Mutual Divorce - तलाक लेते समय कोर्ट में पूछे जाने वाले 10 सवाल और सही जवाब



​आज के समाज में पारिवारिक मुद्दे और तलाक की समस्याएं आम हो गई हैं। बहुत से लोग आजकल अपने शादीशुदा रिश्ते को खत्म करने के लिए आपसी सहमति से तलाक लेकर भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों से बचकर आगे के जीवन को जीना चाहते है। परन्तु आपसी सहमति से तलाक लेने की प्रक्रिया भी थोड़ी मुश्किल हो सकती है, अगर उसकी सही जानकारी ना हो। इसलिए इस लेख में हम जानेंगे कि अदालत में Mutual Divorce लेते समय पति पत्नी से कौन-कौन से प्रश्न पूछे जाते हैं? और इन सभी प्रश्नों का सही उत्तर कैसे दिया जाए। 

इसके साथ ही आज हम इस बारे में भी आपको जानकारी देंगे कि इस प्रक्रिया के दौरान आपको किन-किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आशा है कि इस लेख के अंत तक आप इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया के सभी पहलुओं को अच्छे से समझ पाएंगे।


विषयसूची

  1. आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया के दौरान�कोर्ट में पूछे�जाने वाले 10 अहम सवाल
  2. प्रश्न 1. आपकी शादी कब हुई थी?
  3. प्रश्न 2: आप लोग कब से अलग रह रहे हैं? (Date of Separation)
  4. प्रश्न 3: आप आखिरी बार कहां रह रहे थे और आपकी शादी कहां हुई थी?
  5. प्रश्न 5: शादी से आपके बच्चे हैं या नहीं? अगर हैं, तो उनकी कस्टडी किसके पास है?
  6. प्रश्न 6: क्या आपने आपसी सहमति से तलाक के लिए कोई एग्रीमेंट बनाया है?
  7. प्रश्न 7: जज साहब�आपसे पूछते हैं कि�कोर्ट में आपका�कोई केस पेंडिंग है या नहीं है?
  8. प्रश्न 8: घर बसाने का कोई सेटलमेंट हो सकता है या नहीं हो सकता है?
  9. प्रश्न 9: आप पत्नी को कितना पैसा देंगे?
  10. प्रश्न 10: आपने पैसे और अन्य सामान प्राप्त किया है या नहीं?

आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया के दौरान कोर्ट में पूछे जाने वाले 10 अहम सवाल

आपसी सहमति से तलाक (Mutual Divorce) हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 13B के अंतर्गत आता है। इस प्रक्रिया में पति-पत्नी दोनों के बीच सहमति होने पर तलाक के लिए एक संयुक्त याचिका दायर (Petition Filed) की जाती है।

इसमें मुख्य रूप से दो चरण होते हैं:- पहला मोशन (First Motion) और दूसरा मोशन (Second Motion)। दोनों मोशन के बीच छह महीने का अनिवार्य अंतराल (Interval) होता है। इस दौरान कोर्ट में पेश होने पर जज साहब आपसे कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न पूछते हैं। ये प्रश्न यह सुनिश्चित करने के लिए होते हैं कि दोनों पक्ष वाकई तलाक चाहते हैं और उनके बीच सहमति है।

आइए जानते हैं कि आपसी सहमति से तलाक के दौरान कोर्ट में आपसे कौन-कौन से 10 सवाल पूछे जाते हैं और उनके उत्तर कैसे दिए जाते हैं:-



प्रश्न 1. आपकी शादी कब हुई थी?

प्रश्न पूछने का महत्व:-  इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना होता है कि शादी को कितने साल हो चुके हैं। यह तलाक के निर्णय के लिए एक महत्वपूर्ण बात होती है।

उत्तर में शामिल जानकारी:- शादी की तारीख और विवाह का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें। जब कोर्ट में आपसे यह सवाल पूछा जाता है, तो जज साहब यह जानना चाहते हैं कि आपकी शादी कितने साल पहले हुई थी। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि आपने शादी के बाद कितना समय एक दूसरे के साथ बिताया है और अब आप Divorce क्यों चाहते हैं।

