भारत में एक जमानती और गैर-जमानती अपराध क्या है

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June 19, 2019
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



एक अपराध क्या है?

कोई भी कृत्य जो किसी भी कानून द्वारा अपराध के रूप में माना जाता है, एक अपराध है। कोई भी कार्य जो दूसरों के अधिकारों के उल्लंघन का कारण बने या दूसरों को इतनी खतरनाक क्षति पहुंचाता है जो बड़े पैमाने पर समाज को प्रभावित करे, उसे अपराध के रूप में निर्दिष्ट किया जाता है। सीआरपीसी की धारा 2 (एन) निम्नानुसार एक अपराध को परिभाषित करता है-

"अपराध" का अर्थ है कोई भी कार्य या लोप जो उस समय के किसी भी लागू क़ानून के तहत दंडनीय हो और कोई ऐसा कार्य जिसके संबंध में मवेशी-अपराध अधिनियम 1871 की धारा 20 के तहत शिकायत की जा सकती है भी शामिल है।
इसके अलावा धारा 39 (2) का कहना है कि भारत से बाहर किया गया कार्य भी एक अपराध है अगर वह कार्य भारत में किया होता तो वह अपराध होता।


जमानत क्या है?

जमानत एक साधन / लेख-पत्र है जिसका उपयोग, आरोपी की आवश्यकता अनुसार उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय द्वारा किया जाता है। सीआरपीसी जमानत शब्द को परिभाषित नहीं करता है, लेकिन वास्तव में, जमानत एक ऐसा समझौता है जिसमें एक व्यक्ति अदालत में आवश्यकता अनुसार उपस्थिति और अनुबंध में निर्धारित शर्तों का पालन करने के लिए एक लिखित दायित्व पेश करता है। अगर वह व्यक्ति समझौते के किसी भी नियम और शर्तों का अनुपालन करने में विफल रहता है तो वह एक निश्चित राशि के अर्थदंड भी आश्वासन देता है।


जमानती और गैर जमानती अपराध के बीच अंतर

जमानती अपराध

जमानती अपराध के मामले में, जमानत की अनुमति अधिकार का विषय है।
यह या तो एक पुलिस अधिकारी जिसने आरोपी को हिरासत में रखा गया है द्वारा दिया जा सकता है। आरोपी को गारंटी या बिना गारंटी के एक "जमानत प्रतिज्ञापत्र" को निष्पादित कर जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
"जमानत बांड" में कुछ नियम और शर्तें शामिल होती हैं, जैसे:
अभियुक्त अदालत या पुलिस अधिकारी की अनुमति के बिना राज्य के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को छोड़ कर नहीं जा सकेगा। हर बार अभियुक्त आवश्यकता अनुसार पुलिस अधिकारी के समक्ष उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करेगा। अभियुक्त किसी भी पुलिस द्वारा जाँच के दौरान माने गये सबूत के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
 
जहां व्यक्ति जमानत के लिए जमानत की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो अदालत को अभियुक्त को जमानत देने से इंकार करने का अधिकार है, भले ही वह अपराध जमानती हो।

जमानती अपराध मामलों के उदाहरण: -
एक गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होना
उपद्रव करना, घातक हथियार से सशस्त्र होना
लोक सेवक द्वारा किसी भी व्यक्ति को चोट पहुंचाने के इरादे से कानून के निर्देश की अवहेलना करना
धोखाधड़ी के इरादों के साथ पब्लिक कर्मचारी द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला वस्त्र या निशानी पहनना
चुनावों के संबंध में रिश्वतखोरी
चुनावों के संबंध में झूठा वक्तव्य
जब किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा आवश्यक शपथ लेने से मना करना
अपने सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में सरकारी कर्मचारी को बाधित करना
न्यायिक कार्यवाही में झूठा सबूत देना या बनाना
किसी भी हानिकारक भोजन या पेय को भोजन और पेय के रूप में बेचना
धार्मिक पूजा में संलग्न जनसमूह में अशांति पैदा करना


गैर जमानती अपराध

एक गैर जमानती अपराध के मामले में जमानत का अनुदान अधिकार का विषय नहीं है। यहां आरोपी को अदालत में आवेदन करना होगा, और जमानत का अनुदान देना या नहीं देना अदालत के विवेक पर निर्भर होगा।
 
अदालत आमतौर पर जमानत को मना कर सकती है, अगर:
 
"जमानत बांड" विधिवत निष्पादित नहीं किया गया है, या यदि ऐसा अपराध किया गया है, जो मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय है जैसे "हत्या" या "बलात्कार" या अभियुक्त के रूप में फरार होने का प्रयास किया है, और उसकी पहचान संदिग्ध है।
 
जमानत के लिए आवेदन मजिस्ट्रेट, जिसके विचाराधीन मामला है, के सामने दर्ज किया जाएगा। दायर होने के बाद आवेदन आम तौर पर अगले दिन सूचीबद्ध होता है। उस दिन, आवेदन सुन लिया जाएगा, और पुलिस अभियुक्त को अदालत में पेश भी करेगी। मजिस्ट्रेट को अगर सही लगता है तो जमानत का आदेश पारित कर सकता है।

गैर जमानती अपराध के उदाहरण: -
हत्या (धारा 302) आईपीसी
दहेज मौत (धारा 304-बी) आईपीसी
हत्या का प्रयास (धारा 307) आईपीसी
स्वेच्छा पूर्वक गंभीर चोट पहुँचाना (धारा 356) आईपीसी
अपहरण (धारा 363) आईपीसी
बलात्कार (धारा 376) आईपीसी आदि।




 

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