छुट्टी पर आए फौजी के साथ पुलिस दुर्व्यवहार और झूठे मामले में क्या कानूनी उपाय हैं


सवाल

मैं भारतीय सेना का एक जवान हूँ और छुट्टी पर घर आया था। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने मेरे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया और मुझ पर हमला करने की कोशिश की। आत्मरक्षा में मैंने उसे केवल पकड़ा था, लेकिन उन्होंने मुझ पर झूठी धाराएं लगाकर मुझे चार दिन के लिए जेल भेज दिया। अब यह मामला अदालत में चल रहा है। वह पुलिसवाला मेरा और मेरी वर्दी का अपमान कर रहा है और भद्दे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है। एक सैनिक होने के नाते मुझे अपने बचाव और सम्मान की रक्षा के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

उत्तर (2)


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एक सैनिक के साथ ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी द्वारा किया गया ऐसा दुर्व्यवहार न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सेना के सम्मान पर भी चोट है। चूँकि मामला अब अदालत में है, इसलिए आपको सबसे पहले अपनी बेगुनाही और पुलिस की ज्यादती को साबित करने के लिए ठोस कानूनी कदम उठाने होंगे।

सबसे पहले, आपको इस पूरी घटना की लिखित जानकारी अपनी यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर को देनी चाहिए। सेना के नियमों के अनुसार, जब भी किसी फौजी के खिलाफ कोई दीवानी या आपराधिक मामला दर्ज होता है, तो संबंधित पुलिस स्टेशन को सेना के अधिकारियों को सूचित करना अनिवार्य होता है। आपकी यूनिट का हस्तक्षेप स्थानीय पुलिस पर दबाव बना सकता है और मामले की निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) सुनिश्चित कर सकता है।

दूसरा कदम यह है कि आप उस पुलिसकर्मी के खिलाफ जिला पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) को लिखित शिकायत दें। यदि वहां सुनवाई न हो, तो आप राज्य मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) में अपनी शिकायत दर्ज कराएं। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) के तहत पुलिस द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना और बिना वजह किसी को हिरासत में रखना दंडनीय है। आप अदालत में उस पुलिसकर्मी के खिलाफ मानहानि (Defamation) और गाली-गलौज के लिए अलग से निजी शिकायत (Private Complaint) भी दर्ज कर सकते हैं।

चूँकि आप चार दिन जेल में रहे, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने वकील के माध्यम से अदालत में पुलिस की ज्यादती और आत्मरक्षा (Right of Private Defense) के अपने अधिकार को साबित करें। यदि आपके पास घटना का कोई वीडियो या गवाह है, तो उसे साक्ष्य (Evidence) के रूप में पेश करें। आप उच्च न्यायालय (High Court) में इस झूठी एफआईआर (FIR) को रद्द करवाने के लिए याचिका भी दायर कर सकते हैं।

सैनिकों के लिए त्वरित निपटान (Priority Disposal) का प्रावधान होता है ताकि उनके मामले जल्द सुलझ सकें और उनकी ड्यूटी प्रभावित न हो।

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नमस्कार,

आप इस घटना के बारे में किसी भी पुलिस थाने में एफ आईआर कर सकते हैं यदि आपका f.i.r. ना लिखा जाए तो आप अपनी शिकायत डिस्टिक सुपरीटेंडेंट को कर सकते हैं . यदि वहां भी आप की सुनवाई ना हो तो आप अपने शहर के मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करवा सकते हैं और साथ ही साथ नेशनल हुमन राइट्स कमिशन को भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं . ऐसा करने से आपके साथ हुए दुर्व्यवहार की छानबीन होगी और आपको इंसाफ करवाया जाएगा .

धन्यवाद


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