अपने घर को पत्नी के नाम पर ट्रांसफर करने का सबसे सस्ता तरीका क्या है
सवाल
उत्तर (4)
हाँ, अपनी संपत्ति को पत्नी के नाम पर ट्रांसफर करने का सबसे सस्ता और बेहतर तरीका उपहार विलेख (Gift Deed) तैयार करना है। जब आप अपनी कोई संपत्ति किसी करीबी रिश्तेदार, जैसे कि पत्नी, को उपहार में देते हैं, तो कई राज्यों में सरकार स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) में भारी छूट देती है। यह खर्चा सामान्य बिक्री विलेख (Sale Deed) के मुकाबले बहुत कम होता है।
उपहार विलेख के माध्यम से संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए आपको एक वकील की मदद से दस्तावेज तैयार करवाना होगा और उसे उप-पंजीयक (Sub-Registrar) के दफ्तर में पंजीकृत करवाना अनिवार्य है। हालांकि कुछ राज्यों में खून के रिश्तों या जीवनसाथी के लिए स्टाम्प ड्यूटी केवल कुछ हजार रुपये या कुल मूल्य का 1% से 2% ही होती है, जबकि सामान्य सेल डीड में यह 5% से 8% तक जा सकती है।
दूसरा तरीका हक त्याग विलेख (Relinquishment Deed) हो सकता है, लेकिन यह केवल तब काम आता है जब आपकी पत्नी पहले से ही उस संपत्ति में सह-मालिक (Co-owner) हों। यदि संपत्ति पूरी तरह से आपके अकेले के नाम पर है, तो उपहार विलेख ही सबसे सही विकल्प है। इसमें ध्यान रखने वाली बात यह है कि एक बार उपहार देने के बाद आप उसे वापस नहीं ले सकते, वह संपत्ति कानूनी रूप से आपकी पत्नी की हो जाएगी।
आयकर (Income Tax) के नजरिए से भी पति द्वारा पत्नी को दिया गया उपहार टैक्स के दायरे से बाहर होता है। हालांकि, यदि उस घर से कोई किराया आता है, तो वह किराया आपकी ही आय में जोड़ा जाएगा। आपको बस स्टाम्प पेपर का खर्चा और कोर्ट की रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपको नगर निगम या तहसील में जाकर दाखिल-खारिज (Mutation) भी करवाना चाहिए ताकि सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज हो जाए।
यदि आप घर को अपनी पत्नी के नाम पर स्थानांतरित करना चाहते हैं, तो इसमें संपत्ति के पूरे मूल्य पर स्टैंप ड्यूटी शामिल होगी। दो अन्य तरीके हैं जिनके द्वारा संपत्ति को आपकी पत्नी के नाम पर स्थानांतरित किया जा सकता है। (1) पंजीकृत उपहार विलेख के माध्यम से अपनी पत्नी को संपत्ति का उपहार देकर। इस मामले में देय स्टाम्प शुल्क संपत्ति के सामान्य हस्तांतरण में देय स्टाम्प शुल्क की तुलना में बहुत कम होगा। (2) अपनी पत्नी के पक्ष में वसीयत बनाकर। यहां किसी भी तरह की स्टांप ड्यूटी के भुगतान की कोई आवश्यकता नहीं है। इस मामले में वसीयत आपके निधन पर ही प्रभावी होगी, इससे पहले नहीं।
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