इस प्रश्न का उत्तर देते समय आपको अपनी शादी की तारीख बतानी होगी। उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं: "हमारी शादी [XYZ तारीख ] को हुई थी।"
इसके बाद आप शादी के प्रमाण के रूप में मैरिज सर्टिफिकेट, शादी के कार्ड, या शादी की फोटो भी पेश कर सकते हैं। यह जानकारी जज साहब को यह समझने में मदद करेगी कि आपकी शादी को कितने साल हो चुके हैं।



प्रश्न 2: आप लोग कब से अलग रह रहे हैं? (Date of Separation)

जब आप कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक (Mutual Divorce) के लिए जाते हैं, तो जज साहब आपसे पूछते हैं कि आप दोनों कब से अलग रह रहे हैं। इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना होता है कि क्या आपने तलाक की याचिका (Petition) दायर करने से पहले कम से कम एक वर्ष तक का समय अलग रहकर बिताया है या नहीं।

उत्तर देने का तरीका:

इस सवाल का उत्तर देते समय आपको यह बताना होता है कि आप और आपके साथी ने किस तारीख से अलग रहना शुरू किया। उदाहरण के लिए आप कह सकते हैं:

"हम [तारीख] से अलग रह रहे हैं।"

यह तारीख बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कानून के अनुसार, हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13B (2) के तहत आप तभी आपसी सहमति से तलाक के लिए याचिका दायर कर सकते हैं जब आप दोनों कम से कम एक साल से अलग रह रहे हों।

महत्व:

  • एक साल का अलगाव: यदि आपने एक साल तक अलगाव पूरा कर लिया है, तो तलाक की प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी।
  • कम समय का अलगाव: यदि एक साल का समय पूरा नहीं हुआ है, तो आपको हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 14 के तहत एक विशेष आवेदन करना होगा, जिसमें जज से इस समय सीमा को माफ करने की अनुमति मांगनी होगी।

Second Motion के लिए महत्वपूर्ण बाते:-

जब आप Second Motion के लिए कोर्ट में जाते हैं, तो जज यह भी देखेंगे कि क्या छह महीने का समय बीत चुका है, जो कि First Motion और Second Motion के बीच का अनिवार्य समय होता है। अगर यह समय बीत चुका है, तो ही जज साहब आपके तलाक को अंतिम रूप दे सकते हैं।

इसलिए एक दूसरे से अलग होने की तारीख को बिल्कुल सही तरीके से बताना बहुत जरूरी है। इससे जज साहब यह तय कर सकते हैं कि आपसी सहमति से तलाक के लिए कानूनी शर्तें पूरी हो चुकी हैं या नहीं।



प्रश्न 3: आप आखिरी बार कहां रह रहे थे और आपकी शादी कहां हुई थी?

जब आप कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक के लिए जाते हैं, तो जज साहब आपसे इस सवाल के द्वारा यह जानना चाहते हैं कि आप आखिरी बार किस स्थान पर एक साथ रह रहे थे और आपकी शादी किस स्थान पर हुई थी। यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे कोर्ट को यह समझने में मदद मिलती है, कि तलाक की याचिका सही क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) में दायर की गई है या नहीं।

उत्तर देने का तरीका:-

इस प्रश्न का उत्तर देते समय आपको यह बताना होता है कि आप और आपके साथी ने शादी के बाद आखिरी बार कहां पर एक साथ समय बिताया था। साथ ही आपको यह भी बताना होता है कि आपकी शादी किस स्थान पर हुई थी। उदाहरण के लिए आप कह सकते हैं: हम आखिरी बार [XYZ] स्थान पर रह रहे थे और हमारी शादी [XYZ] स्थान पर हुई थी।

महत्व:

  • शादी का स्थान: शादी का स्थान बताने से यह स्पष्ट होता है कि विवाह कहां पंजीकृत (registered) हुआ था। आमतौर पर यह स्थान वही होता है जहां लड़की रहती है, क्योंकि आमतौर पर शादी उसके घर या उसके शहर से ही होती है।
  • आखिरी रहने का स्थान: जहां आपने आखिरी बार एक साथ समय बिताया, वह जगह भी कोर्ट के लिए महत्वपूर्ण है। इससे कोर्ट यह निर्धारित कर सकती है कि तलाक की याचिका सही jurisdiction में दायर हुई है या नहीं।
 

