इद्दत क्या होती है? मुस्लिम धर्म में तलाक या पति की मृत्यु के बाद इद्दत का तरीका
मुस्लिम कानून के अनुसार तलाक (Divorce) या पति की मौत के बाद आपने अक्सर इद्दत शब्द को सुना होगा जो इस्लाम धर्म में इन दोनों परिस्थितियों में बीवी के कर्तव्य के रूप में जाना जाता है। इद्दत" (Iddat) का हिंदी में अर्थ है प्रतीक्षा या इंतजार की अवधि। यह एक इस्लामी शब्द है जो पति की मृत्यु या तलाक के बाद उसकी पत्नी द्वारा पालन की जाने वाली अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को दर्शाता है, जिसके दौरान वह किसी और से शादी नहीं कर सकती। आज हम इस आर्टिकल मे इद्दत का मतलब क्या होता है (Iddat meaning in Hindi), इद्दत का तरीका, बेवा की इद्दत कितने समय (दिनों) की होती है?, इद्दत के दौरान मुस्लिम महिला के अधिकार, नियम और पर्दा आदि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।
इद्दत का हिंदी में अर्थ है प्रतीक्षा या इंतजार की अवधि। मुस्लिम कानून में “इद्दत” (Iddat) उस तय अवधि को कहते हैं जो किसी महिला को तलाक या पति की मृत्यु के बाद इंतजार के रूप में पूरी करनी होती है। इस दौरान वह दूसरी शादी नहीं कर सकती। इद्दत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि महिला गर्भवती है या नहीं, और पति की मृत्यु की स्थिति में शोक अवधि पूरी हो सके।
तलाक की स्थिति में इद्दत आमतौर पर तीन मासिक धर्म (लगभग तीन महीने) की होती है। पति की मृत्यु पर इद्दत चार महीने दस दिन की होती है। अगर महिला गर्भवती है, तो इद्दत बच्चे के जन्म तक रहती है।
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि इद्दत का मतलब क्या होता है (Iddat meaning in Hindi, बेवा की इद्दत कितने दिनों की होती है, इद्दत के दौरान महिला के क्या नियम और अधिकार होते हैं, और पर्दा व रहने से जुड़े क्या प्रावधान हैं।
विषयसूची
- इद्दत का मतलब क्या होता है? (Meaning Of Iddat in Hindi)
- इद्दत कितने दिन की होती है - समय�अवधि
- इद्दत का उद्देश्य - मुस्लिम धर्म में पत्नी द्वारा इद्दत कब और क्यों की जाती है?
- इद्दत अवधि कब शुरू होती है
- अगर तलाक के बाद इद्दत के दौरान पति की मौत हो जाए
- मुस्लिम धर्म में इद्दत के दौरान शादी के नियम
- इद्दत के दौरान मुस्लिम पत्नी के अधिकार (Right of Wife During Iddat)
- इद्दत में क्या नहीं करना चाहिए - पत्नी के लिए इद्दत के नियम
- इद्दत के दौरान पत्नी का भरण-पोषण (Maintenance of Wife During Iddat)
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इद्दत का मतलब क्या होता है? (Meaning Of Iddat in Hindi)
मुस्लिम कानून के अनुसार पति की मौत हो जाने पर या पति द्वारा तलाक दिए जाने पर पत्नी को एक निश्चित समय-अवधि (Time-Period) के लिए एकांत मे रहना अनिवार्य है इस एकांतवास की समय अवधि को इद्दत कहाँ जाता है।
इद्दत एक वैवाहिक संबंध की समाप्ती और नए वैवाहिक संबंध के प्रारंभ के बीच का वह समय होता है जिसका पालन करना मुस्लिम महिला के लिए आवश्यक होता है।
इद्दत का उद्देश्य - मुस्लिम धर्म में पत्नी द्वारा इद्दत कब और क्यों की जाती है?
