क्या पिता और भाई द्वारा बेची गई पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री रद्द हो सकती है


सवाल

मैं राजस्थान का निवासी हूँ और हमारी एक पुश्तैनी जमीन थी जिसे मेरे पिता और भाई ने मिलकर ३ महीने पहले बेच दिया है। सरकारी रिकॉर्ड यानी जमाबंदी में भी खरीदार का नाम दर्ज हो चुका है। वह जमीन मेरे दादा जी की थी और मैं परिवार की तीसरी पीढ़ी हूँ। घर वालों ने मुझे हिस्सा देने के बजाय घर से बाहर निकाल दिया है। क्या मैं बिना मेरी सहमति के बेची गई इस जमीन की रजिस्ट्री को अदालत के माध्यम से खारिज करवा सकता हूँ?

उत्तर (2)


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हाँ, आप इस जमीन की रजिस्ट्री को अदालत के माध्यम से चुनौती दे सकते हैं और इसे रद्द करवा सकते हैं। हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार, पुश्तैनी संपत्ति (Ancestral Property) में जन्म लेते ही पुत्र या पुत्री का हिस्सा तय हो जाता है। चूंकि यह जमीन आपके दादा जी की थी, इसलिए इसमें आपका अधिकार जन्मजात है और आपके पिता या भाई आपकी सहमति के बिना आपका हिस्सा किसी और को नहीं बेच सकते।

राजस्थान में लागू कानूनों के अनुसार, आप दीवानी न्यायालय (Civil Court) में रजिस्ट्री रद्द करने का मुकदमा (Suit for Cancellation of Sale Deed) दायर कर सकते हैं। इसके साथ ही आपको उसी अदालत में जमीन के बंटवारे (Partition Suit) के लिए भी आवेदन करना चाहिए। चूंकि खरीदार का नाम जमाबंदी में चढ़ चुका है, इसलिए आपको तुरंत अदालत से स्थगन आदेश (Stay Order) की मांग करनी चाहिए ताकि वह खरीदार उस जमीन को आगे किसी और को न बेच सके।

आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि कानून में पिता को केवल 'कानूनी आवश्यकता' जैसे कि गंभीर बीमारी या पूरे परिवार के भले के लिए ही ऐसी जमीन बेचने का अधिकार है। यदि उन्होंने आपकी हिस्सेदारी को खत्म करने के लिए या बिना किसी ठोस कारण के जमीन बेची है, तो अदालत उस बिक्री को आपके हिस्से की हद तक अवैध घोषित कर सकती है। जमाबंदी में नाम चढ़ जाना मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं है, यदि मूल रजिस्ट्री ही अवैध पाई जाती है तो सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया जाता है।

इसके अतिरिक्त, क्योंकि आपको घर से बेदखल कर दिया गया है, आप 'भरण-पोषण और माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण अधिनियम' के तहत भी अपने अधिकारों की मांग कर सकते हैं। आपको तुरंत किसी स्थानीय वकील के माध्यम से खरीदार और अपने परिवार को कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजना चाहिए।

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सबसे पहले पुश्तैनी संपत्ति को आपकी सहमति और हस्ताक्षर के बिना दूसरे को नहीं बेचा जा सकता है
भले ही संपत्ति आपके पिता के नाम पर पंजीकृत हो जो आपके दादाजी से अर्जित की गई हो
भी संपत्ति में समान अधिकार हैं


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