भाई से संपत्ति बंटवारे का मुकदमा जीतने में कितना समय लगता है
सवाल
उत्तर (3)
सिविल न्यायालयों में संपत्ति बंटवारे के मुकदमों में समय लग सकता है। सामान्य तौर पर, एक 'बंटवारे के मुकदमे' (Partition Suit) का अंतिम फैसला आने में 3 से 5 साल का समय लग सकता है। यह समय इस बात पर निर्भर करता है कि विरोधी पक्ष कितनी जल्दी कोर्ट में जवाब देता है और गवाहों की प्रक्रिया कितनी लंबी चलती है।
जहां तक संपत्तियों को सील करने का सवाल है, दीवानी मामलों में कोर्ट आमतौर पर संपत्ति को सील (ताला लगाना) नहीं करता, जब तक कि संपत्ति के नष्ट होने का बहुत बड़ा खतरा न हो। इसके बजाय, कोर्ट आपके हितों की रक्षा के लिए एक 'निषेधाज्ञा' (Temporary Injunction) या 'स्थगन आदेश' (Stay Order) जारी करता है।
जब आप मुकदमा दायर करेंगे, तो आपके वकील को 'सिविल प्रक्रिया संहिता' (Civil Procedure Code - CPC) के आदेश 39 नियम 1 और 2 के तहत एक आवेदन देना होगा। इस आवेदन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट तुरंत एक आदेश पारित कर सकता है कि जब तक केस का फैसला नहीं आ जाता, तब तक कोई भी पक्ष उन तीनों संपत्तियों को न तो बेच सकता है और न ही उनका स्वरूप बदल सकता है (जैसे निर्माण या तोड़फोड़)। इसे 'यथास्थिति' (Status Quo) का आदेश कहते हैं।
बंटवारे की प्रक्रिया में सबसे पहले कोर्ट एक 'प्रारंभिक डिक्री' (Preliminary Decree) जारी करता है, जिसमें यह तय होता है कि किसका कितना हिस्सा है। इसके बाद एक कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया जाता है जो जमीन का नक्शा बनाकर यह बताता है कि उसे भौतिक रूप से कैसे बांटा जाए। अंत में 'अंतिम डिक्री' (Final Decree) जारी होती है। मेरी सलाह है कि कोर्ट जाने से पहले एक बार 'कानूनी नोटिस' (Legal Notice) भेजकर आपसी समझौते की कोशिश जरूर करें, क्योंकि उससे समय और पैसा दोनों बचते हैं।
उपरोक्त प्रश्न पर सबसे पहले आपके पिता अपने भाई से आपसी सहमति से संपत्ति के बंटवारे के लिए बात करते हैं, कानूनी भाषा में आपसी सहमति से विभाजन का अर्थ बहमी बटवारा है। यदि आपके चाचा आपसी सहमति से विभाजन के लिए सहमत नहीं हैं तो आपके पिता अपने भाई के खिलाफ पूरी संपत्ति के संबंध में विभाजन का मुकदमा दायर कर सकते हैं। एक विभाजन सूट में मुख्य सामग्री यह है कि संयुक्त नाम में तीन गुण दिए गए हैं। इस मुकदमे के दाखिल होने के बाद जब मामला प्रवेश चरण पर है तो अदालत ने मामले की स्वीकृति के बाद पहली तारीख लगभग 90 दिनों के लिए तय की, इस दौरान नोटिस दिए गए और विरोधी पक्ष ने अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। सिविल प्रक्रिया संहिता में विरोधी पक्ष द्वारा आपत्ति दर्ज करने के लिए नोटिस की सेवा के बाद 90 दिनों की निर्धारित अवधि है। विरोधी पक्ष द्वारा निर्धारित अवधि के अन्दर आपत्तियां दाखिल करने के लिए फील्ड में प्रस्तुत करने पर न्यायालय के आदेश से मामला विशेषज्ञ कार्यवाही में है। उसके बाद सबूत के स्तर पर आपके पिता अपने सबूत के सबूत और अदालत द्वारा लिए गए बयान को जमा करते हैं। इसके बाद अंतिम बहस आपके पिता के वकील द्वारा की जाएगी और फैसला आपके पक्ष में होगा।
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