पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच संपत्ति का बंटवारा कैसे करें


सवाल

मेरे पिता का निधन 30 साल पहले हो गया था, लेकिन अभी तक संपत्ति का बंटवारा नहीं हुआ है। मेरा बड़ा भाई इस मामले को जानबूझकर लटकाए रखना चाहता है और बंटवारे की बात नहीं कर रहा है। क्या कानून में ऐसा कोई तरीका है जिससे बड़े भाई पर संपत्ति विभाजन के लिए दबाव बनाया जा सके और मैं अपना कानूनी हिस्सा प्राप्त कर सकूँ?

उत्तर (3)


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हाँ, कानून के अनुसार आप अपने बड़े भाई पर संपत्ति के बंटवारे के लिए कानूनी दबाव बना सकते हैं। हिंदू कानून के तहत, पिता की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर उनके सभी बच्चों का बराबर का अधिकार होता है। संपत्ति का बंटवारा कितने समय से लंबित है, इससे आपके अधिकार खत्म नहीं होते हैं। यदि आपसी बातचीत से समाधान नहीं निकल रहा है, तो आप कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।

सबसे पहले आपको अपने भाई को एक औपचारिक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजना चाहिए। इसमें आपको स्पष्ट करना होगा कि आप संपत्ति में अपना हिस्सा चाहते हैं और उन्हें बंटवारे के लिए एक निश्चित समय देना होगा। अक्सर कानूनी नोटिस मिलने के बाद लोग अदालती कार्यवाही के डर से आपसी सहमति से बंटवारा करने को तैयार हो जाते हैं।

यदि नोटिस का कोई असर नहीं होता है, तो आप दीवानी अदालत में बंटवारे का मुकदमा (Partition Suit) दायर कर सकते हैं। इस मुकदमे के जरिए अदालत संपत्ति का निरीक्षण करेगी और कानून के अनुसार आपका हिस्सा तय कर देगी। आप कोर्ट से यह भी मांग कर सकते हैं कि जब तक केस चल रहा है, तब तक भाई संपत्ति को न तो बेच सके और न ही उसमें कोई बड़ा बदलाव करे। इसके लिए कोर्ट 'यथास्थिति' (Status Quo) का आदेश जारी कर सकता है।

अदालत का फैसला आने के बाद, उस आदेश के आधार पर आप सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं जिसे नामांतरण (Mutation) कहा जाता है। याद रखें कि देरी करने से केवल विवाद बढ़ता है, इसलिए बेहतर होगा कि आप जल्द से जल्द कानूनी प्रक्रिया शुरू करें ताकि भविष्य में आपके बच्चों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

191 votes

हां, पिता और माता के जीवित न होने पर ही कानून द्वारा छोटे और बड़े भाइयों के बीच संपत्ति के बंटवारे का दबाव बनाया जा सकता है। छोटा भाई बँटवारे के लिए न्यायालय में वाद दायर कर सकता है और न्यायालय के आदेश से बँटवारे के लिए आगे बढ़ सकता है।

156 votes

हां..आप अपने भाई के खिलाफ विभाजन का मुकदमा दायर कर सकते हैं। उससे पहले मुझे यह जानना है कि आपके पिता की मृत्यु वसीयत में हुई या निर्वसीयत हुई? आपके कितने भाई बहन हैं? क्या यह रहने का घर है? तुम्हारी माँ जीवित है? आपको उचित उपाय देने के लिए मुझे इन उत्तरों को जानने की आवश्यकता है


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