया जा सकता है। विवाह की समाप्ति खुला या मुबारत के रूप में हो सकती है:
1. खुला द्वारा तलाक (Divorce by Khula)
- खुला पत्नी की सहमति और इच्छा पर होता है, जिसमें वह विवाह बंधन से मुक्त होने के लिए पति को प्रतिफल देने के लिए सहमत होती है।
- ऐसे मामले में समझौते की शर्तें पति और पत्नी के बीच का मामला होती हैं, और पत्नी प्रतिफल के रूप में अपने दीन-महर (दहेज) और अन्य अधिकारों को छोड़ सकती है या पति के लाभ के लिए कोई अन्य समझौता कर सकती है।
- पत्नी द्वारा तलाक के प्रतिफल का भुगतान न करने पर तलाक अवैध नहीं हो जाता।
- पति इसके लिए पत्नी पर मुकदमा कर सकता है।
- पत्नी को खुला के बाद इद्दत का पालन करना जरूरी है।
2. मुबारत (Mubarat)
- मुबारत तलाक, खुला की तरह, समझौते द्वारा विवाह की समाप्ति है, लेकिन दोनों की उत्पत्ति के बीच एक अंतर है।
- जब विवाह समाप्त करने की पहल पत्नी की हो और वह अलग होना चाहती हो तो इसको खुला कहा जाता है।
- जब पती-पत्नी दोनो आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने के इच्छुक हो तब इस प्रक्रिया को मुबारत कहा जाता है।
- मुबारत में तलाक का प्रस्ताव पति या पत्नी किसी की भी ओर से हो सकता है, लेकिन एक बार इसे स्वीकार कर लेने पर तलाक पूरा हो जाता है।
- पत्नी को मुबारत के बाद इद्दत का पालन करना जरूरी है।
मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम 1939 के तहत तलाक
1. लियान (Lian)
- इस प्रकार का तलाक तब होता है जब पत्नी पर उसका पति व्यभिचार (Adultery) का झूठा आरोप लगाता है।
- तलाक का आधार पति द्वारा पत्नी पर व्यभिचार का झूठा आरोप होना चाहिए।
- आरोप लगाने वाला पति स्वस्थ दिमाग वाला वयस्क (18 वर्ष से अधिक आयु) होना चाहिए।
- जब तक न्यायालय द्वारा डाइवोर्स (Divorce) का आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक विवाह समाप्त नहीं होता; आदेश पारित हो जाने पर तलाक मान्य हो जाता है।
- पति, न्यायालय द्वारा आदेश पारित किये जाने से पहले, पत्नी पर लगाए गए व्यभिचार के झूठे आरोप को वापस लेकर तलाक को रोक सकता है।
2. फ़स्क (Faskh)
यदि पति-पत्नी को लगता है कि वे एक-दूसरे के अनुकूल नहीं हैं, तो वह न्यायालय मे तलाक के लिए अर्जी दायर कर सकते हैं।
मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के अनुसार मुस्लिम पत्नी के लिए तलाक के आधार
मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के अनुसार मुस्लिम पत्नी के लिए तलाक के निम्नलिखित आधार है:
- पति की अनुपस्थिति: यदि पति पिछले चार वर्षों से अज्ञात है। इस आधार पर विवाह विच्छेद का आदेश जारी होने के छह महीने बाद प्रभावी होगा, और उस दौरान यदि पति व्यक्तिगत रूप से या किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होता है। और यदि कोर्ट संतुष्ट है, तो आदेश को रद्द किया जा सकता है।
- भरण-पोषण प्रदान करने में विफलता: यदि पति दो साल तक अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में असफल रहता है।
- पति को कारावास: यदि पति को सात वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा हो गई हो।
- वैवाहिक कर्तव्यों का पालन करने में विफलता: यदि पति बिना किसी उचित कारण के तीन वर्षों तक अपनी वैवाहिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असमर्थ है।
- पति की नपुंसकता: यदि पति नपुंसक हो।
- पागलपन, कुष्ठ रोग, या यौन रोग: यदि पति दो वर्षों से पागल है या कुष्ठ रोग या किसी यौन रोग से पीड़ित है, तो पत्नी उसी आधार पर न्यायिक तलाक की मांग कर सकती है।
- पत्नी द्वारा विवाह से इनकार: यदि किसी लड़की का विवाह उसके पिता या अभिभावक द्वारा 15 वर्ष की आयु से पहले कर दिया जाता है, तो मुस्लिम कानून के तहत उसे 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद विवाह से इनकार करने का और तलाक का आदेश प्राप्त करने का अधिकार है।
