सर मामला कानपुर नगर गोविन्द नगर ब्लॉक8


सवाल

सर, मामला कानपुर नगर के गोविन्द नगर, ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का है। नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में यह भूमि सार्वजनिक पार्क/ग्रीन स्पेस के रूप में दर्ज है। पिछले कुछ वर्षों में पार्क के लगभग 70% हिस्से पर अवैध पक्का निर्माण, धार्मिक निर्माण, इंटरलॉकिंग एवं कंक्रीटीकरण कर दिया गया है। इससे पार्क का हरित क्षेत्र, खुले स्थान तथा पर्यावरणीय स्वरूप लगभग समाप्त हो गया है। माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिनांक 22.04.2026 को आदेश पारित कर पार्क से अतिक्रमण हटाकर उसे मूल स्वरूप में बहाल करने का निर्देश दिया था, परन्तु आज तक पार्क का पर्यावरणीय पुनर्स्थापन नहीं हुआ है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या सार्वजनिक पार्क के लगभग 70% भाग पर हुए अवैध निर्माण एवं इंटरलॉकिंग के कारण हरित क्षेत्र के विनाश और पर्यावरणीय क्षति के आधार पर NGT में Original Application दाखिल की जा सकती है? क्या NGT पार्क को मूल हरित स्वरूप में बहाल करने, अवैध निर्माण एवं इंटरलॉकिंग हटाने, पर्यावरणीय क्षति का आकलन कराने तथा संबंधित अधिकारियों/जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है?

उत्तर (2)


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आप निश्चित रूप से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में मूल आवेदन (ओरिजिनल एप्लीकेशन) दाखिल कर सकते हैं, और एनजीटी इस मामले में पूर्णतः हस्तक्षेप करने तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने में सक्षम है।

भारत के पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत, कोई भी व्यक्ति जो सार्वजनिक हित में पर्यावरणीय क्षति से अवगत है, वह एनजीटी के समक्ष सीधे आवेदन कर सकता है। चूँकि आपने स्पष्ट किया है कि रामदेवी आर्य पार्क का लगभग 70% भाग अवैध निर्माणों, धार्मिक प्रतिष्ठानों, इंटरलॉकिंग एवं कंक्रीटीकरण से ग्रस्त है, जिससे वहाँ की हरित क्षेत्र, खुला स्थान एवं पारिस्थितिकी तंत्र लगभग नष्ट हो चुका है, यह पर्यावरणीय क्षति की गंभीर श्रेणी में आता है। इसके अलावा, माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहले ही 22 को अतिक्रमण हटाने का आदेश दे चुका है, किंतु उसका पालन न होना न्यायालय की अवमानना भी है। ऐसी स्थिति में एनजीटी न केवल हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु दबाव बना सकता है, बल्कि पर्यावरणीय क्षति के आकलन के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन भी कर सकता है।

एनजीटी के पास व्यापक अधिकार हैं; वह संबंधित अधिकारियों (जैसे नगर निगम एवं केडीए) को उनकी उपेक्षा के लिए दोषी ठहराते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह बना सकता है, सभी अवैध निर्माण एवं इंटरलॉकिंग को हटाने का सख्त आदेश दे सकता है, पार्क को उसके मूल हरित स्वरूप में पुनर्स्थापित करने का निर्देश दे सकता है, तथा क्षतिपूर्ति के रूप में आर्थिक जुर्माना भी लगा सकता है। अपने मूल आवेदन में आपको पार्क की भूमि के राजस्व अभिलेख, वर्तमान स्थिति की स्पष्ट तस्वीरें, हाईकोर्ट के आदेश की प्रति तथा अधिकारियों की उपेक्षा का ब्योरा अवश्य संलग्न करना चाहिए। इससे एनजीटी को मामले की गंभीरता शीघ्र समझ आएगी और वह संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी कर सकेगा। अतः आप निश्चिंत होकर एनजीटी का दरवाजा खटखटाएँ, जहाँ पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील न्याय मिलना सुनिश्चित है।


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