कैविएट क्या है? कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया, नियम



कैविएट याचिका (Caveat Petition) एक तरह की पहले से दी गई कानूनी सूचना होती है, जिसे कोई व्यक्ति कोर्ट में इसलिए दाखिल करता है ताकि उसके खिलाफ कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसे सुना जाए। इसका मकसद यह होता है कि अदालत एकतरफा आदेश (Ex-parte Order) न दे और फैसला लेने से पहले कैविएटर को अपना पक्ष रखने का मौका मिले।

कैविएट याचिका खास तौर पर तब लगाई जाती है, जब किसी व्यक्ति को आशंका हो कि सामने वाला पक्ष कोर्ट से उसके खिलाफ कोई आदेश लेने की कोशिश कर सकता है। इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कैविएट क्या होती है (Caveat Petition meaning in Hindi), कैविएटर कौन होता है, और कोर्ट में कैविएट याचिका कब, कौन और कैसे दाखिल कर सकता है।


विषयसूची

  1. कैविएट क्या होता है (Meaning Of Caveat Petition in Hindi)?
  2. कैविएट का प्रारूप​ (Format Of Caveat)
  3. कैविएट याचिका कैसे दायर करे(How to File Caveat Petition)
  4. कैविएटर किसे कहते है (Who is a Caveator)?
  5. सिविल प्रक्रिया संहिता 1963 की धारा 148-ए का प्रावधान
  6. कैविएट के उद्देश्य और लाभ (Object and Benefits of Caveat)
  7. कैविएट याचिका की प्रकृति और दायरा
  8. कौन कैविएट याचिका दाखिल कर सकता है? (Who Can File a Caveat Petition)
  9. अदालत में कैविएट कब दर्ज की जा सकती है (When Caveat Can be Filed)
  10. जब कैविएट दर्ज नहीं की जा सकती (When Caveat Cannot be Filed)
  11. कैविएट याचिका के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents to File a Caveat Petition)
  12. आवेदक को कैविएट का नोटिस (Notice of Caveat to the Applicant)
  13. कैविएटर, आवेदक और न्यायालय के अधिकार और कर्तव्य
  14. कैविएट की समय सीमा (Time Period of Caveat)
  15. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Property Dispute



कैविएट क्या होता है (Meaning Of Caveat Petition in Hindi)?

सिविल प्रक्रिया संहिता 1963 में "केवियट" शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। यह एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है "सावधान"।

"केवियट" एक कानूनी नोटिस है जो किसी एक पार्टी द्वारा दायर किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी मुकदमे या न्यायिक कार्यवाही में कोई आदेश या निर्णय दिए जाने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाए।

यह, कैविएट याचिका (Petition) दाखिल करने वाले व्यक्ति द्वारा, जैसा भी मामला हो, यह प्रोबेट या प्रशासनिक पत्र प्रदान करने के विरुद्ध उठाया गया एहतियाती उपाय है वसीयत संबंधी कार्यवाही में कैविएट दाखिल करना बहुत आम है। सिविल प्रक्रिया संहिता 1963 की धारा 148-ए में कैविएट दर्ज करने का प्रावधान है।



कैविएटर किसे कहते है (Who is a Caveator)?

कैविएट याचिका दाखिल करने या दर्ज कराने वाले व्यक्ति को कैविएटर कहा जाता है।



सिविल प्रक्रिया संहिता 1963 की धारा 148-ए का प्रावधान

सीपीसी की धारा 148-ए किसी व्यक्ति को उसके खिलाफ शुरू किए गए मुकदमे या कार्यवाही में कैविएट दाखिल करने की अनुमति देती है इसके अनुसार:
 

