कोर्ट से तलाक का केस खारिज होने के बाद पति दोबारा दाखिल कर सकता है याचिका


सवाल

क्रूरता और परित्याग के आधार पर दायर किया गया तलाक का केस कोर्ट ने खारिज कर दिया है। क्या दो साल बीत जाने के बाद पति फिर से तलाक की याचिका डाल सकता है? इस बीच पत्नी ने गुजारा भत्ता पाने के लिए नया मामला दर्ज कराया है, ऐसी स्थिति में कानूनी सुझाव दें।

उत्तर (3)


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हाँ, पति दोबारा तलाक की याचिका (Divorce Petition) दायर कर सकता है, लेकिन वह उन्हीं पुराने आधारों पर केस नहीं लड़ सकता जो कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। कानून के अनुसार, यदि एक बार कोर्ट ने किसी मामले का फैसला कर दिया है, तो उसी कारण (Cause of Action) पर दोबारा मुकदमा नहीं किया जा सकता। इसे कानून में 'प्राङन्याय' (Res Judicata) का सिद्धांत कहते हैं।

तलाक की दूसरी याचिका दायर करने के लिए पति को नए आधार या नई घटनाओं का प्रमाण देना होगा जो पिछली याचिका खारिज होने के बाद घटी हों। उदाहरण के लिए, यदि पिछले दो वर्षों में पत्नी ने पति के साथ रहने से लगातार मना किया है या कोई नई क्रूरता (Cruelty) की है, तो इसे नया आधार माना जा सकता है। परित्याग (Desertion) के मामले में भी, यदि अलग रहने की अवधि पिछले केस के बाद और बढ़ गई है, तो नई याचिका दाखिल की जा सकती है।

जहाँ तक पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए भरण-पोषण (Maintenance) के मामले का सवाल है, वह कानूनन पति से अपना खर्चा पाने की हकदार है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 (पुरानी धारा 125 CrPC) के तहत, भले ही तलाक का केस खारिज हो गया हो, पति अपनी पत्नी को सहारा देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होता। कोर्ट पति की आय और पत्नी की जरूरतों के आधार पर गुजारा भत्ता तय करेगा।

पति के लिए बचाव के कुछ तरीके इस प्रकार हो सकते हैं:

1. साथ रहने का प्रस्ताव: यदि पति अपनी पत्नी को साथ रखना चाहता है, तो वह दाम्पत्य अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) के लिए याचिका दायर कर सकता है। यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के साथ रहने से मना करती है, तो यह भविष्य में तलाक के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है।

2. आय का विवरण: गुजारा भत्ता के मामले में, पति को अपनी वास्तविक आय और देनदारियों का सही विवरण कोर्ट में देना चाहिए ताकि कोर्ट अत्यधिक राशि तय न करे।

3. समझौते का प्रयास: यदि दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझने की संभावना नहीं है, तो आपसी सहमति (Mutual Consent) से तलाक लेना सबसे बेहतर विकल्प होता है। इससे समय और अदालती खर्च दोनों की बचत होती है।

तलाक के दोबारा दाखिल मामले में कोर्ट बहुत बारीकी से जांच करता है कि कहीं यह पत्नी को परेशान करने के लिए तो नहीं किया गया है। इसलिए, नई याचिका केवल ठोस और कानूनी रूप से मान्य नए आधारों पर ही दायर की जानी चाहिए।

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नमस्ते, सबसे पहले मैं आपको सलाह देता हूं कि आप हमसे व्यक्तिगत रूप से परामर्श करें क्योंकि ऐसे मामले बेहद जटिल होते हैं और वकील को आपको सटीक कानूनी सलाह प्रदान करने से पहले प्रत्येक तथ्य की विस्तार से समीक्षा करने की आवश्यकता होती है। हां, पति एक और तलाक याचिका दायर कर सकता है लेकिन उसके पास वैध आधार होने चाहिए। और पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। जल्द से जल्द समाधान के लिए, मेरा सुझाव है कि आप सभी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक जानकारी के साथ हमसे व्यक्तिगत रूप से परामर्श करें। धन्यवाद

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ऐसे में पति उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है और अगर वह भरण-पोषण का मामला दायर करती है तो आप लड़ सकते हैं। आपको उसके और मामले दर्ज करने के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उसे पीड़ित होने दें और तुरंत अपील के लिए जाएं।


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