अकाउंट ब्लॉक होने पर चेक बाउंस होने पर क्या कार्रवाई की जा सकती है
सवाल
उत्तर (6)
जब चेक 'खाता अवरुद्ध' (Account Blocked) टिप्पणी के साथ बाउंस होता है, तो इसे 'अपर्याप्त निधि' (Insufficient Funds) के समान ही माना जाता है, और आप चेक जारी करने वाले (Drawer) के खिलाफ NI Act की धारा 138 के तहत कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
कानूनी आधार: उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चेक बाउंस होने का कारण यदि 'खाता बंद होना' (Account Closed), 'खाता ब्लॉक होना' (Account Blocked) या 'हस्ताक्षर बेमेल' (Signature Mismatch) है, तो इन सभी को चेक के अनादर (Dishonour) के लिए पर्याप्त माना जाता है। ये सभी स्थितियाँ जारी करने वाले की लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण इरादे को दर्शाती हैं, इसलिए धारा 138 लागू होती है।
चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया
आपको निम्नलिखित सख्त कानूनी समय-सीमाओं का पालन करते हुए कार्रवाई करनी होगी:
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अनादरण मेमो (Dishonour Memo) प्राप्त करना:
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बैंक से तुरंत मूल चेक (Original Cheque) और अनादरण मेमो (रिटर्न मेमो) प्राप्त करें।
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समय सीमा: चेक को बाउंस होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर बैंक में फिर से जमा किया जा सकता है, यदि आप यह प्रयास नहीं करना चाहते हैं, तो तुरंत अगले चरण पर बढ़ें।
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कानूनी नोटिस जारी करना:
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चेक बाउंस होने के (या रिटर्न मेमो की) तारीख से 30 दिनों के भीतर, आपको अपने वकील के माध्यम से चेक जारी करने वाले को एक कानूनी नोटिस भेजना होगा।
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नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि चेक किस ऋण के लिए दिया गया था, चेक बाउंस हो गया है, और उन्हें नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा।
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आपराधिक शिकायत दर्ज करना (धारा 138):
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यदि चेक जारी करने वाला नोटिस प्राप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो आपके पास कार्रवाई करने का आधार बन जाता है।
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समय सीमा: आपको 15 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद अगले 30 दिनों के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Magistrate Court) में धारा 138 के तहत आपराधिक शिकायत (Criminal Complaint) दर्ज करनी होगी।
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धोखाधड़ी का मामला (BNS धारा 318):
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आप चाहें तो BNS धारा 318 (जो पहले IPC 420 थी) के तहत धोखाधड़ी (Cheating) का मामला भी दर्ज कर सकते हैं, विशेषकर तब जब 'खाता अवरुद्ध' होने का अर्थ यह है कि चेक जानबूझकर भुगतान न करने के इरादे से दिया गया था। यह धारा 138 के समानांतर चल सकता है और आरोपी पर अतिरिक्त दबाव बना सकता है।
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समय सीमा का पालन करना इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण है, अन्यथा आपका कानूनी अधिकार समाप्त हो जाएगा।
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के प्रावधान के तहत यह एक अपराध है, यह एक बहुत ही तकनीकी मामला है जिसमें आपको चेक के अनादरण की तारीख से 15 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजना होता है और उसके बाद आपको उसी के लिए शिकायत पेश करनी होती है। 30 दिनों के भीतर अदालत में, इस मामले में समय न चूकें अन्यथा आपको इसकी वसूली के लिए शुल्क का भुगतान करना होगा।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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