  • कैविएट दाखिल करने का अधिकार: जहां किसी न्यायालय में मुकदमा दायर किया जा चुका है या मुकदमा दायर करने की या कार्यवाही के संबंध में आवेदन किए जाने की संभावना है या, वहां सुनवाई के समय न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के अधिकार का दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति उसके संबंध में कैविएट दाखिल कर सकता है।
  • जहां कैविएट दाखिल किया गया है, वहां कैविएटर कैविएट की सूचना पंजीकृत डाक द्वारा, प्राप्ति सूचना सहित, उस व्यक्ति को देगा जिसके द्वारा धारा 148-ए के अंतर्गत आवेदन किया गया है या किये जाने संभावना है।
  • जहां कैविएट दाखिल किए जाने के बाद किसी वाद या कार्यवाही में कोई आवेदन दाखिल किया जाता है, वहां न्यायालय कैविएटर को आवेदन की सूचना देगा।
  • जहां किसी कैविएट की सूचना आवेदक को दे दी गई है, वहां वह कैविएटर को, कैविएटर के खर्च पर, उसके द्वारा किए गए आवेदन की और उन दस्तावेज की एक नकल भी देगा जो उसने आवेदन के समर्थन में दाखिल कि है या उसके द्वारा दाखिल की जाएगी।
  • जहां कोई कैविएट दाखिल कर दी गई है, वहां ऐसी कैविएट दाखिल किए जाने की तारीख से 90 दिन की समाप्ति के बाद तब तक प्रभावी नहीं रहेगी जब तक कि आवेदन ऐसी अवधि की समाप्ति से पूर्व न किया गया हो।
 

कैविएट के उद्देश्य और लाभ (Object and Benefits of Caveat)

कैविएट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोर्ट एकतरफा आदेश (Ex-parte Order) पारित न करे और कैविएटर के हितों की रक्षा हो कैविएट के निम्नलिखित उद्देश्य और फायदे है:

  • किसी व्यक्ति के हितों की रक्षा करना जिसके विरुद्ध मुकदमा दायर है या दायर होने की संभावना है।
  • एसे मुकदमे या न्यायिक कार्यवाही में किसी पक्ष द्वारा दाखिल आवेदन पर आदेश पारित किया जा सकता है।
  • ऐसा व्यक्ति जो कैविएट दाखिल करता है, उस व्यक्ति का  ऐसे आवेदन में आवश्यक पक्षकार होना जरूरी नहीं है, लेकिन वह ऐसे आवेदन पर पारित आदेश से प्रभावित हो सकता है।
  • कैविएट न्यायालय के बोझ को कम करने में सहायता करता है और कार्यवाही की बहुलता को कम करता है तथा मुकदमेबाजी को समाप्त करता है।
  • इस प्रकार यह धारा ऐसे पक्षकार को एकपक्षीय आदेश दिए जाने से पूर्व सुनवाई का अवसर प्रदान करती है।
 

कैविएट याचिका की प्रकृति और दायरा

कैविएट का आवेदन किसी मुकदमे या कार्यवाही में दायर किया जा सकता है। हालाँकि, कुछ उच्च न्यायालयों (High Courts) ने माना है कि अपील (चाहे पहली या दूसरी) या निष्पादन (Disposal) कार्यवाही के दौरान कैविएट के आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता है।

लेकिन चंद्र अग्रवाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, एआईआर 1966 एससी 1888 के मामले में सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या के अनुसार  धारा 141 के तहत "सिविल कार्यवाही" में सभी प्रकार की कार्यवाही शामिल है जो मूल कार्यवाही नहीं है। इस प्रकार, सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत सभी मुकदमों, अपीलों और कार्यवाही में कैविएट का आवेदन दायर किया जा सकता है।

ऐसे मामले जहां कैविएटर किसी कार्यवाही में अनुपस्थित है और न्यायालय को लगता है कि प्रथम दृष्टया (Prima-Facia) मामला आवेदक के पक्ष में है, न्यायालय उसके पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान कर सकता है।

जाने - स्टे ऑर्डर क्या है? Stay Order कैसे लेते है



कौन कैविएट याचिका दाखिल कर सकता है? (Who Can File a Caveat Petition)

  • कैविएट किसी भी व्यक्ति द्वारा दाखिल किया जा सकता है जो किसी आवेदन पर पारित होने वाले अंतरिम आदेश से प्रभावित होने वाला है, जिसके किसी न्यायालय में दायर या दायर होने वाले किसी मुकदमे या न्यायिक कार्यवाही में किए जाने की संभावना है।
  • कोई भी व्यक्ति जो उपर्युक्त आवेदन की सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के अधिकार का दावा करता है, वह इसके संबंध में कैविएट दाखिल कर सकता है।
  • कैविएट को कैविएटर या उसकी ओर से किसी वकील द्वारा एक नकल के साथ दायर किया जाना चाहिए और इसे न्यायालय द्वारा बनाए गए कैविएट रजिस्टर में याचिका के रूप में या न्यायालय द्वारा निर्धारित किसी अन्य रूप में रजिस्टर्ड करवाना चाहिए।
 