Jurisdiction का महत्व:

आप जिस कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर रहे हैं, वह स्थान आपके आखिरी निवास (यानी एक साथ रहने का स्थान) या शादी के स्थान के दायरे में आता है, तो याचिका उसी कोर्ट में सुनी जाएगी।

अगर आप अलग-अलग स्थानों पर रह रहे हैं, तो आपको यह साबित करना होगा कि जिस क्षेत्र में कोर्ट है, वहां आपकी या आपके साथी की रहने की जगह या शादी का स्थान आता है। इसके लिए कोर्ट में Address प्रूफ जैसे आधार कार्ड, रेंट एग्रीमेंट, या अन्य दस्तावेज़ पेश किए जा सकते हैं।

प्रश्न 4: शादी का क्या सबूत है?

जब आप तलाक की प्रक्रिया में होते हैं, तो कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आपकी शादी वास्तव में हुई थी। इसके लिए जज आपसे शादी का प्रमाण मांगते हैं। इस सवाल का जवाब देने के लिए आपको कुछ दस्तावेज (Documents) और सबूत (Evidence) पेश करने होते हैं जो आपकी शादी को प्रमाणित कर सकें।

उत्तर देने का तरीका:-

  1. फोटोग्राफ: सबसे पहला और महत्वपूर्ण प्रमाण होता है शादी के समय ली गई तस्वीरें। आमतौर पर शादी के दौरान खींची गई फोटोज़ को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण प्रमाण होता है क्योंकि तस्वीरें दिखाती हैं कि शादी कब और कैसे हुई थी।
  2. मैरिज कार्ड: दूसरा मुख्य प्रमाण होता है शादी का कार्ड। यह कार्ड शादी के कार्यक्रम की जानकारी देता है, जैसे शादी की तारीख, स्थान, और दोनों परिवारों के नाम। यह भी आपकी शादी का प्रमाण माना जाता है।
  3. मैरिज रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र: यदि आपकी शादी रजिस्टर हुई है, तो रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को पेश करना सबसे अच्छा सबूत होता है। यह कानूनी रूप से आपकी शादी को प्रमाणित करता है और कोर्ट में इसे सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

ये दस्तावेज़ उपलब्ध न होने पर क्या करे:-

अगर आपके पास शादी का कार्ड या फोटोग्राफ नहीं है, तो आपको एक शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करना होता है। इसमें आपको यह स्पष्ट करना होता है कि शादी का कार्ड क्यों उपलब्ध नहीं है, जैसे कि वह खो गया हो, या शादी बहुत पुरानी हो चुकी हो। अगर फोटोग्राफ्स भी नहीं हैं, तो इसका कारण भी शपथ पत्र में लिखना होता है।



प्रश्न 5: शादी से आपके बच्चे हैं या नहीं? अगर हैं, तो उनकी कस्टडी किसके पास है?

तलाक की प्रक्रिया के दौरान जज साहब यह भी जानना चाहते हैं कि आपकी शादी से बच्चे हुए हैं या नहीं। यदि बच्चे हैं, तो उनकी कस्टडी से जुड़े सवाल भी पूछे जाते हैं। यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि बच्चों की देखभाल और परवरिश के बारे में कोर्ट को निर्णय लेना होता है।

उत्तर देने का तरीका:

  • बच्चे हैं या नहीं: सबसे पहले तो जज साहब आपसे यह सवाल करेंगे कि आपकी शादी से कोई संतान है या नहीं। अगर बच्चे हैं, तो उनकी संख्या, उम्र, और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी देनी होती है।
  • कस्टडी का प्रश्न: यदि बच्चे हैं, तो अगला सवाल होता है कि उनकी कस्टडी किसके पास है। यह भी पूछा जा सकता है कि तलाक के बाद बच्चे किसके पास रहेंगे। यदि दोनों पक्षों के बीच कस्टडी पर सहमति हो चुकी है, तो उस बारे में कोर्ट को बताना होता है। अगर सहमति नहीं है, तो जज साहब इस मुद्दे पर गहन विचार करेंगे और दोनों पक्षों के तर्क सुनेंगे।
  • बच्चों से मिलने के अधिकार (Visitation Rights): कोर्ट यह भी देखती है कि बच्चे जिस पक्ष जैसे माता या पिता में से किस के साथ नहीं रहेंगे, उसे बच्चों से मिलने का अधिकार मिलेगा या नहीं। इसे "मिलने के अधिकार" (Visitation Rights) कहा जाता है। इस पर भी कोर्ट में चर्चा की जाती है।
  • बच्चों के दस्तावेज: बच्चों की पहचान और कस्टडी को प्रमाणित करने के लिए कोर्ट आपसे कुछ दस्तावेज मांग सकती है, जैसे कि बच्चों के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, आदि। ये दस्तावेज यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चे वास्तव में हैं और उनकी स्थिति क्या है।
 

