क्या धारा 143 के तहत बदली गई जमीन का दाखिल खारिज कराना जरूरी है


सवाल

मैंने एक बिल्डर से प्लॉट खरीदा है जिसकी जमीन पहले से ही धारा 143 के तहत गैर-कृषि घोषित है। अब मुझे अपने प्लॉट का दाखिल खारिज कराना है, लेकिन बिल्डर का कहना है कि ऐसी जमीन के लिए इसकी जरूरत नहीं होती। मैं अपना नाम सरकारी रिकॉर्ड यानी भूलेख में कैसे दर्ज करा सकता हूँ और क्या बिल्डर की बात सही है?

उत्तर (4)


373 votes

नहीं, बिल्डर की यह बात बिल्कुल गलत है कि धारा 143 (Section 143) के तहत आने वाली जमीन के लिए दाखिल-खारिज (Mutation) की जरूरत नहीं होती। चाहे जमीन खेती की हो या उसे धारा 143 के तहत आवासीय (Residential) घोषित कर दिया गया हो, मालिकाना हक बदलने पर सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जब तक भूलेख में आपका नाम दर्ज नहीं होगा, तब तक आप उस जमीन के पूर्ण कानूनी मालिक नहीं माने जाएंगे।

धारा 143 का अर्थ केवल यह है कि उस जमीन का उपयोग (Land Use) बदल दिया गया है, यानी अब वह खेती की जमीन नहीं रही। लेकिन जमीन का उपयोग बदलने से 'दाखिल-खारिज' की जरूरत खत्म नहीं होती। दाखिल-खारिज वह प्रक्रिया है जिसके जरिए राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में पुराने मालिक यानी बिल्डर का नाम हटाकर आपका नाम चढ़ाया जाता है। इसके बिना आप भविष्य में उस प्लॉट को न तो बेच पाएंगे और न ही उस पर बैंक से ऋण (Loan) ले पाएंगे।

अपना नाम भूलेख (Bhulekh) में देखने के लिए आपको अपनी रजिस्ट्री (Sale Deed) के आधार पर तहसीलदार कोर्ट में दाखिल-खारिज का आवेदन देना होगा। रजिस्ट्री होने के बाद आमतौर पर यह प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाती है, लेकिन कई बार आपको खुद कचहरी जाकर इसे पूरा कराना पड़ता है। एक बार तहसीलदार का आदेश हो जाने के बाद पटवारी या लेखपाल सरकारी रजिस्टर में आपका नाम दर्ज कर देते हैं, जिसके बाद यह ऑनलाइन दिखने लगता है।

मेरी सलाह है कि आप बिल्डर की बातों में न आएं और तुरंत अपने क्षेत्र के लेखपाल या तहसीलदार दफ्तर से संपर्क करें। आपको यह भी जांचना चाहिए कि बिल्डर ने जिस 'पूरी जमीन' की बात की है, उसका नक्शा पास है या नहीं और क्या उस पर कोई बकाया टैक्स तो नहीं है। आप अपनी रजिस्ट्री की कॉपी लेकर किसी वकील के माध्यम से भी स्टेटस चेक करवा सकते हैं।

232 votes

यह बहुत भ्रमित करने वाला है। बिल्डर आम तौर पर सच नहीं बताते हैं और वे उस जमीन को बेचने की कोशिश करते हैं जो या तो विवादित संपत्ति है या कोई दोष है। तहसीलदार न्यायालय में जानकारी मांगी। मूल कागजात भी निकाल लें। संपत्ति का।

69 votes

यदि भूमि नगर निगम के अधिसूचित क्षेत्र से बाहर है तो नामांतरण अनिवार्य रूप से आवश्यक है। साथ ही यदि यह भूमि का एक बड़ा टुकड़ा है जो अविभाजित है तो उस स्थिति में आपके भूखंड की पहचान के लिए उत्परिवर्तन आवश्यक है।

151 votes

उपरोक्त प्रश्न पर बिल्डरों ने सही कहा कि 143 कार्यवाही के बाद म्यूटेशन की आवश्यकता नहीं है क्योंकि 143 कार्यवाही वाणिज्यिक या आवासीय उद्देश्य के रूप में फाइल की जाती है। इसलिए यदि आप तहसीलदार या अन्य निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष नामांतरण आवेदन दाखिल करते हैं, तो यह दिखाएं कि आवेदन अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया है, जबकि वह पूर्व में किए गए 143 को जानता है।


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