राष्ट्रपति शासन कब और कैसे लगता है - नियम, अनुच्छेद, शर्ते और प्रभाव
भारत में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) अक्सर चर्चा में रहता है, लेकिन ज्यादातर लोगों को यह समझ नहीं होता कि यह लगता कब है और क्यों लगता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत तब राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, जब किसी राज्य की सरकार ठीक से काम न कर पाए या वहां संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ जाए। ऐसे हालात में राज्य की चुनी हुई सरकार हट जाती है और प्रशासन राज्यपाल के जरिए सीधे केंद्र सरकार संभालती है। आज के इस लेख में हम राष्ट्रपति शासन के बारे में विस्तार से जानेंगे कि राष्ट्रपति शासन क्या है (President Rule in India), यह कब, कैसे और क्यों लागू होता है? राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद और राष्ट्रपति शासन हटाने की प्रक्रिया?
हमारे देश में जिस प्रकार अपराधों को रोकने के लिए अलग-अलग कानून बनाए गए है। उसी प्रकार से राज्यों को संविधान का सही ढंग से पालन करने के लिए भी कई कानूनी प्रावधान बनाए गए है। संविधान व कानूनी प्रक्रिया के द्वारा ही पूरे देश में कानूनी व्यवस्था बनाई जाती है। जिसके बारे में जानकारी होना देश के हर नागरिक के लिए आवश्यक है। इसलिए हमारे इस आर्टिकल में दी गई सभी जानकारियों को सरल भाषा में समझने के लिए अंत तक जरुर पढ़े।
विषयसूची
- राष्ट्रपति शासन का मतलब क्या है - What is President Rule in Hindi?
- भारत में राष्ट्रपति शासन लागू करने की प्रक्रिया क्या है?
- राष्ट्रपति शासन को हटाने व राज्य सरकार को बहाल करने की प्रक्रिया
- भारत में राष्ट्रपति शासन क्यों और कब लागू किया जाता है?
- राष्ट्रपति शासन के दौरान क्या होता है?
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद (Article) 356 में राष्ट्रपति शासन का महत्व
- 1. राज्यपाल की रिपोर्ट
- 2. राष्ट्रपति का निर्णय
- 3. संसद से मंजूरी
- राष्ट्रपति शासन लगने पर राज्य सरकार का क्या होता है?
- राष्ट्रपति शासन के दुरुपयोग होने पर क्या कानूनी कार्यवाही की जा सकती है?
- राज्यपाल की रिपोर्ट
- राज्य में चुनाव करवाना
- बहुमत साबित करना
- संसद की मंजूरी
- न्यायपालिका की भूमिका
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राष्ट्रपति शासन का मतलब क्या है - What is President Rule in Hindi?
जब किसी राज्य की सरकार (State Government) संविधान (Constitution) के अनुसार सही ढंग से काम नहीं कर पाती है, तो उस राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लागू किया जाता है। इसका मतलब है कि राज्य में केंद्र सरकार के नियम व कानून लागू हो जाते है, यानि उस राज्य के प्रशासन का नियंत्रण (Control) राष्ट्रपति के पास आ जाता है।
भारत में राष्ट्रपति शासन क्यों और कब लागू किया जाता है?
राष्ट्रपति शासन किसी भी राज्य में तभी लागू किया जाता है, जब राज्य में गंभीर समस्याएँ पैदा हो जाती हैं और राज्य सरकार उनका समाधान नहीं कर पाती है। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद (Article) 356 में दिया गया है।
इसको लागू किए जाने के कई कारण हो सकते है:-
- यदि राज्य सरकार संविधान का पालन करने में असफल हो जाए।
- राज्यपाल की सलाह को नजरअंदाज कर देने पर।
- जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था (Law & Order) बनाए रखने में राज्य सरकार का नाकामयाब हो जाना।
- जब विधानसभा में कोई भी पार्टी या गठबंधन बहुमत (Majority) प्राप्त नहीं कर पाती, और सरकार बनाने में असफल रहती है।
- यदि राज्यपाल (Governor) अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव (Suggestion) देते हैं कि राज्य में संविधान के तहत कार्य नहीं किए जा रहे है, और वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।
- अगर राज्य में अशांति हो, जैसे दंगे, विद्रोह, या अन्य गंभीर स्थिति, तो राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
राष्ट्रपति शासन के दौरान क्या होता है?
