बिना अपराध आजीवन कारावास की सजा होने पर हाई कोर्ट में अपील और जमानत की प्रक्रिया क्या है


सवाल

मेरे पिता और भाई को पुरानी दुश्मनी के चलते झूठे केस में फंसाया गया है और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, जबकि एफआईआर में उनका नाम तक नहीं था। क्या इस स्थिति में हाई कोर्ट से जमानत मिल सकती है? अपील करने के लिए कितना समय मिलता है और क्या वृद्धावस्था या बीमारी के आधार पर सजा कम हो सकती है?

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निचली अदालत से सजा होने के बाद भी आपके पास हाई कोर्ट में न्याय मांगने के पूरे रास्ते खुले हैं। कानून में प्रावधान है कि अगर निचली अदालत के फैसले में कोई चूक हुई है या सबूतों को गलत तरीके से परखा गया है, तो हाई कोर्ट उस फैसले को पलट सकता है या सजा को निलंबित कर सकता है।

सबसे पहले अपील की समय सीमा की बात करें, तो सत्र न्यायालय (Sessions Court) द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने के लिए आमतौर पर 60 से 90 दिनों का समय मिलता है। हालांकि, यदि किसी वाजिब कारण से देरी हो जाती है, तो देरी माफी (Condonation of Delay) की अर्जी के साथ अपील बाद में भी दाखिल की जा सकती है। आपको बिना समय गवाएं तुरंत अपील दाखिल करनी चाहिए।

जमानत के संबंध में, अपील लंबित रहने के दौरान आप भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 430 के तहत सजा के निलंबन (Suspension of Sentence) और जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं (पुराने कानून में यह धारा 389 CrPC थी)। चूंकि आपके पिता और भाई का नाम एफआईआर में नहीं था, यह आपके केस का बहुत मजबूत बिंदु है। अगर आप हाई कोर्ट को यह समझाने में सफल रहते हैं कि उन्हें केवल संदेह या रंजिश के आधार पर सजा हुई है और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, तो कोर्ट अपील पर अंतिम फैसला आने तक उन्हें जमानत दे सकता है।

जहाँ तक वृद्धावस्था और बीमारी का सवाल है, ये आधार सजा को पूरी तरह खत्म तो नहीं करते, लेकिन जमानत मिलने में बहुत मददगार साबित होते हैं। यदि कोई कैदी गंभीर रूप से बीमार है या बहुत वृद्ध है, तो मानवीय आधार पर अदालतें उन्हें राहत देने में नरमी बरतती हैं। साथ ही, अगर उनकी उम्र और स्वास्थ्य जेल की सजा काटने लायक नहीं है, तो वकील इस आधार पर सजा को कम करने या पैरोल (Parole) दिलाने की प्रार्थना भी कर सकते हैं।

आपका सबसे पहला कदम अनुभवी वकील के जरिए निचली अदालत के फैसले की कॉपी (Judgment Copy) निकालकर हाई कोर्ट में अपील और सजा निलंबन की अर्जी लगाना होना चाहिए।

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हेलो सर यदि बिना अपराध आप को सजा सुनाई गई है तो आप राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ले सकते हैं और आप आपको रख सकते हैं कोई एविडेंस है जो आपको कोर्ट में देनी है वह आप दे सकते हैं और आप इसमें जल्द से जल्द पैरोल लगाइए या जो भी काम पेश कीजिए


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