पैरोल और प्रोबेशन क्या होते हैं? दोनों में अंतर, अवधि और कानूनी नियम
जब कोई व्यक्ति किसी अपराध का दोषी पाया जात है, तो अदालत द्वारा उस व्यक्ति को सजा दी जाती है। लेकिन कभी-कभी कुछ अपराध ऐसे होते है, जिनमें कोर्ट सोचती है कि हर बार दोषी को जेल भेजना सही नहीं होता। इसके अलावा कुछ ऐसे भी कानूनी नियम होते है, जिनमें जेल में बंद कैदी को कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने का मौका मिलता है। ऐसे कानूनी नियमों को समझना हर उस व्यक्ति के लिए जरुरी है, जो गलती से किसी अपराध में फंस गया है, और अब खुद को सुधारना चाहता है। इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ कानूनी नियमों के बारे में बताएंगे, जैसे कि पैरोल और प्रोबेशन क्या होते हैं? Parole कितने दिनों के लिए मिलती है? पैरोल और प्रोबेशन में क्या अंतर है?
विषयसूची
- पैरोल (Parole) क्या होता है?
- प्रोबेशन (Probation) क्या होता है?
- पैरोल किस कानूनी आधार पर व कौन व्यक्ति ले सकते हैं - नियम और शर्ते
- Parole कितने दिनों के लिए मिलती है?
- पैरोल पर कुछ दिन के लिए जेल से रिहाई मिलने की शर्तें क्या है?
- किन अपराधों में निगरानी (Probation) पर छोड़ा जा सकता है?
- Probation Officer कौन होता है?
- पैरोल और प्रोबेशन से जुड़े कानून और अधिकार
- Parole और Probation में क्या अंतर है?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पैरोल (Parole) क्या होता है?
पैरोल जिसे हिन्दी में अस्थायी छुट्टी भी कहा जाता है, यह एक ऐसा कानूनी तरीका है जिसके तहत जेल में बंद किसी कैदी (Prisoner) को कुछ खास शर्तों और नियमों (Terms & Conditions) के साथ कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति (Permission) दी जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि कैदी की सजा (Punishment) खत्म हो गई या उसे पूरी तरह आज़ाद कर दिया गया है।
पैरोल मिलने के बाद कैदी को कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आने का मौका दिया जाता है, और पैरोल के लिए दिए गए समय के पूरा होने के बाद फिर से जेल लौटना होता है और बाकी की सजा पूरी करनी होती है।
पैरोल किस कानूनी आधार पर व कौन व्यक्ति ले सकते हैं - नियम और शर्ते
- अच्छा व्यवहार करने वाले कैदी: जो व्यक्ति जेल में अच्छे तरीके से रहते हैं, नियमों (Rules) का पालन करते हैं और कभी किसी को परेशान नहीं करते, उन्हें कुछ दिन के लिए जेल से रिहाई आसानी से मिल जाती है।
- कम सजा पाए हुए कैदी: जिनकी सजा ज्यादा लंबी नहीं है या जो किसी छोटे अपराध के लिए बंद हैं, वे आसानी से अस्थायी छुट्टी (Parole) पा सकते हैं।
- बीमारी या बुजुर्ग कैदी: जो कैदी बहुत बीमार हैं या बुजुर्ग हैं और जिनकी देखभाल जेल में ठीक से नहीं हो पा रही, उन्हें पैरोल दी जा सकती है।
- परिवार में कोई जरूरी काम या इमरजेंसी वाले कैदी: अगर किसी कैदी के परिवार में कोई बड़ी समस्या हो, जैसे किसी अपने का इलाज या मृत्यु, तो ऐसे कैदी जेल से कुछ दिन की रिहाई (Release) के लिए आवेदन कर सकते हैं।
Parole कितने दिनों के लिए मिलती है?
पैरोल कितने समय के लिए मिलती है, इसके लिए कोई तय समय (Fixed Time) नहीं होता। यह हर कैदी की ज़रूरत और हालत पर निर्भर करता है। कभी-कभी अस्थायी छुट्टी (Parole) कुछ दिन के लिए होती है, तो कभी कुछ महीने के लिए भी मिल सकती है।
पैरोल पर कुछ दिन के लिए जेल से रिहाई मिलने की शर्तें क्या है?
