चेक बाउंस केस में वारंट निकलने और पुलिस का फोन आने पर तुरंत क्या करें


सवाल

मेरा पैंतालीस हजार रुपये का एक चेक बाउंस हो गया था और अब मेरे खिलाफ कोर्ट से वारंट जारी हो गया है। मुझे पुलिस वाले का फोन आया है और उन्होंने मुझे थाने बुलाया है। मैं बहुत डरा हुआ हूं, कृपया मुझे बताएं कि गिरफ्तारी से बचने के लिए मुझे अब आगे क्या करना चाहिए?

उत्तर (2)


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यह एक आपातकालीन स्थिति है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। धारा 138 (चेक बाउंस) एक 'जमानती अपराध' (Bailable Offense) है, जिसका मतलब है कि आपको जेल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते आप सही कानूनी कदम उठाएं। वारंट जारी होने का मुख्य कारण यह है कि शायद आपने कोर्ट से पहले आए समन (Summons) को नजरअंदाज किया या आप तारीख पर कोर्ट नहीं पहुंचे।

जब कोर्ट वारंट जारी करता है, तो पुलिस का काम सिर्फ आपको पकड़कर कोर्ट के सामने पेश करना होता है। पुलिस इस मामले में समझौता नहीं करा सकती। आपको तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

  1. वकील से संपर्क करें: पुलिस थाने जाने से पहले तुरंत किसी स्थानीय वकील को अपने केस की जानकारी दें। अगर यह 'गैर-जमानती वारंट' (Non-Bailable Warrant - NBW) है, तो पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए वकील के बिना थाने न जाएं।

  2. वारंट रद्दीकरण (Cancellation of Warrant): आपको अपने वकील के साथ सीधे संबंधित कोर्ट में जाना होगा। वहां आपको वारंट रद्द करवाने यानी 'रिकॉल एप्लीकेशन' (Recall Application) लगानी होगी। 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 72 (जो पहले सीआरपीसी 70(2) थी) के तहत जज साहब वारंट को रद्द कर सकते हैं।

  3. जमानत (Bail): वारंट रद्द करवाते समय आपको कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करना होगा। चूंकि रकम छोटी है (45,000 रुपये), कोर्ट आपको उसी दिन जमानत दे देगा। इसके लिए आपको एक 'जमानतदार' (Surety) की जरूरत पड़ेगी।

  4. समझौता: एक बार जमानत मिलने और वारंट हटने के बाद, आप कोर्ट में जज के सामने कह सकते हैं कि आप पैसा देने को तैयार हैं। चेक बाउंस के मामले में अगर आप पैसा चुका देते हैं, तो केस तुरंत खत्म (Compound) हो जाता है।

पुलिस के बुलावे को हल्के में न लें और छिपने की कोशिश न करें, वरना कोर्ट आपको 'भगोड़ा' घोषित कर सकता है जिससे आपकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी। सीधे कोर्ट में सरेंडर करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

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आपकी समस्या का समाधान यह है आप चेक बाउंस होने के 15 दिन के अंदर अपॉजिट पार्टी को 138 एन आई एक्ट के अंतर्गत लीगल नोटिस भेज दे तथा लीगल नोटिस भेजने के 45 दिन के अंदर 138 n.i. एक्ट में मुकदमा कायम करें मुकदमा कायम करने के लिए चेक की ओरिजिनल कॉपी कथा चेक बाउंस का चालान साथ लगाएं मुकदमा कायम ई के पश्चात न्यायालय द्वारा समन जारी किए जाएंगे और नियत तिथि पर विरोधी पक्ष या उत्तर दाता चेक के अमाउंट का 25 परसेंट खजाने में जमा करते हुए अपना लिखित कथन अथवा आपत्ती दाखिल करेगा तथा मुकदमे की प्रक्रिया चालू हो जाएगी विरोधी पक्ष द्वारा जमा किया गया 25 परसेंट आपको मिल जाएगा .
यदि आप चाहें तो पुलिस की मदद ले सकते हैं . पुलिस वाले दोनों पक्षों को आमने सामने बैठा कर आपस मैं सहमति करवा सकती है तथा विपक्षी से आपको चेक का पूरी धनराशि दिलवा सकती है .


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