कंज्यूमर कोर्ट और कंज्यूमर फोरम में क्या अंतर है


सवाल

मैं यह जानना चाहता हूँ कि उपभोक्ता न्यायालय और उपभोक्ता मंच में क्या अंतर होता है? उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है, क्या इसके लिए कोई फीस देनी पड़ती है और मामला दर्ज होने के बाद कितनी बार कोर्ट जाना पड़ता है?

उत्तर (4)


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उपभोक्ता न्यायालय और उपभोक्ता मंच में असल में कोई कानूनी अंतर नहीं है। बोलचाल की भाषा में जिसे लोग कंज्यूमर कोर्ट कहते हैं, उसे ही कानून में कंज्यूमर फोरम कहा जाता था। अब नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के आने के बाद इन्हें उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) कहा जाता है। ये जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं।

उपभोक्ता अदालत में केस दर्ज करना काफी सरल है। आप खुद या अपने वकील के माध्यम से अपनी शिकायत लिखित रूप में दे सकते हैं। शिकायत में आपको बताना होगा कि आपने क्या सामान या सेवा खरीदी थी, उसमें क्या कमी थी और उससे आपको क्या नुकसान हुआ। आप ऑनलाइन माध्यम से 'ई-दाखिल' पोर्टल पर भी अपनी शिकायत घर बैठे दर्ज करा सकते हैं।

जहाँ तक फीस का सवाल है, यदि आपकी शिकायत 5 लाख रुपये तक की है, तो इसके लिए आपको कोई अदालती शुल्क यानी कोर्ट फीस (Court Fee) नहीं देनी पड़ती। 5 लाख से अधिक की राशि के दावों के लिए एक मामूली शुल्क तय किया गया है जो दावे की रकम के हिसाब से बढ़ता है। यह फीस डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर के जरिए जमा की जा सकती है।

मामला दर्ज होने के बाद आपको हर सुनवाई पर मौजूद रहना जरूरी नहीं होता, यदि आपने वकील नियुक्त किया है। हालांकि, साक्ष्य दर्ज कराने या किसी विशेष स्पष्टीकरण के लिए अदालत आपको बुला सकती है। सामान्य तौर पर एक उपभोक्ता मामले को सुलझने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है, लेकिन यह मामले की जटिलता पर भी निर्भर करता है।

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डियर सर/मैडम, कंज्यूमर कोर्ट और कंज्यूमर फोरम में कोई फर्क नहीं है, एक ही है। राहत पाने के लिए आपको उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत याचिका दायर करनी होगी। आपको निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा और अपने पक्ष के वकील को नियुक्त करके सुनवाई की प्रत्येक तिथि को उक्त अदालत/मंच में उपस्थित होना होगा।

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प्रिय प्रश्नकर्ता, सही शब्द कंज्यूमर फोरम है न कि कंज्यूमर कोर्ट, लेकिन लोग बार-बार कोर्ट का इस्तेमाल करते हैं जो सही नहीं है, हालांकि कंज्यूमर फोरम के पास कोर्ट की सभी शक्तियां हैं। उपभोक्ता फोरम के लिए नाममात्र का न्यायालय शुल्क लागू है। आमतौर पर स्थगन एक से डेढ़ महीने के लिए दिया जाता है। पक्ष को हर सुनवाई में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है, आमतौर पर अधिवक्ता ग्राहक की ओर से अदालत में प्रतिनिधित्व करता है। सादर, प्रताप

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यह एक ही है। आपको अपने तथ्यों, पूरी घटना को विस्तार से तैयार करना होगा और इसे उपभोक्ता फोरम फाइलिंग डिवीजन के समक्ष दर्ज करना होगा, और उसके बाद आपको पहली सुनवाई/स्वीकृति की तारीख दी जाएगी। पहली सुनवाई की तारीख को जब आपके मामले को बुलाया जाएगा तो आपको उपस्थित होने और अपने मामले के तथ्यों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी। अगर अदालत को लगता है कि आपके मामले में योग्यता है तो वह इसे स्वीकार करेगी और आगे का सहारा लेगी। इनसे निपटने में आपकी मदद करने के लिए एक वकील को नियुक्त करना बेहतर है क्योंकि कई तकनीकी पहलू हैं और एक वकील को नियुक्त करना आपको एक तेज और बेहतर उपाय दे सकता है।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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