क्या शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठे आरोप के लिए मानहानि का मुकदमा दायर किया जा सकता है
सवाल
मुझे हत्या की कोशिश के एक झूठे मामले में फंसाया गया और 13 दिनों तक जेल में रहना पड़ा, जबकि मैं घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं था। अब पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट से मेरा नाम हटा दिया है और मेरी बेगुनाही की पुष्टि कर दी है। मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ और इस घटना से मेरी साख को बहुत नुकसान पहुँचा है, तो क्या अब मैं उन कागजातों के आधार पर शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानि का केस कर सकता हूँ?
उत्तर (2)
हाँ, आप निश्चित रूप से उस व्यक्ति के खिलाफ मानहानि और झूठे आरोप लगाने के लिए कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं। चूंकि पुलिस ने खुद चार्जशीट (Charge Sheet) में यह मान लिया है कि आप निर्दोष थे और मौके पर मौजूद नहीं थे, इसलिए आपके पास अपनी बेगुनाही का सबसे मजबूत सरकारी दस्तावेज मौजूद है।
एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते 13 दिनों तक जेल (Custody) में रहना आपकी छवि के लिए बहुत नुकसानदायक है। आप भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत उस व्यक्ति पर आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) का मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही, आप दीवानी अदालत में अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए हर्जाना मांगने के लिए मानहानि का दावा भी पेश कर सकते हैं।
इसके अलावा, आप उस व्यक्ति के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) के लिए भी मामला दायर कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि उस व्यक्ति ने आपको जानबूझकर परेशान करने के इरादे से झूठे केस में फंसाया था। चूंकि पुलिस ने आपको क्लीन चिट दे दी है, इसलिए अदालत में यह साबित करना आसान होगा कि शिकायत पूरी तरह से फर्जी थी।
आप मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) में भी पुलिस की शुरुआती लापरवाही या गलत गिरफ्तारी के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। आपको एक अनुभवी वकील के माध्यम से अदालत में मानहानि की शिकायत पेश करनी चाहिए ताकि उस व्यक्ति को सजा मिल सके और आपको हुए मानसिक और सामाजिक नुकसान की भरपाई हो सके।
आप मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराते हैं या आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के लिए दीवानी मुकदमा भी दायर कर सकते हैं (केवल एक बार जब आप अदालत से बरी हो जाते हैं) और मानहानि का दावा करते हैं और आपके उत्पीड़न के लिए क्षतिपूर्ति का दावा किया जाता है। विकल्प में, आप किसी के खिलाफ चोट या आपराधिक मानहानि के लिए धारा 500 के तहत झूठे आरोप लगाने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के तहत भी मामला दर्ज कर सकते हैं।
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