पैरोल जेल में बंद हर दोषी व्यक्ति (Guilty Person) को नहीं मिलती। इसके लिए भी कुछ शर्तें होती हैं आइये जानते है:
- कैदी का जेल में व्यवहार अच्छा होना चाहिए
- कैदी ने कोई गंभीर अपराध (जैसे आतंकवाद, रेप या हत्या) न किया हो
- वह व्यक्ति पैरोल का समय खत्म होने पर वापस लोटेगा इस बात का भरोसा हो।
- वह समाज के लिए खतरा न हो।
प्रोबेशन (Probation) क्या होता है?
प्रोबेशन को हिंदी में आमतौर पर "पर्यवेक्षण" या "निगरानी पर छोड़ा जाना" कहा जाता है। इसका मतलब है, कि कोर्ट कुछ नियमों के साथ किसी अपराधी (Criminal) को पूरी सजा (Punishment) जेल में काटने की बजाय, समाज में रहने की अनुमति (Permission) दे देती है।
सरल भाषा में कहे, तो इस प्रक्रिया में वो अपराधी जेल नहीं जाता बल्कि आम लोगों की तरह उनके बीच ही रहता है, लेकिन उसे कुछ नियमों का पालन करना होता है। इस प्रक्रिया में कोर्ट द्वारा अपराधी को बाहर रहकर ही सुधरने का मौका दिया जा सकता है।
किन अपराधों में निगरानी (Probation) पर छोड़ा जा सकता है?
- छोटे-मोटे अपराध: जैसे चोरी, धोखाधड़ी, या हल्की मारपीट वाले मामूली अपराधों में पर्यवेक्षण (Probation) मिल सकती है। ऐसे अपराध गंभीर नहीं होते।
- सजा तीन साल से कम वाले अपराध: अगर कोर्ट ने किसी व्यक्ति को तीन साल से कम समय की सजा (Punishment) दी है, तो उसे निगरानी पर छोड़ा जा सकता है।
- पहली बार गलती करने वाले: जो पहली बार गलती करते हैं और उनका अपराध गंभीर नहीं है, उन्हें सुधरने का मौका देने के लिए प्रोबेशन दी जाती है।
- गंभीर अपराधों में नहीं मिलती: गंभीर जुर्म जैसे हत्या, बलात्कार, या बहुत बड़े अपराधों में आमतौर पर निगरानी (Probation) पर छोड़ा नहीं जाता है, क्योंकि ऐसे मामलों में सजा काटना जरूरी होता है।
Probation Officer कौन होता है?
परिवीक्षा अधिकारी (Probation Officer) वह अधिकारी होता है जो प्रोबेशन पर रहने वाले व्यक्ति की निगरानी करता है। उसका काम होता है यह देखना कि क्या अपराधी (Criminal) कोर्ट के नियमों (Rules) का पालन कर रहा है या नहीं। वह अपराधी से मिलता है, उसकी मदद करता है, और जरूरत पड़ने पर कोर्ट को रिपोर्ट भी देता है। अगर कोई नियम टूटता है तो Probation Officer के रिपोर्ट पर कोर्ट फिर से फैसला करती है।
पैरोल और प्रोबेशन से जुड़े कानून और अधिकार
- BNSS की धाराएं: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में पैरोल और प्रोबेशन के नियम दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि जेल में बंद व्यक्ति को किन हालात में अस्थायी छुट्टी (Parole) मिल सकती है और कब कोर्ट किसी अपराधी को जेल भेजने की जगह बाहर रहकर सुधार का मौका (Probation) दे सकती है।
- अपराधियों की परिवीक्षा अधिनियम (Probation of Offenders Act): यह एक खास कानून है जो छोटे अपराध करने वाले या पहली बार दोषी पाए गए लोगों को जेल भेजने की बजाय बाहर रहकर सुधारने का मौका देता है। इस कानून का मकसद है अपराधी को समाज में सुधारना और दोबारा अपराध करने से रोकना।
- सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने कई बार फैसला दिया है कि Parole और Probation सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो सच में सुधार के काबिल हों। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पैरोल और प्रोबेशन का गलत इस्तेमाल न हो और ये नियम साफ और सख्त हों।
- राज्य सरकार की गाइडलाइंस: हर राज्य सरकार के पास पैरोल और प्रोबेशन देने के अपने नियम होते हैं। ये नियम जेल प्रशासन और कोर्ट को निर्देश देते हैं कि कब और कैसे पैरोल या प्रोबेशन दिया जाए।
Parole और Probation में क्या अंतर है?
