क्या सेशंस कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद पॉक्सो एक्ट में जमानत मिल सकती है


सवाल

पॉक्सो एक्ट के तहत एक आरोपी पिछले तीन महीने से जेल में बंद है और सेशंस न्यायालय ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मैं जानना चाहता हूं कि क्या अब ऊपरी अदालत से जमानत मिलने की कोई संभावना है और इसके लिए आगे क्या प्रक्रिया अपनानी होगी?

उत्तर (6)


438 votes

जी हां, सेशंस कोर्ट से जमानत खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि रास्ते बंद हो गए हैं। आपके पास अब अपने राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में जमानत के लिए आवेदन करने का कानूनी अधिकार है। 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS) की धारा 483 (जो पहले सीआरपीसी 439 थी) के तहत हाई कोर्ट को विशेष अधिकार प्राप्त हैं और वह सेशंस कोर्ट के फैसले को पलट सकता है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के मामलों में जमानत मिलना थोड़ा कठिन जरूर होता है, क्योंकि इस कानून की धारा 29 यह मानकर चलती है कि आरोपी दोषी है जब तक कि वह निर्दोष साबित न हो जाए। हालांकि, हाई कोर्ट जमानत देते समय कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार करता है:

  1. आरोप पत्र (Charge Sheet): अगर पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है (जो आमतौर पर 60 या 90 दिनों में होती है), तो इसका मतलब है कि जांच पूरी हो चुकी है। यह जमानत का एक मजबूत आधार बनता है क्योंकि अब पुलिस को पूछताछ के लिए आरोपी की हिरासत की जरूरत नहीं है।

  2. केस की प्रकृति: अगर मामला आपसी सहमति (Consensual) वाले प्रेम प्रसंग का है (जैसे 16-17 साल के किशोरों के बीच), तो हाई कोर्ट अक्सर नरमी बरतता है और जमानत दे देता है। लेकिन अगर अपराध जघन्य है, तो जमानत में थोड़ा और वक्त लग सकता है।

  3. पीड़िता का बयान: कोर्ट पीड़िता के धारा 164 के तहत दर्ज बयानों में विरोधाभास (Contradiction) देखता है। अगर बयान कमजोर हैं, तो जमानत मिल सकती है।

इसलिए, निराश न हों। आप सेशंस कोर्ट के आदेश की कॉपी (Certified Copy) निकलवाएं और तुरंत एक अनुभवी वकील के माध्यम से हाई कोर्ट में 'नियमित जमानत' (Regular Bail) की याचिका दायर करें। तीन महीने का समय काफी होता है, और अगर चार्जशीट आ गई है, तो आपकी उम्मीदें बढ़ जाती हैं।

233 votes

अगर आप पर POCSO अधिनियम के तहत गंभीर अपराध के लिए मामला दर्ज नहीं किया गया है तो आप जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। कृपया ध्यान दें कि इस अधिनियम का तंत्र सख्त है और विशेष मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालाँकि, यदि आप POCSO अधिनियम के तहत गंभीर अपराधों के लिए बुक किए जाते हैं, तो आपको उच्च न्यायालय से जमानत मिलने की संभावना लगभग शून्य है।

278 votes

बेशक यह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर संभव है। मैंने खुद हाई कोर्ट से अपने एक मुवक्किल की जमानत हासिल की थी जिसकी जमानत सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी और वो भी आईपीसी की धारा 376 और 6 पॉक्सो एक्ट के तहत।

194 votes

पॉक्सो कानून बहुत ही कड़ा कानून है और हां निश्चित तौर पर जमानत मिलना अपने आप में बहुत मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है. हर मामले के अपने तथ्य और परिस्थितियाँ होती हैं इसलिए तथ्यों में जाए बिना सलाह देना अच्छा नहीं होगा।

60 votes

आपको यह निर्दिष्ट करना होगा कि उस व्यक्ति पर किन सभी धाराओं का आरोप लगाया गया है और वास्तव में क्या हुआ है। आपको यह भी निर्दिष्ट करना होगा कि क्या संयुक्त निपटान की कोई गुंजाइश है, लेकिन यह तभी होगा जब आरोप प्रकृति में गंभीर न हों। कृपया आगे स्पष्टीकरण के लिए निर्दिष्ट करें।

137 votes

जमानत अर्जी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील। अगर हम मजबूत तर्कों के साथ दिल्ली के उच्च न्यायालय में अपील करते हैं तो हमारे पास ज़मानत पाने की संभावना बहुत अधिक है। मेरे पास पॉस्को एक्ट के मामलों में एक महान मूल्यवान अनुभव है। मैं दूसरों की तुलना में आपकी अधिक मदद कर सकता हूं। पॉस्को मामलों में मेरे पास 100 से अधिक अच्छे परिणाम हैं।


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