अदालत में कैविएट कब दर्ज की जा सकती है (When Caveat Can be Filed)

कोर्ट में सामान्यतः निर्णय सुनाए जाने या आदेश पारित होने के बाद कैविएट दर्ज की जा सकती है।

पशुपति नाथ बनाम रजिस्ट्रार सहकारी समिति ए.आई.आर 1983: इस मामले में यह माना गया कि असाधारण मामलों में निर्णय सुनाए जाने या आदेश पारित किए जाने से पहले भी कैविएट दायर की जा सकती है।



जब कैविएट दर्ज नहीं की जा सकती (When Caveat Cannot be Filed)

सीपीसी की धारा 148-ए के प्रावधान केवल उन मामलों में लागू हो सकते हैं, जहां आवेदन पर कोई आदेश दिए जाने या दायर किए जाने के प्रस्ताव से पहले कैविएटर को सुनवाई का अधिकार है।



कैविएट का प्रारूप​ (Format Of Caveat)

सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत कैविएट का कोई फार्मेट निर्धारित नहीं किया गया है, इसलिए इसे एक याचिका के रूप में दायर किया जा सकता है।

निर्मल चंद्र बनाम गिरिंद्र नारायण ए.आई.आर.1978 के अनुसार  कैविएटर को उस आवेदन की प्रकृति को वर्णित (Describe) करना होगा जिसे किए जाने की उम्मीद है या किया गया है और ऐसे आवेदन की सुनवाई में अदालत के समक्ष उपस्थित होने का उसका अधिकार भी।

स्टाम्प रिपोर्टर या न्यायालय की रजिस्ट्री एक रजिस्टर रखेगी जिसमें कैविएट दाखिल करने का रजिस्ट्रीकरण किया जाएगा।



कैविएट याचिका के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents to File a Caveat Petition)

कैविएट याचिका दाखिल करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक दस्तावेज होने महत्वपूर्ण है:

  1. कैविएट दाखिल करने वाले व्यक्ति का पहचान प्रमाण-पत्र जेसे की आधार-कार्ड।
  2. वकालत-नामा और उपस्थिति का ज्ञापन (Memo of Appearance)
  3. कैविएट नोटिस की पंजीकृत डाक की रसीद।
  4. शपथ -पत्र  (Affidavit)।
  5. विवादित या मुल आदेश।
  6. कैविएट दाखिल करने के लिए इंडेक्स फॉर्म।
 

कैविएट याचिका कैसे दायर करे(How to File Caveat Petition)

  1. कैविएटर को शपथ-पत्र  (Affidavit) और याचिका पर हस्ताक्षर (Sign) करना होगा।
  2. शपथ-पत्र को अधिकृत शपथ आयुक्त द्वारा सत्यापित कराना चाहिए।
  3. शपथ-पत्र और याचिका के साथ हस्ताक्षरित (Signed) वकालत-नामा भी लगाना पड़ता है जो न्यायालय के समक्ष वकील को उसका प्रतिनिधित्व (Representation) करने का  अधिकार प्रदान करता है।
  4. कैविएट याचिका के साथ विवादित या मुल आदेश (वह आदेश जिसके खिलाफ अपील या न्यायिक कार्यवाही की गई हो या करने की संभावना हो) संलग्न किया जाएगा।
  5. कैविएट के नोटिस की तामील (पंजीकृत डाक की रसीद)  न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए, जिससे पता चले कि कैविएटर ने संबंधित पक्षों को उनकी कैविएट के बारे में सूचित कर दिया है।
  6. कैविएट याचिका, शपथ-पत्र (Affidavit) और सभी दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में हों और न्यायालय के नियमों के अनुसार होने चाहिए।

