पत्नी मायके जाकर दहेज और घरेलू हिंसा का केस कर रही है अपनी सेफ्टी के लिए क्या करें
सवाल
उत्तर (2)
पत्नी का घर छोड़कर जाना और मायके से 498A (दहेज) और DV Act (घरेलू हिंसा) का झूठा केस करना, आजकल दबाव बनाने का आम तरीका है। इस स्थिति में खुद को और अपने परिवार को कानूनी रूप से सुरक्षित रखने के लिए आपको तुरंत ये कदम उठाने चाहिए:
1. अग्रिम जमानत: चूंकि 498A एक गंभीर क्रिमिनल धारा है, इसलिए सबसे पहले अपने वकील के जरिए 'सेशन कोर्ट' से अपनी और अपने माता-पिता की अग्रिम जमानत ले लें। इससे पुलिस गिरफ्तारी का दबाव बिल्कुल खत्म हो जाएगा।
2. सेक्शन 9 (वापस बुलाने का केस): अपने बचाव के लिए तुरंत फैमिली कोर्ट में 'सेक्शन 9' का केस फाइल करें।
- इसमें कोर्ट को बताएं कि आप उसे साथ रखना चाहते हैं, लेकिन वह बिना कारण अपनी मर्जी से अलग रह रही है और पूरी सैलरी की गैर-वाजिब मांग कर रही है।
- यह केस साबित करेगा कि गलती आपकी नहीं है और 498A/DV Act के केस सिर्फ परेशान करने के लिए किए गए हैं।
3. झूठे केस को रद्द कराना: जब आपके पास पक्के सबूत (जैसे- WhatsApp चैट या कॉल रिकॉर्डिंग) हों कि वह अपनी मर्जी से मायके गई है और सिर्फ पैसे (पूरी सैलरी) ऐंठने के लिए झूठे केस कर रही है, तो आप अपने वकील के जरिए सीधे हाई कोर्ट में धारा 482 (CrPC) के तहत इन मुकदमों को रद्द करवाने की अर्जी लगा सकते हैं।
इस पूरी कानूनी लड़ाई में अग्रिम जमानत लेने, सेक्शन 9 का मजबूत केस फाइल करने और झूठी FIR को रद्द करवाने के लिए आप हमारे अनुभवी वकीलों से सीधे ऑनलाइन कानूनी सलाहले सकते हैं।
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सिविल कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- अगर कोई किसी भूमि पर सन् 1975 से झोपडी बना कर रह रहा और भूमिहीन है लेकिन उसका पुत्र वर्ष 2004 के बाद एक बिस्मिल+डेढ़ डिस्मिल की रजिस्ट्री द्वारा पट्टेदार बन गया फिर 2013 में पट्टेदार मृतक हो गया वारिसाना वारिसों के नाम नहीं हुआ है भूमि मृतक के नाम पर है और उक्त झोपडी का वास स्थान के तहत 3 डिस्मिल का पिता के रहते पुत्र जिसने एक+डेढ़=ढ़ाई डिस्मिल का रजिस्ट्री से पट्टेदार हो गया है एसडीएम से वर्ष 2015 में पटृटा करा लिया है और मृतक पट्टेदार के वारिस वारिसाना 2021-22 में कराने के बाद वास स्थान को कैंसिल करवाते हैं तो वास स्थान पर क्या असर पड़ेगा वास स्थान के तहत मिले पट्टे का संरक्षण कैसे किया जाएगा।
- मेरे पिताजी पाँच भाई थे। उनमें से एक बड़े चाचा की कोई संतान नहीं थी। परिवार में सभी भाइयों के बीच संपत्ति का बँटवारा हो चुका था। वर्ष 2006 में मेरे चाचा का निधन हो गया। अपने निधन से पहले उन्होंने अपनी संपत्ति और अपनी पत्नी, यानी मेरी बड़ी चाची की जिम्मेदारी मेरे पिताजी को सौंप दी थी। चाचा के निधन के बाद मेरी चाची ने अपनी पूरी जमीन मेरी माँ के नाम कर दी थी, लेकिन मकान अपने नाम पर ही रखा था। उन्होंने कोर्ट के माध्यम से एक वसीयत भी बनवाई थी, जिसमें लिखा था कि उनकी मृत्यु के बाद यह मकान मेरे पिताजी का हो जाएगा। लेकिन मेरे पिताजी का निधन वर्ष 2012 में ही हो गया, जबकि मेरी चाची का निधन वर्ष 2021 में हुआ। पिताजी के निधन के बाद मैंने अपनी माँ और चाची, दोनों को अपने पास रखा और लगभग 10–12 वर्षों तक शहर में किराए के मकान में उनके रहने, खाने-पीने, इलाज और अन्य सभी जरूरतों का ध्यान रखा। मैंने और मेरी पत्नी ने मिलकर चाची की पूरी सेवा की। हमारा पैतृक मकान हमारे गाँव में है। फिलहाल उस मकान में हम रहते हैं और बिजली का बिल भी मेरी माँ के नाम पर आता है। मेरी माँ अभी जीवित हैं। हम तीन भाई हैं और मैं स
- नमस्कार, दिवाणी दाव्यामध्ये प्रतिवादीचा सध्याचा पोस्टल पत्ता मिळत नसल्यामुळे कोर्टाची नोटीस/समन्स बजावण्यात अडचण येत आहे. कृपया प्रतिवादीचा पत्ता कायदेशीर मार्गाने शोधण्यासाठी आणि नोटीस/समन्स बजावण्यासाठी योग्य ती कायदेशीर प्रक्रिया करता येईल का, याबाबत मार्गदर्शन करावे. धन्यवाद.
- Namaste sir mera jo case Hai 2015 ka hai yah case close ho gaya hai aur yah jhutha case ka chakkar mein Hai ismein se naam hatwana hai kyunki mujhe clearance certificate banvane mein problem aati Hai application rejected ho jati h