इद्दत का उद्देश्य मुस्लिम महिला अपने पूर्व पती से गर्भवती है या नही पता लगाना होता है जिससे की उसके बच्चे के पिता का निर्णय किया जा सके। ताकि बच्चे के पितृत्व के बारे में कोई संदेह न रहे।
इद्दत अवधि कब शुरू होती है
इद्दत अवधि विवाह खत्म होने पर यानी तलाक के बाद और विवाहित महिला के पति की मौत हो जाने पर शुरू होती है।
इद्दत कितने दिन की होती है - समय अवधि
इस्लाम में इद्दत की अवधि परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती है:
- तलाक की स्थिति में: 3 मासिक धर्म (लगभग 3 महीने या 89-90 दिन)।
- पति की मृत्यु (बेवा) होने पर: पति की मृत्यु पर इद्दत की अवधि 4 महीने 10 दिन की होगी।
- गर्भवती होने पर: पति की मौत के समय पत्नी अगर गर्भवती है तो तो बच्चे के जन्म पर इद्दत की समय अवधि समाप्त होती है।
अगर तलाक के बाद इद्दत के दौरान पति की मौत हो जाए
अगर तलाक के बाद इद्दत के दौरान पति की मौत हो जाए तो मुस्लिम महिला को पति की मौत के दिन से फिर से 4 महीने 10 दिन की होगी इद्दत अवधि व्यतीत करनी होगी। अगर पति की मौत के समय महिला गर्भवती है तो बच्चे के जन्म तक होगी।
मुस्लिम धर्म में इद्दत के दौरान शादी के नियम
इद्दत के दौरान शिया और सुन्नी मुस्लिमों शादी के निम्नलिखित प्रभाव है:
- सुन्नी मुस्लिमों में इद्दत अवधि के दौरान महिला से विवाह अनियमित (Irregular) है पर अमान्य (Invalid) नहीं है।
- शिया मुस्लिमों में इद्दत अवधि के दौरान महिला से विवाह अमान्य (Void) है।
इद्दत के दौरान मुस्लिम पत्नी के अधिकार (Right of Wife During Iddat)
- इद्दत की अवधि के दौरान पति-पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है।
- पत्नी मेहर की हकदार हो जाती है, और यदि मेहर का भुगतान नहीं किया गया है, तो यह तुरंत देय हो जाता है।
- इद्दत की अवधि की समाप्ति से पहले अगर पति की मृत्यु हो जाए, तो पत्नी मॄत पति की संपत्ति में उत्तराधिकार पाने की हकदार होगी, बशर्ते की मृत्यु से पहले तलाक पूर्ण न हो गया हो।
- वही अगर इद्दत की अवधि की समाप्ति से पहले पत्नी की मृत्यु हो जाए तो पति मॄत पत्नी की संपत्ति में उत्तराधिकार पाने की हकदार होगी, बशर्ते की मृत्यु से पहले तलाक पूर्ण न हो गया हो।
- यदि तलाक की घोषणा मृत्यु या बीमारी की स्थिति में की जाती है और पति की मृत्यु पत्नी की इद्दत पूरी होने से पहले हो जाती है तो पत्नी उससे उत्तराधिकार पाने की हकदार है, भले ही तलाक उसकी मृत्यु से पहले ही पूर्ण हो गया हो।
जाने - मुस्लिम धर्म में तलाक लेने के नियम
इद्दत में क्या नहीं करना चाहिए - पत्नी के लिए इद्दत के नियम
इद्दत में क्या नहीं करना चाहिए, इसके लिए इस्लाम धर्म में कुछ नियम निर्धारित किया गए है जो नीचे दिए गए है:
- पत्नी अपनी इद्दत पूरी होने तक किसी अन्य व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती।
- इद्दत अवधि का पालन करना उसी घर में करना अनिवार्य (Compulsory) है जहां महिला अपने पति की मृत्यु के समय या डाइवोर्स के मामले में स्थायी रूप से रह रही थी।
- इद्दत का समय समाप्त होने से पहले उसे घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं है, जब तक कि कोई आपातकालीन चिकित्सीय स्थिति (Emergency Medical Situation) ना हो या वह परिवार में एकमात्र कमाने वाली हो।
- उसे रेशमी या अन्य दिखावटी कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है। इस अवधि में पहनने के लिए कोई विशिष्ट रंग नहीं है, जैसे कि काला या सफेद, और कोई भी साधारण और सादा कपड़ा पहना जा सकता है।
- इद्दत के दौरान किसी महिला के लिए साज-सजावट (Make-Up) करना या किसी अन्य तरीके से खुद को सुंदर बनाना हराम है।
- इद्दत के दौरान उसे अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं है।
- वह अपने पति के लिए शोक मनाने के लिए बाध्य है।
इद्दत के दौरान पत्नी का भरण-पोषण (Maintenance of Wife During Iddat)
इद्दत के दौरान, एक मुस्लिम पत्नी अपने पति से भरण-पोषण की हकदार होती है। मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की पीठ ने कहा कि यदि पत्नी खुद का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो पति BNSS की धारा 125 के तहत इद्दत के बाद भी उसे भरण-पोषण देने के लिए बाध्य है, और यदि वह खुद का भरण-पोषण करने में सक्षम है, तो इद्दत के बाद भरण-पोषण बंद हो जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बेवा की इद्दत कितने दिनों की होती है?
अगर किसी महिला के सोहर का इंतकाल हो जाता है, तो उसे चार महीने दस दिन (130 दिन) तक इद्दत करनी होती है। अगर महिला गर्भवती हो, तो इद्दत बच्चे के जन्म तक चलती है।
इद्दत का मतलब क्या होता है?
इद्दत एक तय समय होता है जिसमें तलाकशुदा या विधवा मुस्लिम महिला को शादी नहीं करनी होती और कुछ नियमों का पालन करना होता है जैसे कि वो बिना किसी जरुरी काम के बाहर नहीं जा सकती। इसका मुख्य उद्देश्य, तलाक या पति की मृत्यु के बाद, किसी भी बच्चे के पितृत्व के बारे में संदेह को दूर करना है.
तलाक के बाद इद्दत कितने दिनों की होती है?
तलाक के बाद इद्दत की अवधि आमतौर पर तीन मासिक धर्म (menstrual cycles) तक होती है। अगर महिला प्रेग्नेंट है, तो इद्दत डिलीवरी तक मानी जाती है।
क्या इद्दत के दौरान पर्दा करना जरूरी है?
हां, इद्दत के दौरान पर्दा और सादगी बहुत जरूरी मानी जाती है। महिला को बिना जरूरत गैर-महरम पुरुषों से मिलना-जुलना नहीं चाहिए और घर में भी सादगी से रहना चाहिए।