- पति द्वारा क्रूरता: यदि पति अपनी पत्नी के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार करता है, तो वह तलाक के लिए अदालत में याचिका दायर कर सकती है।
- मुस्लिम कानून द्वारा मान्यता प्राप्त विवाह विच्छेद के आधार- पत्नी भी कानून के तहत मान्य आधार पर तलाक प्राप्त करने की हकदार है।
मुस्लिम पति पत्नी द्वारा किए धर्म परिवर्तन के बाद तलाक़
- पति द्वारा धर्मत्याग: मुस्लिम पति द्वारा इस्लाम से धर्मत्याग करने पर विवाह तत्काल विच्छेद हो जाएगा। पति द्वारा धर्मत्याग करना विवाह विच्छेद अधिनियम 1939 की धारा 4 के दायरे से बाहर है। परिणामस्वरूप, पति द्वारा धर्मत्याग अभी भी प्राचीन कानून द्वारा विनियमित है, जो यह निर्धारित करता है कि पति द्वारा इस्लाम से इनकार करने पर विवाह पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा और तत्काल विच्छेद हो जाएगा।
- पत्नी द्वारा धर्मत्याग: विवाहित मुस्लिम महिला का इस्लाम से भिन्न धर्म अपनाना उसके विवाह को नष्ट नहीं कर देता। इसके अतिरिक्त, पत्नी अधिनियम की धारा 2 में निर्धारित आधारों में से किसी एक पर अपने विवाह को समाप्त करने का निर्णय ले सकती है, अगर उसने इस्लाम को त्याग दिया है।
मृत्यु या बीमारी के दौरान दिया गया तलाक (Divorce on Death Bed or During Illness)
इस्लाम धर्म में बीमार पुरुष को तलाक देने का अधिकार दिया गया है, ताकि उसकी मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को विरासत का अधिकार न मिल सके। यदि पुरुष बीमारी की हालत में तलाक देता है और इद्दत अवधि समाप्त होने से पहले उसकी मृत्यु हो जाती है, तो पत्नी अपने हिस्से का दावा करने की हकदार है।यदि इद्दत अवधि की समाप्ति के बाद पति की मृत्यु हो जाती है तो उत्तराधिकार का कोई अधिकार नहीं है।
शिया मुस्लिम कानून में तलाक (Talaq In Shia Muslims)
शिया इस्लाम में, डाइवोर्स (Divorce) की प्रक्रिया, जिसे तलाक के नाम से भी जाना जाता है, सुन्नी इस्लाम में पालन किए जाने वाले सिद्धांतों और प्रथाओं से अलग है।
- शिया कानून के तहत तलाक के लिए पति को दो सक्षम गवाहों की मौजूदगी में मौखिक रूप से तलाक की घोषणा करनी होती है। मुख्य तत्व तलाक का इरादा है, क्योंकि वास्तविक इरादे के बिना सुनाया गया तलाक अमान्य माना जाता है।
- शिया इस्लाम सिर्फ़ तलाक-ए-सुन्नत को मान्यता देता है, जिसे तलाक के नाम से जाना जाता है।
- सुन्नी कानून के विपरीत, शिया कानून ऐसे तलाक को स्वीकार नहीं करते जो भविष्य में किसी घटना के घटित होने पर निर्भर हों।
जब तलाक को रद्द नही किया जा सकता है (When Talaq Becomes Irrevocable)
- इद्दत की अवधि समाप्त होने पर तलाक-ए-अहसन पूर्ण हो जाता है और इसे रद्द नही किया जा सकता है।
- इद्दत काल की परवाह किए बिना, तलाक-ए-हसन तीसरी बार कहने पर पूर्ण हो जाता और इसे रद्द नही किया जा सकता है।
- इद्दत काल की परवाह किए बिना, तलाक-उल-बिद्दत अपने उच्चारण के तुरंत बाद पूर्ण हो जाता है और इसे रद्द नही किया जा सकता है।
मुस्लिम तलाक के कानूनी प्रभाव (Effects Of Talaq)
- दूसरा विवाह करने का अधिकार
- दहेज तुरन्त देय (Immediately Payable) हो जाता है
- उत्तराधिकार के अधिकार समाप्त हो जाते हैं
- संभोग (Sexual-Intercourse) अवैध हो जाता है
जाने - हिंदू तलाक के नए नियम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मुस्लिम महिला बिना पति की मंजूरी के तलाक ले सकती है?
हां, यदि मुस्लिम पति पत्नी पर अत्याचार करता है या तलाक नहीं दे रहा, तो महिला फस्ख के ज़रिए कोर्ट से तलाक ले सकती है।
मुस्लिम तलाक के लिए कोर्ट जाना ज़रूरी है क्या?
क्या पति बिना किसी वजह तलाक दे सकता है?
इस्लाम में तलाक को अंतिम विकल्प माना गया है और बिना वजह तलाक देना सही नहीं माना जाता। कुरान में कहा गया है कि पहले सुलह की कोशिश की जाए, फिर भी अगर बात न बने तभी तलाक दिया जाए।