कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहे तो क्या करें


सवाल

मेरी बहन के पति अपनी पुश्तैनी जमीन किसी बाहरी व्यक्ति को बेच रहे हैं जबकि मेरी बहन की एक बेटी भी है और उसका उस संपत्ति में अधिकार बनता है। हमने अदालत से उस जमीन की बिक्री और निर्माण पर स्टे ऑर्डर ले लिया है लेकिन विपक्षी पार्टी आदेश को नहीं मान रही है और वहां लगातार काम करवा रही है। मैं जानना चाहता हूं कि स्टे ऑर्डर का सख्ती से पालन करवाने के लिए मुझे क्या कानूनी कदम उठाने चाहिए?

उत्तर (3)


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यह अदालत के आदेश की सीधी 'अवमानना' (Contempt of Court) है। जब कोर्ट किसी संपत्ति पर 'स्थगन आदेश' (Stay Order) देता है, तो उसका मतलब है कि वहां की स्थिति जस की तस रहनी चाहिए। आदेश न मानना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए आप विपक्षी को जेल भी भिजवा सकते हैं।

आपको तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

  1. पुलिस को सूचित करें: सबसे पहले आप स्टे ऑर्डर की 'प्रमाणित प्रति' (Certified Copy) लेकर संबंधित पुलिस थाने जाएं। एसएचओ (SHO) को लिखित शिकायत दें कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। यद्यपि पुलिस दीवानी मामलों में सीधे दखल नहीं देती, लेकिन अगर शांति भंग होने का खतरा है या कोर्ट के आदेश की अवहेलना हो रही है, तो पुलिस काम रुकवा सकती है। आप मौके की फोटो और वीडियो बनाकर पुलिस को दिखाएं।

  2. कोर्ट में अवमानना याचिका: अगर पुलिस की बात भी नहीं सुनी जा रही है, तो आपको तुरंत उसी कोर्ट में जाना होगा जिसने स्टे दिया था। अपने वकील के जरिए 'सिविल प्रक्रिया संहिता' (Civil Procedure Code - CPC) के आदेश 39 नियम 2A के तहत एक आवेदन लगाएं। इसे 'उल्लंघन की अर्जी' (Application for Breach of Injunction) कहते हैं।

  3. संपत्ति की कुर्की और जेल: इस आवेदन में आप कोर्ट को सबूत (फोटो/वीडियो) दें। अगर कोर्ट पाता है कि विपक्षी जानबूझकर आदेश नहीं मान रहा है, तो कोर्ट उसकी संपत्ति को 'कुर्क' (Attach) करने का आदेश दे सकता है और उसे तीन महीने तक के लिए 'सिविल जेल' (Civil Prison) में भेजने का आदेश भी दे सकता है।

  4. पुलिस सहायता आदेश: आप कोर्ट से धारा 151 के तहत 'पुलिस सहायता' (Police Aid) की मांग भी कर सकते हैं। इसके बाद कोर्ट थानेदार को सख्त निर्देश देगा कि पुलिस बल भेजकर काम रुकवाया जाए और आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।

187 votes

यदि न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश पहले ही पारित किया जा चुका है और उसका पालन नहीं किया जा रहा है तो आप अवमाननाकर्ता के विरुद्ध उच्च न्यायालय में दीवानी अवमानना का मामला दायर कर सकते हैं। उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने से पहले आपको एक पुलिस शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए और पुलिस को सूचित करना चाहिए और अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहना चाहिए।

153 votes

मेरी बहनों के पति अपनी पारिवारिक संपत्ति (एकड़ में जमीन) बेच रहे हैं। दूसरे व्यक्ति को। मेरी बहन उस समय और वर्तमान में भी अपने पति के साथ नहीं रह रही है। मेरी बहन की एक बेटी है इसलिए हम अदालत द्वारा तय करने के लिए उस संपत्ति की जमीन के बारे में स्थगन आदेश देते हैं। लेकिन वह व्यक्ति जमीन में काम करना जारी रखता है। इसलिए कृपया मुझे एक सुझाव दें आदरणीय यदि यह उसकी खुद की अर्जित संपत्ति थी, तो आपकी बहन उक्त संपत्ति पर दावा नहीं कर सकती। अगर यह पैतृक संपत्ति थी तो उसके बच्चे बालिग होने पर ही उस पर दावा कर सकते हैं। उपरोक्त समस्या में आपने यह उल्लेख नहीं किया है कि संपत्ति स्वयं अर्जित संपत्ति है या संपत्ति संयुक्त नाम या पैतृक संपत्ति में खरीदी गई थी। केवल अगर यह पारिवारिक संपत्ति थी, या संयुक्त स्वामित्व संपत्ति थी, तो केवल आपकी बहन को दावा करने का अधिकार है। यहां तक कि अगर उक्त संपत्ति की खरीद के लिए उसका योगदान है और अगर उसके पास उक्त संपत्ति की खरीद के लिए योगदान दिखाने का सबूत है, तो ऐसी परिस्थितियों में वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।


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