बीएनएस धारा 81 क्या है - सजा और जमानत | BNS Section 81 in Hindi


BNS Section 81 in Hindi

आजकल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन डेटिंग के ज़रिए रिश्तों की शुरुआत तो होती है, लेकिन कई बार ये रिश्ते धोखे और विश्वासघात में बदल जाते हैं। अक्सर लोग शादी का झूठा वादा करके एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बना लेते हैं। ऐसा करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 81 के तहत दंडनीय अपराध है। इस तरह के अपराधों के बारे में जागरूक होकर महिलाओं को समझना चाहिए कि वे कैसे इस तरह के धोखे से बच सकती हैं, और पुरुषों को भी यह जानना चाहिए कि ऐसे अपराधों के परिणाम क्या होते हैं। आज के लेख में इस धारा से जुड़ी सभी जानकारी आपको देंगे जैसे कि, बीएनएस की धारा 81 क्या है, यह कब लागू होती है? BNS 81 के दोषियों को क्या सजा दी जाती है और इस सेक्शन तहत जमानत व बचाव के उपाय?

भारत में महिलाओं के साथ धोखा और शोषण के इस मामले को पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 493 परिभाषित करती थी। लेकिन भारतीय न्याय प्रणाली में नए बदलाव किए जाने के बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) को भारतीय न्याय संहिता (BNS) से बदल दिया गया। इसलिए अब इस प्रकार के अपराधों पर बीएनएस की धारा 81 के तहत कार्यवाही की जाती है। आइए इस बदलाव को इस लेख द्वारा विस्तार से समझें और इससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को जानें।


बीएनएस धारा 81 क्या है - BNS Section 81 in Hindi

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 81 जो महिलाओं की रक्षा के लिए बनाई गई है। यह धारा उन मामलों से निपटती है जहां एक पुरुष किसी महिला को धोखे से यह विश्वास दिलाता है कि वे शादीशुदा (Married) हैं, और फिर उस महिला के साथ शारीरिक संबंध (Physical Relation) बनाता है।

सरल शब्दों में कहे तो, अगर कोई पुरुष किसी महिला को यह झूठा विश्वास (False Belief ) दिलाता कि वह उससे शादी कर चुका है और फिर उस महिला के साथ शारीरिक संबंध बना लेता है, तो वह बीएनएस सेक्शन 81 के तहत अपराध कर रहा है।


BNS 81 के अपराध के आवश्यक मुख्य बिंदु

बीएनएस सेक्शन 81 के अपराध को समझने के लिए इसके मुख्य बिंदुओं के बारे में भी जानना बहुत ही आवश्यक है, जो कि इस प्रकार है:

  • BNS Section 81 महिलाओं को धोखे से फंसाने के अपराध से जुड़ा है।
  • इस अपराध में झूठ बोलना, धोखा देना और शारीरिक संबंध जैसे कार्य शामिल होते हैं।
  • यह अपराध महिला की गरिमा (Dignity) को ठेस पहुंचाता है।
  • इस अपराध के लिए कड़ी सजा (Severe Punishment) का प्रावधान (Provision) है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 81 के तहत अपराध का सरल उदाहरण

एक बार रमेश नाम का एक व्यक्ति होता है। जो उमा नाम की एक लड़की से रोजाना मिलता है, और उसे बहुत पसंद करता है। रमेश उमा को यह विश्वास दिलाता है कि वह उससे शादी करना चाहता है और एक दिन दोनों ने मंदिर में जाकर शादी भी कर लेते है। उमा को लगता है कि अब वे पति-पत्नी हैं। लेकिन, वास्तव में रमेश ने उमा के साथ धोखा किया। उसने उमा से शादी नहीं की थी, बल्कि सिर्फ उसे बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाना चाहता था। जब उमा को यह बात पता चली तो उसने पुलिस में रमेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में रमेश पर बीएनएस सेक्शन 81 के तहत मामला दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी।


इस धारा के तहत किए जाने वाले अपराधिक कृत्य

बीएनएस सेक्शन 81 में बताया गया अपराध सिर्फ शारीरिक संबंध (Physical Relation) तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसमें कई तरह के अन्य कार्य भी शामिल होते हैं जो पीड़िता (Victim) को मानसिक और सामाजिक (Mental Or Social) रूप से प्रभावित करते हैं। आइए इन कार्यों को विस्तार से समझते हैं:

  • धोखा देकर विवाह का झूठा विश्वास दिलाना: इसमें आरोपी व्यक्ति (Accused Person) किसी महिला को यह झूठा विश्वास दिलाता है कि वह उसके साथ कानूनी रूप से विवाह कर चुका है। यह धोखा महिला के भरोसे का फायदा उठाकर किया जाता है।
  • शारीरिक संबंध बनाना: धोखे के द्वारा ही किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाना गंभीर अपराध होता है।
  • धोखाधड़ी का सहारा लेना: आरोपी शादी या रिश्ते का झांसे देकर महिला की सहमति (Consent) प्राप्त करता है। वह झूठे वादे (False Promises) करता है और महिला की भावनाओं (Emotions) का फायदा उठाता है।
  • विवाह के नाम पर झूठे दस्तावेज बनाना: आरोपी नकली विवाह प्रमाणपत्र (Fake Marriage Certificate) या अन्य झूठे दस्तावेज (False Documents) तैयार करके महिला को गुमराह करता है।
  • पीड़िता को सामाजिक दबाव में रखना: आरोपी महिला पर सामाजिक रुप से बदनाम करने का दबाव डालता है, ताकि वह इस रिश्ते को स्वीकार करें और किसी को न बताए।
  • रिश्ते को छुपाकर रखना: आरोपी महिला से संबंध बनाने के बाद रिश्ते को सार्वजनिक रूप से छुपाता है और महिला को अकेला छोड़ देता है।
  • दूसरी महिला से विवाह करना: झूठे रिश्ते के दौरान आरोपी का पहले से किसी अन्य महिला से विवाह हुआ हो सकता है।
  • कानूनी कार्यवाही से बचने के प्रयास: आरोपी द्वारा पीड़िता को धमकी देना या रिश्वत देकर मामले को दबाने की कोशिश करना भी इस अपराध का हिस्सा हो सकता है।

