चेक बाउंस केस में वारंट निकलने और पुलिस का फोन आने पर तुरंत क्या करें
सवाल
उत्तर (2)
यह एक आपातकालीन स्थिति है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। धारा 138 (चेक बाउंस) एक 'जमानती अपराध' (Bailable Offense) है, जिसका मतलब है कि आपको जेल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते आप सही कानूनी कदम उठाएं। वारंट जारी होने का मुख्य कारण यह है कि शायद आपने कोर्ट से पहले आए समन (Summons) को नजरअंदाज किया या आप तारीख पर कोर्ट नहीं पहुंचे।
जब कोर्ट वारंट जारी करता है, तो पुलिस का काम सिर्फ आपको पकड़कर कोर्ट के सामने पेश करना होता है। पुलिस इस मामले में समझौता नहीं करा सकती। आपको तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
-
वकील से संपर्क करें: पुलिस थाने जाने से पहले तुरंत किसी स्थानीय वकील को अपने केस की जानकारी दें। अगर यह 'गैर-जमानती वारंट' (Non-Bailable Warrant - NBW) है, तो पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए वकील के बिना थाने न जाएं।
-
वारंट रद्दीकरण (Cancellation of Warrant): आपको अपने वकील के साथ सीधे संबंधित कोर्ट में जाना होगा। वहां आपको वारंट रद्द करवाने यानी 'रिकॉल एप्लीकेशन' (Recall Application) लगानी होगी। 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 72 (जो पहले सीआरपीसी 70(2) थी) के तहत जज साहब वारंट को रद्द कर सकते हैं।
-
जमानत (Bail): वारंट रद्द करवाते समय आपको कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करना होगा। चूंकि रकम छोटी है (45,000 रुपये), कोर्ट आपको उसी दिन जमानत दे देगा। इसके लिए आपको एक 'जमानतदार' (Surety) की जरूरत पड़ेगी।
-
समझौता: एक बार जमानत मिलने और वारंट हटने के बाद, आप कोर्ट में जज के सामने कह सकते हैं कि आप पैसा देने को तैयार हैं। चेक बाउंस के मामले में अगर आप पैसा चुका देते हैं, तो केस तुरंत खत्म (Compound) हो जाता है।
पुलिस के बुलावे को हल्के में न लें और छिपने की कोशिश न करें, वरना कोर्ट आपको 'भगोड़ा' घोषित कर सकता है जिससे आपकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी। सीधे कोर्ट में सरेंडर करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
आपकी समस्या का समाधान यह है आप चेक बाउंस होने के 15 दिन के अंदर अपॉजिट पार्टी को 138 एन आई एक्ट के अंतर्गत लीगल नोटिस भेज दे तथा लीगल नोटिस भेजने के 45 दिन के अंदर 138 n.i. एक्ट में मुकदमा कायम करें मुकदमा कायम करने के लिए चेक की ओरिजिनल कॉपी कथा चेक बाउंस का चालान साथ लगाएं मुकदमा कायम ई के पश्चात न्यायालय द्वारा समन जारी किए जाएंगे और नियत तिथि पर विरोधी पक्ष या उत्तर दाता चेक के अमाउंट का 25 परसेंट खजाने में जमा करते हुए अपना लिखित कथन अथवा आपत्ती दाखिल करेगा तथा मुकदमे की प्रक्रिया चालू हो जाएगी विरोधी पक्ष द्वारा जमा किया गया 25 परसेंट आपको मिल जाएगा .
यदि आप चाहें तो पुलिस की मदद ले सकते हैं . पुलिस वाले दोनों पक्षों को आमने सामने बैठा कर आपस मैं सहमति करवा सकती है तथा विपक्षी से आपको चेक का पूरी धनराशि दिलवा सकती है .
अस्वीकरण: उपर्युक्त सवाल और इसकी प्रतिक्रिया किसी भी तरह से कानूनी राय नहीं है क्योंकि यह LawRato.com पर सवाल पोस्ट करने वाले व्यक्ति द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है और LawRato.com में चैक बाउन्स वकीलों में से एक द्वारा जवाब दिया गया है विशिष्ट तथ्यों और विवरणों को संबोधित करें। आप LawRato.com के वकीलों में से किसी एक से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए अपने तथ्यों और विवरणों के आधार पर अपनी विशिष्ट सवाल पोस्ट कर सकते हैं या अपनी सवाल के विस्तार के लिए अपनी पसंद के वकील के साथ एक विस्तृत परामर्श बुक कर सकते हैं।
चैक बाउन्स कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- सर मेरे ऊपर एक्स बाउंस का केस हुआ है और मुझे संबंध भेजा गया है लुधियाना कोर्ट से कि मुझे यह पता करना है कि जो कैसे लगाया है वह कितने पैसों का लगाया है मेरी पांच एमी बोनस हुई है तो क्या सारे एमी बस करके कैसे लगाया है यह एक एमी का कैसे लगेगा मुझे यह पता करना है
- सर मेरे ऊपर एक्स बाउंस का केस हुआ है और मुझे संबंध भेजा गया है लुधियाना कोर्ट से कि मुझे यह पता करना है कि जो कैसे लगाया है वह कितने पैसों का लगाया है मेरी पांच एमी बोनस हुई है तो क्या सारे एमी बस करके कैसे लगाया है यह एक एमी का कैसे लगेगा मुझे यह पता करना है
- Mene kisi se 2 lakh liye the 7% bayaj per 1 saal se bayaj har mahine de raha tha abhi 4 mahine se meri halat kharab Ho g e toh mene kaha bhai ab bayaj bayaj kuch nhi dheere dheere rakam duga toh usne 2 lakh ki jagah 5 lakh bhar kar check bounce karake 138 ka notice bhijwa diya ab me kya karu mere pass to khane ke pese nhi hai
- किसी ने मेरे खिलाफ rs 250000 का चेक बाउंस का केस लगाया जिसमें मैने कोर्ट में उपस्तिथ होकर जमानत् करा ली ओर आगमी पेशी चार्ज हेतु नियत है में चेक कि समस्त राशि न्यायालय में जमा करने को तैयार हूं लेकिन परिवादी चेक कि उक्त राशि समझौता नही चाहता