दस्तावेजों की सही तैयारी:-

वकील से यह तैयारी पहले से ही करने के लिए कहा जाता है कि सभी जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र आदि सही तरीके से फाइल में मौजूद हों। इसके लिए एक सूची बनाकर रखना बहुत महत्वपूर्ण है, जिसमें हर दस्तावेज का पेज नंबर भी लिखा हो। जब जज सवाल पूछते हैं, तो इस सूची की मदद से तुरंत जवाब दिया जा सकता है, जिससे कोर्ट का समय भी बचता है और आपके द्वारा की गई अच्छी तैयारी भी दिखती है।



प्रश्न 6: क्या आपने आपसी सहमति से तलाक के लिए कोई एग्रीमेंट बनाया है?

आपसी सहमति से तलाक लेते समय जज साहब यह भी पूछते हैं कि क्या आपने इस प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के बीच किसी भी शर्त या समझौते पर आधारित कोई एग्रीमेंट बनाया है या नहीं। एग्रीमेंट बनाना इसलिए महत्वपूर्ण होता है ताकि दोनों पक्षों के बीच भविष्य में किसी भी तरह का विवाद न हो।

एग्रीमेंट बनाना क्यों है जरुरी:-

  • शर्तों का स्पष्ट विवरण: एग्रीमेंट में तलाक से जुड़ी सभी शर्तों को स्पष्ट रूप से लिखा जाता है। इसमें यह शामिल होता है कि पति-पत्नी किन-किन शर्तों पर सहमत हुए हैं, जैसे कि बच्चों की कस्टडी, संपत्ति का बंटवारा, और किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता का भुगतान कैसे और कब होगा।
  • भुगतान की सुरक्षा: तलाक के दौरान यह अक्सर देखा गया है कि पहले मोशन में पत्नी को एक बड़ा भुगतान मिल जाता है, लेकिन दूसरे मोशन में वह तलाक लेने से इनकार कर देती है। इस स्थिति से बचने के लिए एग्रीमेंट में भुगतान की शर्तों को स्पष्ट रूप से लिखा जाता है, जिससे पति को भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय हानि से बचाया जा सके।
  • केस वापस लेने का प्रावधान: एग्रीमेंट में यह भी लिखा जा सकता है कि तलाक के बाद कितने केस वापस लिए जाएंगे और किस तरह से। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी प्रकार के अनचाहे केसों से बचा जा सके।
  • जैसे किसी व्यक्ति की पत्नी ने अपने पति पर किसी प्रकार का केस किया है तो वह भी एग्रीमेंट में लिखा होना चाहिए की तलाक के बाद पत्नी उन केसों को वापिस लेगी या नहीं।
 

एग्रीमेंट के प्रकार:

एग्रीमेंट दो प्रकार के हो सकते हैं:-
 

  1. पर्सनल एग्रीमेंट: आप इसे नोटराइज करवा सकते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हस्ताक्षर होते हैं।
  2. मेडिएशन सेल एग्रीमेंट: इसे कोर्ट के मेडिएशन सेल में तैयार कराया जा सकता है, जहां कोर्ट की निगरानी में यह एग्रीमेंट बनता है।

कोर्ट की जांच: कोर्ट इस एग्रीमेंट को देखती है और यह सुनिश्चित करती है कि इसमें लिखी गई शर्तें याचिका में भी शामिल हैं या नहीं। अगर शर्तें याचिका में नहीं हैं, तो भी आप याचिका में एक लाइन लिख सकते हैं कि सभी शर्तें एग्रीमेंट में दर्ज हैं। यह कोर्ट को आपकी सहमति को साबित करने में मदद करता है।
 

प्रश्न 7: जज साहब आपसे पूछते हैं कि कोर्ट में आपका कोई केस पेंडिंग है या नहीं है?