जाने -  याचिका क्या होती है - प्रकार और दायर प्रक्रिया



आवेदक को कैविएट का नोटिस (Notice of Caveat to the Applicant)

  1. जब कैविएट दाखिल किया जाता है, तो न्यायालय कैविएटर को आवेदन की सूचना देगा;
  2. यह प्रावधान आवेदक को बाध्य करता है जिसे कैविएट दिया गया है, कि वह कैविएटर को, कैविएटर के खर्च पर;
  3. आवेदन की एक नकल तथा उसके द्वारा अपने आवेदन के समर्थन में प्रस्तुत किए गए कागजातों और दस्तावेजों की नकल उपलब्ध कराए।
 

कैविएटर, आवेदक और न्यायालय के अधिकार और कर्तव्य

1. कैविएटर के अधिकार और कर्तव्य

एक बार जब किसी पक्षकार को कैविएटर की दर्जा दे दिया जाता है तो उसका यह कर्तव्य है कि वह कैविएट की सूचना पंजीकृत डाक द्वारा उस व्यक्ति या व्यक्तियों को दे, जिनके द्वारा कैविएटर के विरुद्ध अंतरिम आदेश के लिए आवेदन किया जा सकता है।

कर्नाटक राज्य बनाम निल, 1999 के मामले मे यह माना गया की यह प्रावधान निर्देशात्मक है और अनिवार्य नहीं है, जब वाद, अपील या अन्य कार्यवाही शुरू करने वाले व्यक्ति की अनिश्चितता के कारण कोई नोटिस नहीं दिया जा सकता है, तो न्यायालय अपने विवेक पर नोटिस देने से छूट दे सकता है और पक्षकार को प्रतिवादी का नाम लिए बिना कैविएट दाखिल करने की अनुमति दे सकता है।

2. आवेदक के अधिकार और कर्तव्य

यह आवेदक का कर्तव्य है वह कैविएटर को, कैविएटर के खर्च पर, उसके द्वारा किए गए आवेदन की और उन दस्तावेज की एक नकल भी देगा जो उसने आवेदन के समर्थन में दाखिल कि है या उसके द्वारा दाखिल की जाएगी।

3. न्यायालय के अधिकार और कर्तव्य

न्यायालय का यह कर्तव्य है कि यदि कैविएट दर्ज किए जाने के बाद कोई आवेदन दायर किया जाता है, तो न्यायालय कैविएटर को आवेदन की सूचना देगी।
 



कैविएट की समय सीमा (Time Period of Caveat)

कैविएट दाखिल करने की तारीख से 90 दिनों से अधिक समय-सीमा तक वैध नहीं होगी। 90 दिन की अवधि बीत जाने के बाद, कैविएट का नवीनीकरण (Renewal) किया जा सकता है।



अपने कानूनी मुद्दे के लिए अनुभवी सिविल वकीलों से सलाह प्राप्त करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


कैविएट याचिका क्या है?

कैविएट एक कानूनी नोटिस है जो अदालत को यह सुनिश्चित करने के लिए दिया जाता है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई भी कार्यवाही शुरू करने से पहले उसे सुना जाए। 



कोर्ट में कैविएट याचिका कब दाखिल की जाती है?

जब किसी व्यक्ति को आशंका हो कि उसके खिलाफ कोई कोर्ट केस का फैसला या याचिका आने वाली है - जैसे स्टे लेने की कोशिश हो सकती है - तो वह पहले से कैविएट दाखिल कर देता है। ये याचिका आमतौर पर अपील, सिविल सूट या किसी विवाद से पहले डाली जाती है।



कैविएट कितने समय तक वैध रहती है?

कोर्ट में कैविएट दाखिल होने के बाद 90 दिन (3 महीने) तक वैध रहती है। अगर इस दौरान कोई याचिका नहीं आती, तो उसकी वैलिडिटी खत्म हो जाती है। ज़रूरत पड़ने पर आप दोबारा भी कैविएट फाइल कर सकते हैं।



क्या हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दाखिल हो सकती है?

हां, आप हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में कैविएट दाखिल कर सकते हैं, बशर्ते उस कोर्ट में आपका केस आने की आशंका हो। याचिका दायर करने की प्रक्रिया लगभग समान होती है।