पैरोल और प्रोबेशन दोनों ही जेल में बंद या दोषी (Guilty) पाए गए लोगों को राहत देने के तरीके हैं। लेकिन ये दोनों अलग-अलग होते हैं। इन्हें समझना बहुत जरूरी है ताकि आप जान सकें कि किस मामले में क्या होता है।
1. मतलब:
पैरोल का मतलब है, जेल में बंद व्यक्ति को कुछ खास वजहों से थोड़े समय के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी जाती है। जिसमें वह कुछ दिन या हफ्तों के लिए बाहर रहता है और फिर वापस जेल जाना होता है।
वहीं, प्रोबेशन का मतलब होता है कि कोर्ट दोषी व्यक्ति को जेल भेजने की बजाय समाज में ही रहने की अनुमति देती है। इस दौरान वह व्यक्ति जेल में नहीं जाता, लेकिन कोर्ट के बनाए नियमों का पालन करता है।
2. कब मिलता है:
पैरोल तब मिलता है जब कोई पहले से जेल में बंद होता है और उसे किसी बीमारी, परिवार में समस्या या किसी जरूरी कारण से थोड़े समय के लिए जेल से बाहर आने की जरूरत होती है।
जबकि प्रोबेशन छोटे अपराध करने वाले या पहली बार दोषी पाए गए व्यक्ति को मिलता है, ताकि उसे सुधारने का मौका मिले और उसे जेल न जाना पड़े।
3. समय अवधि:
पैरोल केवल कुछ दिन हफ्ते या महीनों के लिए दी जाती है।
लेकिन प्रोबेशन का समय अधिक लंबा हो सकता है और अपराधी अपनी पूरी सजा के दौरान भी जेल से बाहर रह सकता है।
4. नियम पालन:
पैरोल मिलने पर व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करना होता है जैसे कोई नया अपराध न करना।
प्रोबेशन पर भी व्यक्ति को कोर्ट के नियम और प्रोबेशन अधिकारी के निर्देश (Instruction) मानने होते हैं, नहीं तो पर्यवेक्षण रद्द (Probation Cancelled) हो सकता है।
5. नियम टूटने पर कार्रवाई:
अगर कोई व्यक्ति पैरोल के नियम (Parole Rules) तोड़ता है, तो उस व्यक्ति को वापस जेल भेज दिया जाता है। वही अगर प्रोबेशन के नियम टूटे तो प्रोबेशन रद्द हो जाता है और उस व्यक्ति को जेल जाना पड़ सकता है।
जाने - अग्रिम जमानत क्या होती है - ये कैसे मिलती है?
निष्कर्ष: पैरोल और प्रोबेशन दोनों ऐसे मौके हैं जो अपराधी को सुधरने व कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने का मौका देते है। इसलिए इनसे जुड़े सभी नियमों व कानूनों का पालन करना भी बहुत ही जरुरी होता है। अगर आपको पैरोल, प्रोबेशन या किसी अन्य आपराधिक मामले में वकील की सलाह या सहायता चाहिए, तो अभी हमारे नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके हमारे अनुभवी वकीलों से फोन पर बात कर सकते है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पैरोल कैसे मिलती है?
जेल में बंद व्यक्ति या उसका परिवार जेल प्रशासन को अस्थायी छुट्टी (Parole) के लिए लिखित आवेदन (Written Application) देते हैं। जेल अधिकारी और कोर्ट मामले की जांच करते हैं। अगर वजह सही और जरूरी लगती है तो पैरोल मिल जाता है।
प्रोबेशन पर रिहा व्यक्ति को क्या करना होता है?
प्रोबेशन पर रहने वाले व्यक्ति को कोर्ट द्वारा बताए नियमों का पालन करना होता है, जैसे किसी जगह न जाना, अच्छे काम करना, और समय-समय पर पुलिस या कोर्ट को रिपोर्ट देना।
क्या पैरोल और प्रोबेशन एक साथ मिल सकती है?
नहीं। अस्थायी छुट्टी (Parole) जेल में बंद व्यक्ति को कुछ समय के लिए बाहर आने की अनुमति है, जबकि प्रयवेक्षण (Probation) कोर्ट का फैसला होता है कि कोई व्यक्ति जेल से बाहर रहकर ही सुधरे। इसलिए ये दोनों कभी एक साथ नहीं मिलते।
प्रयवेक्षण (Probation) का उल्लंघन करने पर क्या होता है?
अगर कोई व्यक्ति प्रोबेशन के नियमों का उल्लंघन करता है, तो कोर्ट उस व्यक्ति को जेल भेज सकती है या सजा बढ़ा सकती है।