जब आप आपसी सहमति से तलाक के लिए अदालत में जाते हैं, तो जज साहब आपसे पूछ सकते हैं कि आपके और आपकी पत्नी के बीच और कौन-कौन से केस चल रहे हैं। इस सवाल का मकसद यह जानना होता है कि क्या आपके खिलाफ कोई अन्य कानूनी मामला चल रहा है, जैसे कि घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का केस, मेन्टेनेंस (Maintenance) का केस, या कोई अन्य तलाक से जुड़ा हुआ मामला।

इसके अलावा जज साहब यह भी पूछ सकते हैं कि उन मामलों को कैसे सुलझाया जाएगा। उदाहरण के लिए अगर पत्नी ने घरेलू हिंसा या मेन्टेनेंस का केस दर्ज किया है, तो तलाक के साथ उन मामलों को वापस लेने या सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

जज साहब यह सुनिश्चित करते हैं कि अगर आपसी सहमति से तलाक के बाद कोई अन्य मामला पेंडिंग है, तो उसे भी निपटाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। इसलिए आपको अदालत में यह बताना होता है कि कितने केस चल रहे हैं और उन्हें वापस लेने या खत्म करने के लिए आगे का क्या विचार है।

इस सवाल का उद्देश्य तलाक प्रक्रिया को सुगम बनाना और दोनों पक्षों के बीच विवादों को पूरी तरह से खत्म करना होता है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी समस्या न हो।



प्रश्न 8: घर बसाने का कोई सेटलमेंट हो सकता है या नहीं हो सकता है?

आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया के दौरान, जज साहब यह भी पूछ सकते हैं कि क्या आप दोनों के बीच सुलह की कोई गुंजाइश है या नहीं। इसका मतलब है कि क्या आप दोनों अपने मतभेदों को सुलझाकर फिर से साथ रह सकते हैं और तलाक की प्रक्रिया को रोक सकते हैं।

कई बार जज साहब यह जानना चाहते हैं कि तलाक के बजाय शादी को बचाने का कोई तरीका है या नहीं। इसके लिए वे आपसे पूछ सकते हैं कि क्या कोई ऐसा समाधान है जिससे आप दोनों का घर फिर से बस सके। अगर जज को लगता है कि सुलह की गुंजाइश है, तो वे आपको काउंसलिंग के लिए भी भेज सकते हैं।

काउंसलिंग का मकसद यह होता है कि आप दोनों के बीच की समस्याओं को समझा जाए और उन्हें हल करने की कोशिश की जाए। अगर काउंसलिंग से कोई सकारात्मक परिणाम निकलता है और आप दोनों फिर से साथ रहने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो तलाक की प्रक्रिया रुक सकती है।

लेकिन अगर आप दोनों स्पष्ट रूप से तलाक चाहते हैं और सुलह का कोई रास्ता नहीं है, तो जज साहब यह सुनिश्चित करेंगे कि तलाक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उनका उद्देश्य यह होता है। कि अगर शादी को बचाया जा सकता है, तो पहले उस पर प्रयास किया जाए और अगर नहीं बच सकता, तो तलाक को सही तरीके से और कानूनी रूप से निपटाया जाए।



प्रश्न 9: आप पत्नी को कितना पैसा देंगे?

जब आप आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया में होते हैं, तो जज साहब यह भी पूछते हैं कि आपने पत्नी को कितना पैसा देना तय किया है। यहां कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं जो इस सवाल के उत्तर में शामिल होते हैं:

सेटलमेंट की राशि:

जज साहब यह जानना चाहते हैं कि आपने तलाक के दौरान पत्नी को कितनी राशि देने का फैसला किया है। यह राशि आपकी आपसी सहमति पर आधारित होती है और इसमें पति द्वारा पत्नी को सारे पैसे एक साथ या किस्तों में देने वाली राशि शामिल हो सकती है।

भुगतान का तरीका:

यह भी महत्वपूर्ण है कि आपने पैसे किस तरीके से पैसे देने का निर्णय लिया है। आमतौर पर, पैसे देने के लिए चेक या कैश का उपयोग किया जाता है, लेकिन सबसे सुरक्षित तरीका डिमांड ड्राफ्ट होता है।

डिमांड ड्राफ्ट एक बैंक द्वारा जारी किया गया भुगतान का दस्तावेज है जो सुनिश्चित करता है कि पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट से निकाला गया है और फिर सीधा आपकी पत्नी के खाते में ही जमा होगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पैसा सुरक्षित तरीके से और सही ढंग से पत्नी को प्राप्त होगा।

चेक की स्थिति में, अगर किसी कारणवश चेक बाउंस हो जाता है, तो आपको इसके लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह कैश देने में भी विवाद की संभावना होती है, जैसे कि आपकी पत्नी आप पर आरोप लगा सकती है कि आपन पैसा चोरी करवा दिया या किसी व्यक्ति की सहायता से वापिस छीन लिया।

भुगतान की स्थिति:

जज साहब यह भी देखना चाहते हैं कि आपने पहले कितना पैसा दिया है और भविष्य में कितना और देना है। अगर आपने पहले ही कुछ राशि चुका दी है, तो इसकी जानकारी भी जज साहब को देनी होती है।

यदि आपका सेटलमेंट किस्तों में है, तो आपको बताना होता है कि हर किस्त की राशि कितनी होगी और भुगतान करने की तारीखें क्या होंगी।
इस तरह से, जज यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपके बीच की वित्तीय व्यवस्था स्पष्ट, उचित और कानूनी हो, ताकि तलाक की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम हो।



प्रश्न 10: आपने पैसे और अन्य सामान प्राप्त किया है या नहीं?

जब तलाक की प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचते हैं और सभी दस्तावेज़ों पर साइन हो जाते हैं, तब जज साहब एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछते हैं:

1. पैसा और अन्य सामान:

जज साहब आपकी पत्नी से पूछते हैं कि आपने जो पैसा या अन्य सामान (जैसे सोना या गहने) आपको देने की बात की थी, क्या वह सब आपने प्राप्त कर लिया है।
यदि पति ने पत्नी को पैसे दिए हैं या कोई गहने दिए हैं, तो जज साहब यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पत्नी को सब कुछ सही-सही मिला है और वह पूरी तरह संतुष्ट हैं।

2. संतोषजनक प्राप्ति:-

जज साहब यह भी पूछते हैं कि क्या पत्नी को प्राप्त हुए पैसे या सामान से वे पूरी तरह संतुष्ट हैं या नहीं। यह महत्वपूर्ण है ताकि तलाक के बाद किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद की संभावना न रहे।

3. तलाक की समाप्ति:

इस प्रश्न के जवाब के बाद अगर पत्नी ने सब कुछ प्राप्त कर लिया है और संतुष्ट है, तो जज तलाक के लिए अंतिम आदेश पास करते हैं। इससे आपकी Mutual Divorce प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

इस तरह से, जज यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी शर्तें पूरी हो चुकी हैं और दोनों पक्षों के बीच का विवाद समाप्त हो गया है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • फोटोग्राफ्स और आईडी की जांच: कोर्ट आपके फोटोग्राफ्स और आईडी को क्रॉस-चेक कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आप सही व्यक्ति हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति: जज साहब कभी-कभी यह भी जांच सकते हैं कि आप मानसिक रूप से स्वस्थ हैं या नहीं, और आप किसी दबाव में तो नहीं हैं।
 

निष्कर्ष:- इस लेख में बताई गई यह प्रक्रिया व इसके संबंध में पुछे जाने वाले जरुरी प्रश्नों के द्वारा Mutual Divorce की प्रक्रिया पुरी होती है, और दोनों पक्षों को एक नए जीवन की शुरुआत करने का अवसर प्रदान करती है। आपसी सहमति से तलाक एक समझदारी व शांतिपूर्ण समाधान की ओर एक कदम है, जो दोनों पक्षों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करता है। अगर आप Mutual Divorce से संबंधित कोई भी अन्य कानूनी सलाह या जानकारी जानना चाहते है तो आप अभी हमारे अनुभवी वकीलों से घर बैठे बात कर सकते है। 



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