कोर्ट का नोटिस मिलने के बाद भी अगर पत्नी अदालत न आए तो क्या होगा
सवाल
मैंने अपनी पत्नी के खिलाफ दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए केस दर्ज किया है। कोर्ट ने अब तक तीन तारीखें दी हैं, लेकिन मेरी पत्नी एक बार भी अदालत में हाजिर नहीं हुई हैं। क्या कोर्ट उनकी अनुपस्थिति में कोई कड़ा फैसला ले सकता है? अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही क्या होगी और मुझे क्या कदम उठाने चाहिए?
उत्तर (3)
अगर कोर्ट से बार-बार नोटिस मिलने के बाद भी प्रतिवादी (Opposite Party) यानी आपकी पत्नी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हो रही हैं, तो कानून आपको एकतरफा कार्यवाही का अधिकार देता है। ऐसी स्थिति में जज आपकी पत्नी को अनुपस्थित मानकर उनके खिलाफ एकतरफा आदेश (Ex-parte Order) जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि कोर्ट केवल आपके पक्ष और सबूतों को सुनकर ही फैसला सुना देगा।
इस प्रक्रिया के अगले चरण में, आपके वकील को अदालत से यह मांग करनी चाहिए कि मामले को एकतरफा (Ex-parte) घोषित किया जाए। इसके बाद आपको अपना साक्ष्य शपथ पत्र (Affidavit of Evidence) जमा करना होगा। कोर्ट आपको गवाही देने के लिए बुलाएगा (Witness Box) और आपके द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की जांच करेगा। चूंकि वहां आपका विरोध करने वाला कोई नहीं होगा, इसलिए आपके दावों को सच मानकर जज अपना फैसला (Judgment) सुरक्षित रख लेंगे।
अंत में, कोर्ट आपके पक्ष में दांपत्य अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) की डिक्री जारी कर सकता है। इस आदेश के जरिए कोर्ट आपकी पत्नी को निर्देश देगा कि वह वापस आकर आपके साथ रहें। यदि इस आदेश के बाद भी वह वापस नहीं आती हैं, तो भविष्य में यह आपके लिए तलाक (Divorce) लेने का एक बहुत मजबूत आधार बन सकता है।
मेरी सलाह है कि आप अपने वकील के माध्यम से अगली तारीख पर कोर्ट से निवेदन करें कि विपक्षी पक्ष को अब और समय न दिया जाए। कोविड या अन्य कारणों का बहाना एक सीमा तक ही मान्य होता है। यदि नोटिस की तामील (Service of Summons) सही ढंग से हो चुकी है, तो कोर्ट को फैसला लेने से कोई नहीं रोक सकता।
उसे प्रतिवादी को एकपक्षीय के रूप में रखना चाहिए और आपके वकील को अपना हलफनामा साक्ष्य दाखिल करके अवसर हड़पने के लिए बुद्धिमान होना चाहिए। फिर आपको विटनेस बॉक्स में डाल दिया जाएगा और आपके दस्तावेजों पर निशान लगा दिया जाएगा फिर उस पर जजमेंट पोस्ट किया जाएगा। आशा है कि आपको शीघ्र ही एकपक्षीय निर्णय प्राप्त होगा।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
परिवार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- सर, हमारे दादाजी अलग हैं, गोत्र अलग है और पूरा खानदान अलग है। मेरी दादी और लड़के की दादी सगी बहनें थीं, लेकिन वे अलग-अलग परिवारों में ब्याही गई थीं। क्या हिंदू मैरिज एक्ट (HMA, 1955) के तहत हमारी शादी कानूनी तौर पर वैध (Valid) है?" [HMA, 1955]
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- Ji mera name hiralal hai or mujhe document problem hai main surat Sahar main raheta hu leki main janm Uttar Pradesh main hua hai or vaha par mera name nimar tha lekin surat ke sabhi document main Hiralal hai lekin kheti ke dastavej main nimar hai ise sahi kese karu or abhi sir fom bhi fara ja raha hai or main problem main hu ki kis main aapna name sahi karu sath main papa ka name main bhi problem hai main surat main hi hu or sabhi document main bhi hiralal kada hai liki kheti ka dastavej main nimar hai Please help me