राज्यपाल, जो राष्ट्रपति के प्रतिनिधि (Representative) होते हैं, राज्य का प्रशासनिक नियंत्रण (Administrative Control) अपने हाथ में ले लेते हैं। यानि उस राज्य के प्रशासन को राज्यपाल द्वारा संभाला जाता है। इसके बाद राज्य की विधानसभा (Assembly) को कुछ समय के लिए निलंबित (Suspended) या पूरी तरह से भंग (Dissolved) कर दिया जाता है। जिसमें मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद को उनके पदों से हटा दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में राज्य के प्रशासन का पूरा नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथ में आ जाता है, और राष्ट्रपति की सहमति (Consent) से सभी फैसले लिए जाते हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद (Article) 356 में राष्ट्रपति शासन का महत्व
भारतीय संविधान का आर्टिकल 356 राज्यों में राष्ट्रपति शासन के प्रावधान को शामिल करता है। यह प्रावधान देश की संवैधानिक व्यवस्था (Constitutional System) को बनाए रखने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। राष्ट्रपति शासन के द्वारा इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि देश के हर राज्य में संविधान का पालन हो।
जब राज्य में गंभीर राजनीतिक या सामाजिक संकट पैदा होता है, तो यह प्रावधान देश की एकता (Unity) को बनाए रखने में मदद करता है। इस प्रावधान के तहत इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि कोई राज्य सरकार अपने अधिकारों का दुरुपयोग (Misuse) न करें।
भारत में राष्ट्रपति शासन लागू करने की प्रक्रिया क्या है?
अनुच्छेद 356 कहता है कि यदि किसी राज्य में यह देखा जाए कि वहां की सरकार संविधान के अनुसार काम नहीं कर पा रही है, तो राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। यह प्रक्रिया राज्यपाल की रिपोर्ट और अन्य परिस्थितियों के आधार पर पूरी होती है। आइये इस प्रक्रिया को सरल भाषा में विस्तार से समझते है:-
1. राज्यपाल की रिपोर्ट
जब राज्य में कोई गंभीर संवैधानिक समस्या आ जाती है, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजते हैं। इस रिपोर्ट में यह लिखा होता है कि इस राज्य में संविधान के अनुसार काम करना संभव नहीं है।
उदाहरण के लिए इसके कई कारण हो सकते है जैसे: जब सरकार बहुमत खो देती है या कानून-व्यवस्था खराब हो जाती है, या चुनाव के बाद भी जब सरकार नहीं बन पाती है।
2. राष्ट्रपति का निर्णय
राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति यह निर्णय लेते हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए या नहीं। यदि राष्ट्रपति को यह विश्वास होता है कि राज्य में संवैधानिक प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं हो पा रहा है, तो वह राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं।
3. संसद से मंजूरी
राष्ट्रपति शासन लागू करने के बाद इसे संसद (Parliament) के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश करना होता है। यदि संसद इसे मंजूरी देती है, तो यह 6 महीने तक जारी रह सकता है। संसद की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति शासन केवल दो महीने तक लागू रह सकता है, और इसको ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक ही लागू रखा जा सकता है।
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राष्ट्रपति शासन लगने पर राज्य सरकार का क्या होता है?
राज्य सरकार की भूमिका समाप्त होना:-
जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है, तो उस राज्य की सरकार की भूमिका पूरी तरह से समाप्त हो जाती है। राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य सरकार के मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट को तुरंत अपना पद छोड़ना पड़ता है। इसका मतलब है कि राज्य में सरकार का कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री अब प्रशासनिक निर्णय नहीं ले सकता।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य का प्रशासन राज्यपाल (Governor) के हाथों में चला जाता है। राज्यपाल का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनी रहे और प्रशासन सुचारू रूप से चले। यदि विधानसभा भंग कर दी जाती है, तो राज्य में दोबारा चुनाव कराए जाते हैं। राज्य के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी राज्यपाल और केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। सभी योजनाओं और कार्यक्रमों (Schemes Or Programs) को भी केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लागू किया जाता है।
राष्ट्रपति शासन के दुरुपयोग होने पर क्या कानूनी कार्यवाही की जा सकती है?
