क्या संयुक्त पैतृक संपत्ति की वसीयत बिना बंटवारे के की जा सकती है
सवाल
उत्तर (2)
जी हां, आप बिल्कुल ऐसा कर सकते हैं। 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956' (Hindu Succession Act) की धारा 30 स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी हिंदू व्यक्ति संयुक्त या पुश्तैनी संपत्ति में अपने 'अविभाजित हिस्से' (Undivided Share) की वसीयत कर सकता है। ऐसी वसीयत पूरी तरह से कानूनी और मान्य होगी।
लेकिन, एक वकील होने के नाते मेरी आपको सलाह है कि आप ऐसा करने से बचें। भले ही कानून इसकी इजाजत देता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से (Practically) यह आपके वारिसों के लिए भविष्य में बहुत बड़ी मुसीबत बन सकता है।
इसकी मुख्य वजहें ये हैं:
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कब्जे की समस्या: अगर आप बिना बंटवारे के वसीयत करते हैं, तो आपके वारिस को संपत्ति में 'हक' (Title) तो मिल जाएगा, लेकिन उसे यह नहीं पता होगा कि जमीन का कौन सा टुकड़ा उसका है। उसे यह नहीं पता होगा कि वह किस हिस्से पर खेती करे या घर बनाए क्योंकि सीमाएं तय नहीं होंगी।
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भविष्य में मुकदमा: अपना हिस्सा अलग करवाने और कब्जा लेने के लिए आपके वारिस को बाद में कोर्ट में 'बंटवारे का मुकदमा' (Partition Suit) लड़ना ही पड़ेगा, जो सालों चल सकता है। संयुक्त संपत्ति की वसीयत अक्सर परिवार में भ्रम और झगड़े का कारण बनती है।
इसलिए, सही तरीका यही है कि आप पहले परिवार में सहमति से या कोर्ट के जरिए जमीन का 'बंटवारा' (Partition) करवा लें। जब यह तय हो जाए कि कौन सा हिस्सा (चौहद्दी) आपका है, तब आप उसकी वसीयत करें। इससे आपके जाने के बाद आपके वारिसों को कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
पुश्तैनी जमीन में भी अपनी वसीयत की जा सकती है लेकिन ऐसी वसीयत सिर्फ अपने हिस्से के संबंध में होगी परंतु ऐसी व्यवस्था में प्रकरण के चलने के दौरान कानूनी प्रश्न पैदा हो सकते हैं अच्छा होगा कि संयुक्त प्रॉपर्टी में से अपने हिस्से को अलग करा लिया जाए जिससे प्रॉपर्टी में आप का हिस्सा तय हो जाएगा बिना बटवारा के ही वसीयत करने पर आप का हिस्सा आगे चलकर प्रूफ करना पड़ेगा जोकि कठिन होगा इसलिए मेरी आपको सलाह है क्या पहले अपने हिस्से को अलग करा ले और इसके बाद अपने हिस्से की वसीयत कर दे.
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