भारत में एक किरायेदार को कानूनी रूप से बेदखल करने में कितना समय लगता है यदि किरायेदार


सवाल

यदि मेरा किरायेदार समय पर किराया नहीं दे रहा है और बार-बार कहने के बाद भी बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रहा, तो भारत में उसे कानूनी रूप से बेदखल करने में कितना समय लगता है? क्या कोई ऐसी प्रक्रिया है जिससे किरायेदार को जल्दी निकाला जा सके और मुकदमे की कार्यवाही को तेज किया जा सके?

उत्तर (3)


54 votes

भारत में किरायेदार को बेदखल करने की समय अवधि पूरी तरह से मामले की परिस्थितियों और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर, एक बेदखली के मुकदमे (Eviction Suit) को अंतिम फैसले तक पहुँचने में 3 से 6 साल का समय लग सकता है। हालांकि, यदि आपके पास एक पंजीकृत किराया समझौता (Registered Rent Agreement) है और किरायेदार ने लगातार दो या तीन महीनों तक किराया नहीं दिया है, तो वह कानूनन चूककर्ता (Defaulter) माना जाता है और प्रक्रिया थोड़ी स्पष्ट हो जाती है।

कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत एक औपचारिक बेदखली नोटिस (Eviction Notice) भेजने से होती है। इस नोटिस में किरायेदार को बकाया किराया चुकाने या घर खाली करने के लिए आमतौर पर 15 से 30 दिनों का समय दिया जाता है। यदि किरायेदार इस अवधि में घर खाली नहीं करता, तो आपको दीवानी न्यायालय (Civil Court) में बेदखली और बकाया किराए की वसूली के लिए मुकदमा दायर करना होगा। मुकदमे के दौरान आपको यह साबित करना होगा कि किरायेदार ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है।

अदालती कार्यवाही में लगने वाले समय को कम करने के लिए आप न्यायालय के समक्ष त्वरित सुनवाई (Speedy Trial) के लिए प्रार्थना पत्र (Application) दायर कर सकते हैं। इसके अलावा, कई राज्यों में अब नए किराया कानून जैसे 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' (Model Tenancy Act) लागू किए जा रहे हैं, जो रेंट ट्रिब्यूनल के माध्यम से 60 दिनों के भीतर विवादों को सुलझाने का प्रावधान रखते हैं। यदि आपका मामला इन विशेष अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो बेदखली की प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है।

एक विशेषज्ञ वकील के माध्यम से आप अंतरिम आदेश (Interim Order) की भी मांग कर सकते हैं, जिसमें अदालत किरायेदार को निर्देश दे सकती है कि वह मुकदमे के लंबित रहने तक हर महीने का किराया अदालत में जमा कराए। इससे किरायेदार पर दबाव बनता है और वह मामले को बेवजह लंबा खींचने से बचता है। याद रखें कि कभी भी किरायेदार को जबरदस्ती या बिजली-पानी काटकर निकालने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे मामला आपके विरुद्ध जा सकता है।

138 votes

सबसे पहले यह जान लें कि किराएदार किराए के भुगतान में डिफाल्टर है या नहीं? किसी भी वकील को किसी मामले की समय अवधि के बारे में नहीं बताया जा सकता क्योंकि कार्यवाही में कोई निश्चितता नहीं है। आम तौर पर इसमें 3-7 साल लगते हैं। लेकिन अगर आप वास्तव में स्पीडी ट्रायल चाहते हैं तो आप अदालत के समक्ष ऐसी याचिका दायर कर सकते हैं। धन्यवाद।

273 votes

कोई भी सटीक समय नहीं कहता है, लेकिन अगर वह किराएदार किराए और रखरखाव के भुगतान का डिफाल्टर है और यदि आपको उचित रूप से संपत्ति की आवश्यकता है तो यह समय है जब आप निश्चित रूप से केस जीतेंगे। आपको उचित न्यायाधीश के समक्ष दीवानी मुकदमा दायर करने के बाद किरायेदार को बेदखली नोटिस भेजना होगा


अस्वीकरण: इस पृष्ठ का अनुवाद Google Translate की मदद से किया गया है। इसमें कुछ अंश या संपूर्ण अनुवादित लेख गलत हो सकता है क्योंकि सटीकता के लिए किसी वकील द्वारा इसकी जाँच नहीं की गई है। कोई भी व्यक्ति या संस्था जो इस अनुवादित जानकारी पर निर्भर है, वह ऐसा अपने जोखिम पर करता है। LawRato.com अनुवादित जानकारी की सटीकता, विश्वसनीयता, अस्पष्टता, चूक या समयबद्धता पर निर्भरता के कारण होने वाले किसी भी नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अपने स्वयं के कानूनी मामले के लिए किसी भी निर्णय लेने के लिए अपने वकील से जांच और पुष्टि कर सुनिश्चित करें।

अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


भारत के अनुभवी मकान मालिक किरायेदार वकीलों से सलाह पाए


मकान मालिक किरायेदार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न