राष्ट्रपति शासन लागू होने पर यदि किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या संस्था को लगता है कि इसका गलत उपयोग किया गया है, तो वे इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं। इसलिए इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के उपायों को समझना बहुत ही आवश्यक है, जो कि इस प्रकार है।
सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति शासन हटाने की याचिका दायर करना:-
भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रपति शासन के फैसले की न्यायिक जांच (Judicial investigation) की मांग की जा सकती है। अगर किसी पार्टी को लगता है कि इस कानून का इस्तेमाल गलत रुप से किया गया है तो सुप्रीम कोर्ट में इसको रद्द करने की याचिका दायर कि जा सकती है। इसके बाद सभी जांच पूरी हो जाने के बाद अगर यह साबित हो जाता है, कि अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया गया है, तो सुप्रीम कोर्ट इसे रद्द कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा है कि, बहुमत साबित करने का अवसर दिए बिना सरकार को हटाना गलत है। केंद्र सरकार को इस प्रावधान का इस्तेमाल केवल आपातकालीन परिस्थितियों (Emergency Situations) में ही करना चाहिए।
राष्ट्रपति शासन को हटाने व राज्य सरकार को बहाल करने की प्रक्रिया
जब राष्ट्रपति शासन लागू होता है, तो राज्य का प्रशासन केंद्र सरकार के हाथों में आ जाता है। लेकिन यह शासन हमेशा के लिए लागू नहीं रहता है। जिसके बाद राज्य में फिर से लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) और सरकार को बहाल (Restore) करने के लिए एक प्रक्रिया अपनाई जाती है। आइये इस प्रक्रिया को समझते है:-
राज्यपाल की रिपोर्ट
राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं। जब राज्य में संवैधानिक व्यवस्था ठीक हो जाती है, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजते है। इस रिपोर्ट में यह लिखा होता है कि राज्य में चुनाव कराने के लिए अब सही समय है।
राज्य में चुनाव करवाना
राष्ट्रपति शासन समाप्त करने का सबसे प्रमुख तरीका चुनाव (Election है। चुनाव आयोग राज्य विधानसभा के लिए नए चुनाव कराने का समय तय करता है। चुनाव के बाद चुने गए सभी प्रतिनिधियों के आधार पर सरकार बनाई जाती है, और राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से लागू होती है।
बहुमत साबित करना
अगर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन विधानसभा भंग किए बिना लागू हुआ है, तो बहुमत साबित करने का मौका दिया जा सकता है। यदि किसी पार्टी या गठबंधन को बहुमत मिलता है, तो उन्हें सरकार बनाने का अवसर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत राज्यपाल नए मुख्यमंत्री को शपथ दिलाते हैं।
संसद की मंजूरी
राष्ट्रपति शासन को समाप्त करने के लिए संसद की मंजूरी भी बहुत आवश्यक होती है। यदि राष्ट्रपति को लगता है कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था फिर से बहाल (यानि फिर से शुरु) हो सकती है, तो वह संसद को इसकी जानकारी देते हैं। संसद से अनुमति मिलने के बाद राष्ट्रपति शासन को समाप्त किया जाता है।
न्यायपालिका की भूमिका
यदि राष्ट्रपति शासन लागू होने में किसी प्रकार का विवाद हो, तो न्यायपालिका (judiciary) इसमें दखल दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में अदालत राज्य में संवैधानिक व्यवस्था को फिर से लागू करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दे सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राष्ट्रपति शासन क्या होता है?
जब किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार काम करने में असफल हो जाती है, तो वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है। इसमें राज्य का शासन केंद्र सरकार के पास आ जाता है, और राष्ट्रपति सीधे तौर पर राज्य का प्रशासन चलाते हैं।
राष्ट्रपति शासन कितने समय के लिए लागू किया जा सकता है?
राष्ट्रपति शासन शुरुआत में अधिकतम 2 महीने के लिए लागू किया जा सकता है। अवधी को संसद की मंजूरी से 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है।
राष्ट्रपति शासन और आपातकाल में क्या अंतर है?
राष्ट्रपति शासन सिर्फ एक राज्य में लागू होता है, जबकि आपातकाल (emergency) पूरे देश में लागू होता है। राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत आता है, जबकि राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के तहत आता है।
क्या राष्ट्रपति शासन को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, अगर किसी को लगता है कि अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग हुआ है, तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
राष्ट्रपति शासन को कब हटाया जा सकता है?
जब राज्य में संवैधानिक स्थिति बिल्कुल ठीक हो जाती है, यानि उस राज्य में पहले की तरह संविधान के नियमों के तहत प्रशासन काम करने लगता है तब इसे हटा दिया जाता है।