ये सभी कार्य मिलकर किसी भी महिला के जीवन को बर्बाद कर सकते हैं और उसे मानसिक रूप से बहुत परेशान कर सकते हैं। इसलिए BNS सेक्शन 81 के तहत इस तरह के अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है और दोषी व्यक्ति (Guilty Person) को कड़ी सजा दी जाती है।


BNS Section 81 के तहत अपराधियों को दी जाने वाली सजा

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 81 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को धोखे से विश्वास दिलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो ऐसे अपराध के लिए दोषी (Guilty) पाए जाने पर उसे अधिकतम 10 वर्ष तक के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा हो सकती है। इसके अलावा अदालत दोषी पर जुर्माना (Fine) भी लगा सकती है। यह जुर्माना अपराध की गंभीरता और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है।

सेक्शन 81 के तहत दोषी व्यक्ति को कारावास, जुर्माना या दोनों सजाएं भी हो सकती हैं। सजा की अवधि (Duration) और जुर्माने की राशि अदालत द्वारा तय की जाती है।


बीएनएस सेक्शन 81 में जमानत का क्या प्रावधान है?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 81 के तहत किया गया अपराध गैर-जमानती (Non-Bailable) है। इसका अर्थ यह है कि आरोपी को जमानत (Bail) प्राप्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन करना होगा, और यह केवल न्यायालय के विवेकाधिकार (Discretion) पर निर्भर करता है कि जमानत दी जाए या नहीं। यह अपराध संज्ञेय (Cognizable) है, जिसका अर्थ है कि पुलिस इस मामले में बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के आरोपी को गिरफ्तार (Arrest) कर सकती है।


कुछ अन्य अपराध की धाराएं जिन्हें सेक्शन 81 के साथ लगाया जा सकता है?

बीएनस सेक्शन 81 के बारे में तो हम जान ही गए हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इस तरह के मामले में सिर्फ सेक्शन 81 ही लागू नहीं होती, बल्कि इसके साथ ही कुछ और कानूनी धाराएं भी लागू हो सकती हैं। आइए समझते हैं कि कैसे:

1. बीएनएस की धारा 64 (बलात्कार)

जब किसी महिला के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं तो उसे बलात्कार (Rape) कहते हैं। अगर किसी मामले में महिला के साथ जबरदस्ती की गई है, तो BNS Section 64 लगेगी, भले ही आरोपी ने पहले शादी का झूठा वादा किया हो। बलात्कार एक बहुत गंभीर अपराध है और इसके लिए सजा भी बहुत कठोर होती है।

2. बीएनएस की धारा 318 (धोखाधड़ी)

जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को धोखे में रखकर उससे कोई काम करवाता है या उसका फायदा उठाता है तो उसे धोखाधड़ी (Cheating) कहते हैं। अगर किसी मामले में आरोपी ने सिर्फ शादी का झूठा वादा करके नहीं, बल्कि महिला को किसी और तरह से भी धोखा दिया है, तो धारा 318 भी लागू हो सकती है।


BNS Section 81 के तहत बचाव के उपाय

जब किसी व्यक्ति पर सेक्शन 81 के तहत आरोप लगता है, तो उस व्यक्ति के पास खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कुछ बचाव उपाय होते हैं। आइए इन उपायों को विस्तार से समझते हैं:

  • स्वेच्छा से संबंध: आरोपी यह कह सकता है कि दोनों ने अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए थे और इसमें किसी तरह का दबाव या धोखा नहीं था। इसके लिए वह गवाह (Witness) या अन्य सबूत (Proof) पेश कर सकता है।
  • झूठा वादा नहीं: आरोपी यह दावा कर सकता है कि उसने कभी महिला को शादी का झूठा वादा नहीं किया था। इस बात को साबित करने के लिए वह पुराने मैसेज, चैट, या अन्य सबूत पेश कर सकता है।
  • झूठा आरोप: आरोपी यह कह सकता है कि महिला ने बदला लेने या किसी और कारण से झूठा आरोप (False Blame) लगाया है। इसके लिए वह महिला के पिछले व्यवहार या अन्य सबूतों दिखा सकता है।

निष्कर्ष:- BNS Section 81 का उद्देश्य महिलाओं को धोखे से शारीरिक और मानसिक शोषण से बचाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। यदि आप या आपका कोई परिचित इस तरह के अपराध का शिकार हुआ है, तो कानूनी मदद प्राप्त करना बेहद जरूरी है। हमारी अनुभवी वकीलों की टीम आपकी मदद के लिए हर समय तैयार है। किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या सहायता के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और हमारे विशेषज्ञों से बात करें।




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