मेरी दादी की संपत्ति पर मेरे अधिकार क्या हैं


सवाल

मैंने अपनी दादी की सहमति से उनकी जमीन पर अपने पैसे से एक घर बनाया था। वर्ष 2009 में दादी की मृत्यु बिना वसीयत किए हो गई। उनकी मौत के बाद मेरे पिता और चाचा ने सादे कागज पर एक फर्जी समझौता किया और दादी का जाली अंगूठा लगाकर संपत्ति का दाखिल खारिज करवा लिया। चाचा ने अपना हिस्सा बेच दिया है जबकि मेरे पिता और भाई उसी घर में रह रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि जिस घर को मैंने बनाया, उस पर मेरा और मेरे बेटे का क्या अधिकार है?

उत्तर (2)


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यह मामला दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) दोनों तरह का है। यहां आपके अधिकारों को समझने के लिए कानून को दो हिस्सों में देखना होगा—उत्तराधिकार का नियम और फर्जीवाड़े का मुद्दा।

1. उत्तराधिकार का नियम (Law of Succession): 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' (Hindu Succession Act) की धारा 15 के अनुसार, जब किसी महिला की मृत्यु बिना वसीयत (Intestate) के होती है, तो उसकी संपत्ति सबसे पहले उसके बच्चों (बेटे और बेटियों) और पति को मिलती है। चूंकि आपके पिता जीवित हैं, कानूनी तौर पर दादी की संपत्ति के पहले हकदार आपके पिता और आपके चाचा हैं। पोते (Grandson) का सीधा अधिकार तभी बनता है जब उसके पिता की मृत्यु हो चुकी हो। इसलिए, तकनीकी रूप से जमीन का मालिकाना हक पिता और चाचा के पास ही जाएगा।

2. फर्जीवाड़ा और अवैध बंटवारा: भले ही वारिस आपके पिता हैं, लेकिन जिस तरीके से संपत्ति ट्रांसफर की गई, वह पूरी तरह गैर-कानूनी है।

  • पंजीकरण: 100 रुपये या सादे कागज पर अचल संपत्ति का बंटवारा मान्य नहीं होता। बंटवारा हमेशा 'पंजीकृत' (Registered) होना चाहिए।

  • जालसाजी: मृत व्यक्ति का अंगूठा लगाना या पुरानी तारीख में दस्तावेज बनाना धोखाधड़ी (Fraud) है। कानून कहता है कि "धोखाधड़ी हर कानूनी प्रक्रिया को शून्य कर देती है।"

आपको क्या करना चाहिए: चूंकि आपने उस जमीन पर घर बनाया है, इसलिए आपका पैसा और मेहनत उसमें लगी है। आपको अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तुरंत दीवानी न्यायालय (Civil Court) में एक मुकदमा दायर करना चाहिए। आपको 'घोषणा और विभाजन का वाद' (Suit for Declaration and Partition) दाखिल करना होगा।

इस मुकदमे में आप कोर्ट से मांग करें कि:

  1. पिता और चाचा द्वारा तैयार किए गए फर्जी दस्तावेजों को 'अमान्य और शून्य' (Null and Void) घोषित किया जाए।

  2. चूंकि आपने घर का निर्माण किया है, इसलिए उस ढांचे (Structure) पर आपका मालिकाना हक माना जाए या आपको उसका मुआवजा मिले।

  3. आप पुलिस में धोखाधड़ी (धारा 318 BNS) और जालसाजी (धारा 336 BNS) की एफआईआर भी दर्ज करवा सकते हैं, जिससे चाचा और पिता पर दबाव बनेगा और वे आपको आपका हक देने के लिए मजबूर होंगे।

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दादा-दादी की संपत्ति में पूरी तरह से अधिकार प्राप्त करना उस प्रकृति पर निर्भर करता है जिसके द्वारा संपत्ति उनके द्वारा अधिगृहीत की गई थी, लेकिन इस मामले में आपने आरोप लगाया है कि आपकी दादी की मृत्यु के बाद 100rs बैक डेट नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर के आधार पर फर्जी तरीके से विभाजन हुआ है। यह दिखाते हुए कि जब वह जीवित थी, उसी तरह प्रभावित हुई है, धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों के बारे में चिंता करने से कोई अधिकार नहीं बनता है और उत्परिवर्तन प्रविष्टियों की खुराक शीर्षक नहीं होती है इसलिए यदि आप अपना हिस्सा चाहते हैं तो आपको अपने हिस्से की नक्काशी के लिए एक विभाजन सूट दाखिल करना होगा।


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